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खाड़ी देशों से मज़बूत हो भारत की दोस्ती, पीएम जा रहे हैं यूएई और बहरीन

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22 अगस्त से 27 अगस्त के बीच होने वाले फ्रांस ,यूएई ,बहरीन और जी -7 की बैठक में शामिल होंगे। पीएम मोदी फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के निमंत्रण पर वहां जायेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और बहरीन की तीन दिवसीय यात्रा पर जाएंगे, जिसकी शुरुआत 23 अगस्त से होगी। मोदी इस दौरान दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के साथ द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और परस्पर हित के वैश्विक मुद्दों पर व्यापक चर्चा करेंगे। विदेश मंत्रालय द्वारा बताया गया, कि प्रधानमंत्री मोदी पहले संयुक्त अरब अमीरात जाएंगे जहां वह देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘आर्डर ऑफ जायद’ भी प्राप्त करेंगे। गत अप्रैल में यूएई ने द्विपक्षीय रणनीतिक संबंधों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए मोदी को यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान करने की घोषणा की थी। पुरस्कार यूएई के संस्थापक शेख जायद बिन सुल्तान अल नाहयान के नाम पर है। यह पुरस्कार विशेष महत्व रखता है क्योंकि यह पुरस्कार मोदी को खाड़ी देश के नेता की जन्मशती के वर्ष में प्रदान किया जा रहा है। अबुधाबी के क्राउन प्रिंस शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने कहा था, कि मोदी ने सम्रग रणनीतिक संबंधों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा था, ‘हमारे प्रिय मित्र भारत के प्रधानमंत्री को जायद मेडल देते हुए, हम यूएई और भारत के बीच सहयोग के आधार को बढ़ाने और दोस्ताना संबंधों को विकसित करने में उनकी भूमिका और प्रयासों की सराहना करते है।’

विदेश मंत्रालय द्वारा बताया गया कि यूएई से मोदी 24 अगस्त को बहरीन की दो दिवसीय यात्रा पर रवाना होंगे जो कि इस खाड़ी देश की भारत के किसी प्रधानमंत्री की पहली यात्रा होगी। विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘प्रधानमंत्री अपनी यात्रा के दौरान अबु धाबी के युवराज शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात करेंगे जिस दौरान वह द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और परस्पर हित के अंतरराष्ट्रीय मामलों पर चर्चा करेंगे।’ विदेश मंत्रालय ने साथ ही यह भी कहा कि बहरीन में मोदी अपने समकक्ष राजकुमार शेख खलीफा बिन सलमान अल खलीफा के साथ द्विपक्षीय संबंधों के पूरे आयामों के साथ ही क्षेत्रीय और परस्पर हित के अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे। यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मनामा में श्रीनाथजी मंदिर के पुनरुद्धार की शुरूआत भी करेंगे।
मौजूदा कूटनीतिक परिदृश्य में उनकी इस यात्रा को काफी अहम माना जा रहा है। अहम इसलिए क्‍योंकि ये दोनों देश आर्गेनाइजेशन ऑफ इस्‍लामिक कॉर्पोरेशन के सदस्‍य है। पाकिस्‍तान इस संगठन को लेकर काफी इतराता भी है। गौरतलब है कि यूएई ने अनुच्छेद 370 हटाने को भारत का अंदरूनी मामला मानते हुए इसका स्वागत किया था। यूएई की बात करें तो वह भारत का टॉप एक्‍सपोर्ट और इंपोर्ट डेस्टिनेशन भी है। इतना ही नहीं बीते कुछ दशकों में दोनों देशों के बीच व्‍यापारिक संबंध बेहद मजबूत हुए हैं। इसके अलावा करीब 30 लाख भारतीय इस देश में रहते हैं, जो यहां के विकास में योगदान दे रहे हैं। मार्च 2018 में यूएई के पीएम की अपील पर भारतीय तट रक्षक बल ने एक नौका को इंटरसेप्‍ट कर उन्‍हें इसकी जानकारी दी थी। इसके अलावा पिछले वर्ष अगस्‍त 2018 में केरल में आई बाढ़ में यूएई ने वित्‍तीय मदद कर राज्‍य को बिगड़े हालात से उबारने में मदद की थी। पीएम मोदी 2015 में भी यूएई जा चुके हैं।हाल के दिनों में यूएई और भारत के बीच व्यापारिक रिश्ते काफी मजबूत हुए है। व्यापार के क्षेत्र में यूएई भारत का तीसरा सबसे बड़ा साझेदार देश बन गया है। दोनों देशों के बीच करीब 60 अरब डालर का वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार हुआ है। ऐसे में पीएम मोदी का वहां जाना और दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूती प्रदान करने में मददगार साबित होगा। इस यात्रा से भारत और बहरीन के बीच संबंधों में पिछले कुछ वर्षों में एक नया जोश देखने को मिलेगा।

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