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भारत को अमेरिका के साथ मजबूत संबंध बनाने के लिए बदलनी होंगी अपनी नीतियां

भारत दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्थाओं वाला देश बन रहा है। विदेशी निवेश भी भारत में जमकर हो रहा है। दुनियाभर के लोगों को भारत से अब उम्मीद होने लगी है। व्यापार के मामले में भारत चीन को कड़ी टक्कर दे रहा है। इसलिए चीन की सीमा पर हर गतिविधि पर अमेरिका मुखर होकर भारत का साथ देता है। भारत और अमेरिका के संबंध पहले भी अच्छे थे, और अब अमेरिका के नए राष्ट्रपति जो बाइडन के कार्यकाल के दौरान भी प्रगाढ़ रहने की संभावना है। लेकिन अभी भी कुछ ऐसे संवेदनशील मुद्दे है जिन पर दोनों देशों के बीच के संबंधों की मज़बूती को अभी परीक्षा से गुजरना है।

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के दौरान भारत-अमेरिका के संबंध प्रगाढ़ करने की दिशा में लगातार काम कर रहे थे। पाकिस्तान और चीन के साथ भारत के संबंध काफी तल्ख है। हालांकि अमेरिका चीन और पाकिस्तान के संदर्भ में भारत का साथ देता रहा है। दोनों देशों के तल्ख रिश्तों के कारण अमेरिका भारत के पक्ष में है लेकिन वहीं दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत में धार्मिक आजादी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर अमेरिका का रूख भारत के पक्ष में बदल सकता है। राजनितिक विश्लेषकों का मानना है कि व्यापार के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच मतभेद होने की आशंका है।

अमेरिका भारत को चीन के काउंटर के रूप में देखता है। अमेरिका और चीन के रिश्ते काफी ज्यादा तल्ख है पहले डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में भी चीन और अमेरिका के संबंध काफी ज्यादा खराब रहे। कोरोना वायरस को लेकर भी ट्रंप ने चीन को चेताया था। अब वाइडन भी चीन पर सख्त कार्रवाई करने को तैयार है। बाइडन लोकतंत्र समर्थक और मानवाधिकार प्रेमी है। माना जा रहा है कि बाइडन भारत पर लोकतंत्र के प्रति प्रतिबद्ध होने को लेकर संभवत ज़ोर देंगे।

बाइडन की विदेश नीति का मुख्य उदेश्य है कि दुनियाभर में लोकतंत्र को मजबूत करना और सुरक्षा सुनिश्चित करवाना है। बाइडन अपने कार्यकाल के पहले साल ही वैश्विक शिखर सम्मेलन करने की योजना बना रहे है। जो एक उदार दुनिया की भावना को बढ़ावा देने के मकसद से आयोजित करवाया जाएगा। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश होने के नाते इस सम्मेलन का हिस्सा होगा। लेकिन कुछ आलोचक मानते है कि भारत में हिंदु बहुसंख्यकवाद के एजेंडे को लेकर देश की लोकतांत्रिक परंपराओं में गिरावट देखते है और इसे लेकर काफी ज्यादा चिंतित है।

मोदी के कुछ आलोचक मानते हैं कि उनकी सरकार देश के लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष नींव को लगातार ध्वस्त करने में लगी हुई है। मीडिया और न्यायिक व्यवस्था में मौजूद अपने सहयोगियों की बदौलत वो ऐसा कर रहे हैं। ताजा मामला कृषि कानूनों को लेकर बना हुआ है। क्योंकि इन कानूनों के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन कर रहे किसानों को कुछ बीजेपी नेता खालिस्तानी और आंतकवादी जैसे नामों से संबोधन कर रहे है, जिसका देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर काफी खराब असर पड़ रहा है। हालांकि विरोध-प्रदर्शन एक अच्छे लोकतंत्र का उदाहरण माने जाते है। माना जाता है कि एक अच्छे लोकतंत्र के लिए सरकार की आलोचना जरूरी है। तभी आप देश में एक अच्छा लोकतंत्र स्थापित कर सकते है जब आप विरोधों को भी मुखर होकर सुनेंगे।

भारत में मौजूद अमेरिकी दूतावास ने चार फरवरी के एक बयान में कहा है कि “हम मानते हैं कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन किसी भी लोकतंत्र की पहचान है। हम विभिन्न पार्टियों के बीच किसी भी तरह के मतभेद को बातचीत के ज़रिए सुलझाने को प्रोत्साहित करते हैं।” दूसरा बड़ा उदाहरण कश्मीर को लेकर है, कश्मीर में जब धारा 370 को हटाया गया था, तब वहां काफी महीनों तक इंटरनेट को बैन किया गया था। भारत के इस रवैये को लेकर डेमोक्रेटस के कई नेताओं ने अपनी चिंता व्यक्त की थी। पंरतु भारत ने उसे हल्के में टाल दिया था।

कश्मीर को लेकर अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल की आपत्तियों के बाद विदेश मंत्री सुब्रमण्यम जयशंकर ने दिसंबर 2019 में अमेरिकी सांसदों के साथ होने वाली एक बैठक को रद्द कर दिया था। अब वहीं प्रमिला जयपाल बाइडन प्रशासन में अहम पद पर तैनात है। वो कॉन्ग्रेसनल प्रोग्रेसिव कॉकस की अध्यक्ष भी है। इसमें वैसे डेमोक्रेट्स नेता बड़ी संख्या में हैं जो मानवाधिकार हनन के मसले पर मुखर आलोचक हैं।

व्यापार के क्षेत्र में भी भारत और अमेरिका के बीच मतभेद सामने आ सकते हैं। पिछले कुछ दशकों से इन दोनों ही देशों के बीच में लगातार व्यापार बढ़ा है लेकिन इसके बावजूद ज़्यादा ट्रैफिक, बौद्धिक संपदा का अधिकार और काम के वीज़ा जैसे कुछ अनसुलझे मसले बने हुए हैं। भारत अगर अमेरिका के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करना चाहता है तो भारत को अपनी कुछ नीतियों औऱ लोकतंत्र को और मजबूत करना होगा। इसके साथ ही धार्मिक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी जैसे संवेदशील मुद्दों को लेकर प्रखर होना पड़ेगा।

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