[gtranslate]
world

कश्मीर मामले में भारतीय अमेरिकी सांसद ने अमेरिकी संसद में पेश किया प्रस्ताव

भारतीय मूल की अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल द्वारा अमेरिकी संसद में जम्मू-कश्मीर पर एक प्रस्ताव पेश किया गया है। इसमें भारत द्वारा वहां लगाए गए संचार माध्यमों पर प्रतिबंधों को शीघ्र अति शीघ्र हटाने और सभी निवासियों की धार्मिक स्वतंत्रता संरक्षित रखने की अपील की गई  है।
प्रस्ताव में भारत से पूरे जम्मू-कश्मीर में संचार सेवाओं पर लगे प्रतिबंधों को हटाने ,इंटरनेट सेवाओं को बहाल करने और हिरासत में लिए लोगो को भी रिहा करने की अपील की गई है। भारत सरकार द्वारा पांच अगस्त को जम्मू -कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने और उसे केंद्र शासित प्रदेश घोषित करने के बाद से ही वहां कई प्रतिबंध लगे हुए हैं।
इस प्रस्ताव को पेश करने से पूर्व भी अमेरिका भर से भारतीय मूल के लोगो ने विभिन्न मंचों से इसका विरोध किया था। माना जाता है कि जयपाल के कार्यालय को इस प्रस्ताव को पेश नहीं करने के लिए भारतीय अमेरिकियों के 25 हज़ार से अधिक ईमेल प्राप्त हुए थे। भारतीय अमेरिकियों ने इस कदम के खिलाफ उनके कार्यालय के बाहर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन भी किया था।
भारत बार -बार यह स्पष्ट कर चुका है कि कश्मीर उसका आंतरिक मामला है और इसमें किसी तीसरे पक्ष का हस्तक्षेप वह बर्दाशत नहीं करेगा। अमेरिका में भारत के राजदूत हर्ष वर्धन श्रृंगला और अन्य अधिकारियों ने भी सांसद जयपाल से मिलकर कश्मीर के हालात और भारत के पक्ष को समझाया था ,लेकिन उन पर कोई असर नहीं पड़ा। भारत का कहना है कि जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्ज़ा वापस लेने का निर्णय संप्रभु है और वह इस मामले में किसी का हस्तक्षेप बर्दाशत नहीं करेगा।
  कांग्रेस नेता शशि थरूर ने प्रमिला जयपाल के कदम की सराहना की है। थरूर ने ट्वीट कर कहा कि कश्मीर पर अमेरिकी संसद में प्रस्ताव पेश कर अमेरिकी सांसद ने सराहनीय काम किया है। लेकिन हम अपने यहां पूरे शीतकालीन सत्र में कश्मीर पर चर्चा कराने में भी सफल नहीं हो पाए। हमें शर्म आनी चाहिए।
भारत विरोधी प्रस्ताव की सराहना करने पर भाजपा ने थरूर की जमकर आलोचना की। खासकर थरूर द्वारा भारतीय मूल की अमेरिकी सांसद के कदम को सराहनीय बताने पर भाजपा सांसद शोभा करंदलाजे और तेजस्वी सूर्या ने कड़ी आपत्ति जताई है और इसे शर्मनाक बताया है।

चेन्नई में पैदा हुई प्रमिला जयपाल पिछले कई सप्ताह से संसद में यह प्रस्ताव पेश करने के प्रयास में थीं, लेकिन उन्हें कोई सहयोगी प्रस्तावक नहीं मिल रहा था। बड़ी मुश्किल से वह रिपब्लिकन पार्टी के स्टीव वाटकिंस का समर्थन पाने में सफल रहीं। यह एक सामान्य प्रस्ताव है, जिस पर संसद के उच्च सदन सीनेट में वोट नहीं किया जा सकता है और यह कानून नहीं बनेगा।

You may also like

MERA DDDD DDD DD