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इमरान की बढ़ी साख

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने हाल में जो अमेरिका यात्रा की उससे उनकी अपने देश में साख बढ़ी है। हालांकि पाकिस्तान की विपक्षी पार्टियां दावा कर रही हैं कि इमरान की इस यात्रा से देश को कुछ भी हासिल नहीं हुआ, लेकिन कुछ मायनों में इमरान की यह यात्रा उनके लिए सफल साबित हुई। यही वजह है कि स्वदेश लौटने पर उनका जोरदार स्वागत हुआ।

पाकिस्तान में इमरान की यात्रा को लेकर सकरात्मक माहौल दिख रहा है। दरअसल, इमरान की यात्रा एक ऐसे समय में हुई जब पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था बहुत ही बुरे दौर से गुजर रही है। पिछले साल अमेरिका ने 1 ़3 अरब डॉलर की मदद इसलिए रोक दी थी कि पाकिस्तान से उसे धोखे के अलावा और कुछ नहीं मिला। लिहाजा इस बार अमेरिका यात्रा से पूर्व इमरान सरकार ने आतंकी संगठनों के खिलाफ सक्रियता दिखाई और संदेश दिया कि देश में जो आतंकवादी संगठन चल रहे हैं, वे पुरानी सरकारों की देन हैं। इमरान सरकार इन पर प्रतिबंध लगाने को प्रतिबद्ध है। इमरान सरकार की इस कोशिश को अब अमेरिका द्वारा बहाल की गई सैन्य राशि के तौर पर देखा जा रहा है। यह सरकार की सफलता है। इमरान के अमेरिका दौरे के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड टं्रप ने कश्मीर मामले में मध्यस्थता करने का जो बयान दिया उसे इमरान की कूटनीतिक उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है। पाकिस्तानी मीडिया ने इसे इमरान की जीत कहा है। कूटनीतिक उपलब्धि भी ऐसी कि इससे भारत की सियासत गरमा गई। विपक्ष ने सदन में जोरदार हंगामा किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सदन में आकर बयान देने की मांग की।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने ट्विट करके इसका तुरंत खण्डन भी किया। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने अपनी आवाम को यह संदेश देने में कामयाब रहे हैं कि हम कश्मीर को लेकर संजिदा हैं। पाकिस्तान इस तरह के बयान का कोई वर्षों से इंतजार कर रहा था।

एक बात यह कि बुनियादी रूप से और रणनीति के मामले में दोनों देशों ने कुछ कहने से गुरेज किया। पाकिस्तान ने परमाणु समूह में शामिल होने के बारे में कोई बात नहीं की और न ही अमेरिका ने कोई इशारा किया है। इसके अलावा पाकिस्तान में चीन के बढ़ते व्यापार और सामरिक हितों के बारे में अमेरिका और पाकिस्तान के बीच कोई खुलकर बात नहीं हुई है। यदि होती भी तो क्या नतीजा निकल सकता था, इस बारे में कुछ भी नहीं कहा जा सकता है। ज्यादातर बंदरगाह पर चीन के असर को क्या अमेरिका स्वीकार कर पाएगा। दअरसल, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की असल चुनौती चीन से साथ अच्छे रिश्तों को लेकर है। कहीं अमेरिका इसकी राह में रुकावट न बन जाए। अमेरिका नहीं चाहेगा कि पाकिस्तान का झुकाव चीन की तरफ रहे। ऐसे में पाक कैसे दोनों देशों के बीच तालमेल रख सकेगा, यह बेहद चुनौतीपूर्ण है।

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