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अमेरिका से तल्ख होते रिश्तों के चलते ईरान ने बढ़ाई अपनी सैन्य शक्ति

अमेरिकी आरोपों को ईरान ने किया खारिज, कहा तनाव को बढ़ा रहा है अमेरिका

संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा ईरान के मध्य पूर्व में परमाणु-सक्षम बी 52 बमवर्षक विमानों के उड़ान भरने के कुछ दिनों बाद ईरान की सेना ने देश के दक्षिणी तटों पर सैन्य अभ्यास करना शुरू कर दिया है। ईरानी सेना ने दो हफ्तों में पाँचवाँ सैन्य प्रदर्शन किया है। ईरान की थल सेना ने मकरान के तट और ओमान के समुद्र के किनारे भूमि, वायु और समुद्री युद्ध का खेल आयोजित किया। ईरानी मीडिया ने हवाई जहाज से पैराशूटिंग कर रहे दर्जनों ईरानी सैनिकों के नाटकीय फुटेज को प्रसारित किया। जबकि सेना द्वारा जारी की गई छवियां युद्ध में हेलीकॉप्टर, टैंक और मिसाइलों को दिखाती हैं।

ईरानी सेना के उप-प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद होसैन दादरास ने कहा, “आज सेना के ग्राउंड बलों ने ड्रोन और मिसाइलों को तैनात करने में काफी क्षमता हासिल की है। खतरों के जवाब में सेना की जमीनी ताकत दिखाई जाएगी।” ईरान का सैन्य अभियास उस दिन के बाद शुरू हुआ जब अमेरिका ने इस क्षेत्र में बी-52 बमवर्षकों को उड़ाया, जो पिछले दो महीनों में पांचवीं बार था। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन ने ईरान पर कठोर आर्थिक प्रतिबंधों के साथ एक दबाव नीति का पालन किया गया था। अमेरिका ने ईरान के परमाणु परीक्षण पर प्रतिबंध लगा रखे है।
ईरान के शीर्ष परमाणु वैज्ञानिक मोहसेन फखरीजदेह की राजधानी तेहरान के इलाके दमावंद में हत्या कर दी गई थी। हमला उनकी कार पर किया गया था।

ईरान और अमेरिका दोनों देशों के बीच परमाणु समझौते को लेकर काफी समय से तनावपूर्ण संबंध बने हुए हैं। जो सुधरने के बजाय और भी बढ़ते जा रहे हैं। ईरान का कहना है कि अगर अमेरिका 21 फरवरी से पहले अपने प्रतिबंध उस पर से नहीं हटाता है, तो वह संयुक्त राष्ट्र के परमाणु निरीक्षको को निरीक्षण नहीं करने देगा। इससे पहले परमाणु मामलों पर नज़र रखने वाले संयुक्त राष्ट्र की संस्था इंटरनेशनल एटॉमिक इनर्जी एजेंसी बता चुकी है कि ईरान परमाणु संवर्धन को 20 प्रतिशत शुद्धता तक बढ़ाने जा रहा है। ईरान की संसद ने नवंबर में एक कानून पारित किया था। जिसके तहत अगर उस पर लगे प्रतिबंधों में ढील नहीं दी जाती है, तो ये कानून सरकार को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी आईएईए को ईरान के परमाणु स्थलों के निरीक्षण को रोकने के लिए बाध्य करेगा और तेहरान के 2015 के परमाणु समझौते के तहत निर्धारित सीमा से अधिक यूरेनियम संवर्धन कर सकेगा।

जनवरी में इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड के कुद्स फ़ोर्स के कमांडर मेजर जनरल क़ासिम सुलेमानी की अमेरिकी ड्रोन हमले में मौत हो गई थी। जबकि नवंबर में देश के प्रमुख परमाणु वैज्ञानिक मोहसिन फ़ख़रिज़ादेह की एक रिमोट कंट्रोल हथियार से हत्या कर दी गई थी। ईरान ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए अरेस्ट वारेंट जारी कर दिया था। इसके लिए ईरान ने मेजर जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या को लेकर इंटरपोल को रेड नोटिस भेजा था। जिसमें उन्होंने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अन्य 47 लोगों की गिरफ्तारी की मांग की है।

रविवार 17 जनवरी को, ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने अमेरिका के बी-52 मिशन की निंदा की और कहा कि “अगर ईरान को डराना है तो अमेरिका को अपनी सेना पर अरबों खर्च करना होगा। हम आक्रामक लोगों को कुचलने से नहीं कतराते हैं।” मंगलवार को एक भाषण में, आईआरजीसी के कमांडर-इन-चीफ हुसैन सलामी ने कहा कि युद्ध का अभ्यास ईरानी लोगों के लिए शांति और आत्मविश्वास लाते हैं और संकेत देते हैं कि ईरान खुद का बचाव करने में लड़खड़ाएगा नहीं।

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