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इस्लाम का चीनीकरण

चीन की ख्याति इस मायने में भी है कि वह लगातार कुछ कमाल करता रहा है। इस बात को कई, उदाहरणों से साबित किया जा सकता है। उसने साम्यवाद को 360 डिग्री पर मोड़ दिया। तकनीक के मामले में भी उसने जबरदस्त क्रांति की। सबसे कम दाम पर वस्तुओं को बनाने में उसका कोई सानी नहीं है। दुर्गम पहाड़ों पर सड़कें बनाई। रेलगाड़ियां भी। दुनिया के कई देशों में गुजरने वाली सड़क पर वह ड्रीम प्रोजेक्ट की तरह काम कर रहा है। अब वह नया कमाल करने जा रहा है। चीन इस्लाम का चीनीकरण करने जा रहा है। इस बात को लेकर इस्लामिक देशों समेत पूरी दुनिया में एक जबरदस्त चर्चा छिड़ गयी है। कई मुस्लिम बहुल देशों में इसे लेकर नाखुशी है।

चीन सरकार ने एक ऐसा कानून पारित किया है जिससे इस्लाम में बदलाव की कोशिश की जाएगी और उसे समाजवादी रंग दिया जाएगा। देश में धर्म का पालन कैसे किया जाए इसे नए सिरे से तय करने के लिए चीन का यह नया कदम है। खबरों के मुताबिक आठ इस्लामिक संघों के प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक के बाद सरकारी अधिकारियों ने ‘इस्लाम को समाजवाद के अनुकूल करने और धर्म के क्रिया कलापों को चीन के हिसाब से करने के कदम को लागू करने के लिए सहमति व्यक्त की है।’

गौरतलब है कि चीन ने पिछले कुछ वक्त से धार्मिक समूहों के साथ धर्म को चीन के संपर्क में ढालने को लेकर आक्रमक अभियान चलाया है। यह भी एक तथ्य है कि चीन के कुछ हिस्सों में इस्लाम धर्म का पालन करने की सख्त मनाही है। इन इलाकों में मुस्लिम व्यक्ति को नमाज अता करने, रोजा रखने, दाढ़ी बढ़ाने या महिला को हिजाब पहने पाए जाने पर गिरफ्तारी का सामना करना पड़ सकता है।

आकड़ों की बात करें तो चीन में लगभग दो करोड़ मुसलमान हैं। चीन में इस्लाम सहित कुल पांच धर्मों को मान्यता दी गई। जिसमें ताओ, कैरोलिन और बौद्ध धर्म शामिल है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय में लंबे अरसे से चीन की इस बात के लिए तीखी आलोचना होती रही है कि उसने दस लाख से ज्यादा उइगर मुसलमानों को सीक्यांग के इनडॉक्ट्रिनेशन शिविरों में रखा है, जहां उनमें कथित देशभक्ति के बारे में ब्रेनवाश किया जाता है।

चीन ने इस्लाम के चीनीकरण करने की अपनी पंचवर्षीय योजना को फिलहाल सार्वजनिक नहीं किया है। लेकिन मसौदे को लेकर 6-7 जनवरी को हुई बैठक के बाद चाइनीज इस्लामिक एसोसिएशन की वेबसाइट पर एक प्रेस रिलीज में इसका जिक्र है। इस बात की भी पूरी गुंजाइश है कि चीनीकरण के नए उपाय वैश्विक स्तर पर जांच को बुलावा दे सकते हैं। खासतौर पर ऐसे वक्त में जब चीन में लाखों उइगर मुसलमानों को शिनजियांग में शिविरों में रखे रखे जाने की रिपोर्ट आई है। शिनजियांग एक स्वायत्त क्षेत्र है और चीन के सुदूर पश्चिम में मध्य एशिया की सीमा पर स्थित है।

स्मरण रहे कि चीन इस एजेंडे पर बहुत दिनों से लगा हुआ था। वर्ष 2015 में शी जिनपिंग की अपील के बाद पार्टी की एक इकाई यूनाइटेड फ्रंटवर्क डिपार्टमेंट विदेशी धर्मों, इस्लाम, ईसाइयों और बौद्ध धर्म के चीनीकरण के लिए पूरे जोर -शोर से काम कर रही है। यह इकाई उन कारणों को शांत करने का काम करती है जो देश में अस्थिरता पैदा करते हैं।

पंचवर्षीय एजेंडे के तहत उनका मकसद इस्लाम को और ज्यादा चीनी बनाना है। सूत्रों के मुताबिक इस योजना में इस्लाम में चीन को साम्यवादी सिद्धांतों के अनुसार बदलाव किये जायेंगे। इस्लाम के चीनीकरण से आशय उनकी मान्यताओं, रीति रिवाजों और विचारधारा को बदलना नहीं बल्कि उसे समाजवादी समाज के अनुकूल बनाना है। एक सकारात्मक भाव के साथ विभिन्न कहानियों के माध्यम से मुसलमानों का मार्गदर्शन किया जाएगा। मदरसों में किताबे रखी जाएगी ताकि लोग इस्लाम के चीनीकरण को और बेहतर ढंग से समझ सके।

खास बात यह है कि इस योजना के बारे में जितनी जानकारियों दी गई है, उससे ज्यादा अभी गुप्त रखा गया है। पूरी योजना बाद में सार्वजनिक की जाएगी। चीन सरकार की यह योजना उसकी एक और योजना की याद दिलाती है जो पिछले साल ईसाईयों पर लागू की गई। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग चीनी इसे एजेंडे को लेकर गंभीर ही नहीं, आक्रमक भी है। वहां की अल्पसंख्यक मुस्लिम संस्कृति और परंपराओं को कम्युनिस्ट पार्टी के समाजवादी सांचे में ढालने की राष्ट्रपति की नीति के अब आक्रमक तेवर अख्तियार कर लिया है।

चीन की इस पहल की विश्व स्तर पर व्यापक आलोचना हो रही है। अरब जगत ने रहस्यमयी चुप्पी साध ली है। दरअसल यह कदम जिनपिंग के राज में धार्मिक अल्पसंख्यकों, खासकर उइगर मुसलमानों के अधिकारों और प्रयासों के खिलाफ चलाई जा रही मुहिम का ही एक हिस्सा है। चीन का दावा है कि ये समुदाय धार्मिक उग्रवाद को अपना सकता है और वह इस क्षेत्र में आतंकवाद को पनपने का मौका नहीं देना चाहते। जानकारों के अनुसार चीनी सरकार इस्लामी समुदाय के उपर अपना शिकंजा कसरना चाहती है और सार्वजनिक जगहों में ऐसी किसी भी चीज को हटाना चाहती है जो बाहर की लगती हो, इसका मतलब हो सकता है अरबी भाषा में लिखे हुए सार्वजनिक साइन बोर्ड हटाना और अरबी डिजाइन वाली मस्जिदों को बदलना। इसके अलावा सरकार और बातों को भी सीधे नियंत्रित कर सकती है। मसलन धर्म का पालन कैसे किया जाए, खासतौर पर हर हफ्ते दिए जाने वाले मौलवियों को संदेश को लेकर।

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