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भारत सहारे रुसी हीरों का व्यापार

रूस में स्थित अलरोसा दुनिया की सबसे बड़ी हीरा खनन कंपनी है। अलरोसा वैश्विक स्तर पर लगभग 30 प्रतिशत कच्चे हीरे की आपूर्ति करती है और यह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत है। भारत में 30-40 फीसदी कच्चे हीरे रूस से आते हैं। देश में आने वाले रफ डायमंड्स को कट व पॉलिश कर निर्यात किया जाता है।

भारत का हीरा उद्योग महामारी के झटके से उबरकर रिकवरी मोड में है। लेकिन लगता है कि यह रिकवरी अभी पूरी तरह नहीं हो पाएगी। इसकी वजह है रूस-यूक्रेन युद्ध। यूक्रेन पर हमले के चलते अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूस पर कई प्रतिबंध लगाए हैं। इन प्रतिबंधों के चलते पहले ही भारतीय हीरा उद्योग पर सीधा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही थी। अब हीरा उद्योग के समक्ष एक नया संकट खड़ा हो सकता है। दरअसल अमेरिकी सांसदों के एक समूह ने रूसी मूल के हीरों की बिक्री और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रतिबंधित करने में अमेरिकी प्रशासन की मदद मांगी है। अगर ऐसा हुआ तो इससे भारत का हीरा उद्योग काफी हद तक प्रभावित होगा क्योंकि अमेरिका को यहां से हीरों का निर्यात रुक जाएगा।

रूसी मूल  के हीरों पर प्रतिबंध को लेकर अमेरिकी सांसदों ने अमेरिकी विदेश मंत्री टोनी ब्लिंकन और ट्रेजरी सचिव जेनेट येलेन को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने चिंता जताई है कि रूस के हीरा उद्योग को टार्गेट करने के लिए ट्रेजरी विभाग द्वारा जारी प्रतिबंधों का रूस की सबसे बड़ी खनन कंपनी अलरोसा और इसके सीईओ सर्गेई इवानोव की विश्व स्तर पर स्वतंत्र रूप से काम करने की क्षमता पर बेहद मामूली प्रभाव पड़ेगा।

दुनिया की भी सबसे बड़ी हीरा कंपनी है अलरोसा

रूस में स्थित अलरोसा दुनिया की सबसे बड़ी हीरा खनन कंपनी है। अलरोसा वैश्विक स्तर पर लगभग 30 प्रतिशत कच्चे हीरे की आपूर्ति करती है और यह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत है। भारत में 30-40 फीसदी कच्चे हीरे रूस से आते हैं। देश में आने वाले रफ डायमंड्स को कट व पॉलिश कर निर्यात किया जाता है। रूस की हीरा खनन क्षमता में अलरोसा का योगदान 90 फीसदी है, वहीं वैश्विक स्तर पर यह योगदान 28 फीसदी है। कंपनी ने पिछले साल 4.2 अरब डॉलर की बिक्री दर्ज की थी।

अलरोसा और रूसी सरकार का रिश्ता

यहां यह जानना भी दिलचस्प है कि अलरोसा में एक तिहाई हिस्सेदारी रूसी सरकार की है। कंपनी के सीईओ सर्गेई इवानोव, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन  के सबसे करीबी सहयोगियों में से एक सर्गेई बोरिसोविच इवानोव के बेटे हैं। सर्गेई बोरिसोविच इवानोव, राष्ट्रपति के कार्यकारी कार्यालय के चीफ ऑफ स्टाफ, रूस के उप प्रधानमंत्री और रूस के रक्षा मंत्री रह चुके हैं। इसके अलावा वह रशियन फेडरेशन की सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य हैं।

पश्चिमी देशों की ओर से रूस पर 24 फरवरी को लगाए गए प्रतिबंधों ने अलरोसा के मामले में केवल ऋण और इक्विटी लेनदेन को अवरुद्ध किया है। इससे ग्लोबल डायमंड ट्रेड में रूस की बड़ी हिस्सेदारी को बेहद मामूली झटका लगा है। प्रतिबंध अभी तक अलरोसा के ट्रेड और राजस्व को बाधित नहीं कर पाए हैं, जो अंततः क्रेमलिन तक पहुंचते हैं। इसलिए अब अमेरिकी सांसद चाहते हैं कि रूसी मूल के हीरों की बिक्री और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रतिबंधित किया जाए, जिससे क्रेमलिन को बड़ा झटका लगे।

