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चौतरफा दबाव में इमरान

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की मुश्किलें कम होने के बजाए बढ़ती ही जा रही हैं। भारत द्वारा जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद बौखलाए पाकिस्तान को कूटनीतिक मोर्चे पर हार का मुंह देखना पड़ा। इस मसले पर पाक के परंपरागत दोस्तों तक ने उसका साथ नहीं दिया। आर्थिक मोर्चे पर भी इमरान सरकार असफल साबित हो रही है। सेना का दबाव सरकार पर अलग से है। ऐसे में अब विपक्षी दल भी निरंतर धरना-प्रदर्शन कर सरकार की मुश्किलें बढ़ाने लगे हैं।

सरकार के खिलाफ विपक्षी दलों द्वारा निरंतर प्रदर्शन किए जा रहे हैं। विपक्षी नेताओं के उग्र तेवर बता रहे हैं कि वे अब आर-पार के मूड में हैं। उनके तेवरों से ऐसा लगता है कि इस समय पाकिस्तान का माहौल अपने इतिहास को दोहराने की दिशा में बढ़ रहा है। पाकिस्तान का रिकॉर्ड है कि आजादी के बाद से आज तक इस मुल्क का कोई भी प्रधानमंत्री अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाया है। मौजूदा प्रधानमंत्री इमरान खान के लिए भी हालात कुछ इस तरह के बन रहे हैं। जिनमें कि उनका काम करना काफी चुनौतीपूर्ण है। आए दिन विपक्षी इमरान खान पर निशाना साधते रहते हैं। उनकी सत्ता से बेदखली के लिए विपक्षी दलों की ओर से आजादी मार्च निकाले जा रहे हैं। इससे निपटने के लिए सरकार इस्लामाबाद में सेना को बुला सकती है। इस बीच मौलाना फजलुर रहमान का आजादी मार्च इस्लामाबाद पहुंच गया। मौलाना ने करीब दो लाख प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए सरकार को अल्टीमेटम दे दिया। उन्होंने कहा, ‘‘हम इमरान खान को दो दिन यानी 48 घंटे का वक्त देते हैं। वे इस्तीफा दें और घर जाएं। पाकिस्तान ने इमरान से ज्यादा बेगैरत प्रधानमंत्री नहीं देखा। उन्होंने मुल्क को बेच दिया है।’’ इस्लामाबाद पहुंचे इस आजादी मार्च में नवाज शरीफ के भाई शहबाज और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो भी शामिल हुए।

मौलाना से पहले बिलावल भुट्टो ने भाषण दिया। उन्होंने कहा, ‘‘हम ऐसे प्रधानमंत्री को इज्जत नहीं दे सकते जो इलेक्टेड नहीं, सिलेक्टेड है। विपक्षी नेताओं को जेल भेजकर वे डेमोक्रेसी के नाम पर तानाशाही चला रहे हैं। अवाम भुखमरी की कगार पर है।’’ मौलाना रहमान ने भी भुट्टो की बात का समर्थन किया। कहा, ‘‘इमरान ने हर मुद्दे पर लोगों को धोखा दिया। वे कश्मीर का राग अलापते हैं। भारत ने कश्मीर में जो कुछ किया। उसको रोक भी नहीं पाए। मुस्लिम वर्ल्ड की बात करते हैं, लेकिन यूएन में 5 मुल्कों का समर्थन हासिल नहीं कर सके। वे कुर्सी छोड़ें। अगर ऐसा नहीं हुआ तो हम आगे की रणनीति बनाकर आए हैं। खाली हाथ लौटकर जाने का इरादा नहीं है।’’ तेजगाम एक्सप्रेस रेल हादसे में 75 लोगों की मौत के बाद इमरान सरकार और दबाव में आ गई। रेल मंत्री शेख रशीद ने इस्तीफा देना तो दूर हादसे को हंसी में टाल दिया। उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

इमरान सरकार को लगता था कि आजादी मार्च में ज्यादा से ज्यादा 20 हजार लोग शामिल होंगे। लेकिन, इनकी तादाद करीब 2 लाख है। इस्लामाबाद की कानून व्यवस्था खतरे में पड़ गई है। इमरान ने इस्तीफा देने से इनकार करते हुए मौलाना को एक तरह से भारत का एजेंट बता दिया। लेकिन, वो खुद भारी दबाव में हैं। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने तीन बार अपने मंत्रियों के साथ बैठक की। सेना ने अब तक चुप्पी साध रखी है। आजादी मार्च से डरी पाकिस्तान की इमरान खान सरकार उलमा-ए-इस्लाम संगठन के प्रमुख फजलुर रहमान से सीधे दो-दो हाथ करने के बजाए बातचीत के जरिए प्रदर्शन को खत्म करने की कोशिशों में जुट गई है। इमरान सरकार ने फजलुर रहमान से संपर्क साधा है। वहीं 66 वर्षीय कट्टरपंथी मौलाना फजलुर ने कहा है कि प्रधानमंत्री इमरान के इस्तीफे तक उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। प्रदर्शनकारी अभी भी मौलाना की ओर से रखी गई मांगों पर अड़े हुए हैं और उनका धरना-प्रदर्शन जारी है। पाकिस्तानी अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक इमरान खान सरकार की ओर से वार्ताकारों की दो टीमों ने इस बीच जेयूआई- एफ से संपर्क किया। पूर्व प्रधानमंत्री सुजात हुसैन की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल ने मौलाना से मुलाकात की। इससे पहले रक्षा मंत्री परवेज खट्टक की अगुवाई में वार्ताकारों की एक टीम ने भी रहबर कमेटी के साथ बातचीत की। इस बातचीत में रहबर कमेटी की मांगों पर चर्चा हुई। रहबर कमेटी में विपक्षी दलों के प्रतिनिधि शामिल हैं। विपक्षी दलों पीएमएल-एन और पीपीपी ने भी सरकार विरोधी इस रैली को समर्थन दिया है।

हालांकि, यह बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है। इमरान खान की सरकार किसी भी कीमत पर इस विरोध-प्रदर्शन को खत्म कराना चाहती है। इसके लिए वह आड़े हाथ सख्त रवैया भी अख्तियार कर रही है। इस बीच मौलाना फजलुर के खिलाफ कार्रवाई की मांग के साथ लाहौर हाईकोर्ट में एक अर्जी दाखिल की गई। इसमें सरकार के खिलाफ भड़काऊ और नफरत फैलाने वाला भाषण देने की शिकायत की गई है। उधर, 66 वर्षीय मौलाना झुकने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा है कि प्रधानमंत्री इमरान के इस्तीफे तक विरोध-प्रदर्शन जारी रहेगा। हम आगे बढ़ते रहेंगे और कभी पीछे नहीं हटेंगे।

पाकिस्तानी के प्रमुख विपक्षी दल पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी ने कहा है कि इमरान सरकार की नीतियों के कारण पाकिस्तान आज दुनिया में अलग-थलग पड़ गया है। पाकिस्तानी मीडिया में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, पीपीपी ने इमरान सरकार के नेतृत्व वाली पाकिस्तान तहरीके इंसाफ पार्टी की सरकार के एक साल पूरे होने पर श्वेत पत्र जारी किया।

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