इससे पहले अमेरिकी प्रशासन ने 11 मार्च को आयात प्रतिबंध की भी घोषणा की थी, जो नॉन इंडस्ट्रियल हीरे सहित रशियन फेडरेशन मूल के उत्पादों को संयुक्त राज्य में प्रवेश करने से प्रतिबंधित करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि रूसी हीरों के मामले में लगाए गए प्रतिबंधों के तहत एक बड़ी खामी है। वह है कि भारत या अन्य जगहों पर कट व पॉलिश हुए रूसी हीरों के अमेरिका में आयात की अनुमति अभी भी है। इसकी वजह है कि ‘रूसी फेडरेशन’ टर्म में थर्ड कंट्री में काफी हद तक ट्रान्सफॉर्म्ड माल शामिल नहीं है।

 

अभी कैसे होता है अमेरिका को निर्यात

अभी जो व्यवस्था है, उसमें रूसी मूल के हीरे को अलरोसा की सहायक कंपनी द्वारा भारत या किसी अन्य देश में कट या पॉलिश किया जा सकता है और बिना किसी प्रतिबंध के अमेरिका को बेचा जा सकता है। अमेरिकी सांसदों का कहना है कि यह रूसी सरकार को लाभ पहुंचा रहा है। अमेरिकी सांसदों ने कहा है कि ट्रेजरी विभाग हीरों के मूल यानी ओरिजिन की व्याख्या पर पुनर्विचार करे क्योंकि यह व्याख्या अलरोसा के हीरे को कट या पॉलिश करने वाले देशों से हीरे के अमेरिका में आयात की अनुमति देती है। सांसदों का कहना है कि राज्य और ट्रेजरी विभागों को सीमा शुल्क व सीमा सुरक्षा (सीबीपी) और होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (डीएचएस) को गाइड करना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे संयुक्त राज्य में रूसी हीरे के आयात को प्रतिबंधित करें।

भारत में कितना बड़ा है हीरों की कटिंग-पॉलिशिंग का कारोबार

एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के लगभग 95 प्रतिशत हीरे भारत में कट और पॉलिश होते हैं। भारत में गुजरात के सूरत को रफ डायमंड की कटिंग व पॉलिशिंग का हब माना जाता है। पिछले वित्तीय वर्ष में भारत से कट और पॉलिश्ड किए गए हीरों का कुल सकल निर्यात 25.47 अरब अमेरिकी डॉलर रहा था। फरवरी 2021 तक भारत के गोल्ड व डायमंड ट्रेड की देश की जीडीपी में हिस्सेदारी 7.5 फीसदी थी। वहीं कुल निर्यात में गोल्ड व डायमंड ट्रेड की हिस्सेदारी 14 फीसदी है।

भारतीय हीरा उद्योग वित्त वर्ष 2021-22 में 24 अरब डॉलर की आय का लक्ष्य कर रहा है। अगर यह लक्ष्य प्राप्त हो गया तो यह महामारी-पूर्व के स्तर पर वापस आ जाएगा। लेकिन अगर रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से लगाए गए प्रतिबंधों के चलते भारत का हीरा उद्योग बड़े पैमाने पर प्रभावित हुआ तो रिकवरी प्रभावित हो सकती है। प्रतिबंधों ने रूस के केंद्रीय बैंक और दो प्रमुख बैंकों को स्विफ्ट प्रणाली से अलग कर दिया है। इससे भारत में जेम्स एंड ज्वैलरी इंडस्ट्री के लिए बैंकों के साथ फंड ट्रान्सफर को लेकर पहले से समस्याएं हैं। अब अगर रूसी मूल के भारत में कट व पॉलिश्ड हीरों के निर्यात पर अमेरिकी प्रशासन ने प्रतिबंध लगाए तो इससे भारतीय हीरा उद्योग के लिए एक नया संकट खड़ा हो जाएगा।

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