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इमरान खान के इस्तीफे की समयसीमा खत्म…

इस समय पाकिस्तान का माहौल अपने इतिहास को दोहराता हुआ नज़र आ रहा है। पाकिस्तान में रिकॉर्ड है कि उसकी आजादी के बाद से आज तक वहां पर कोई भी प्रधानमंत्री अपना शासनकाल को पूरा नहीं कर पाया है। पाकिस्तान के इमरान खान भी कुछ इसी तरह के दौर से गुजर रहे हैं। जिन पर पाकिस्तान के गुरु एवं नेता मौलाना फजलुर रहमान भरपूर दबाव बनाते हुए दिख रहे हैं। पाकिस्तान के धर्म गुरु एवं नेता मौलाना फजलुर रहमान ने प्रधानमंत्री इमरान खान के इस्तीफे के लिए अपने द्वारा तय की गई समयसीमा खत्म होने के बाद भविष्य की कार्रवाई पर चर्चा करने के लिए सोमवार को एक सर्वदलीय बैठक आहूत की है।
देश की राजधानी में हजारों समर्थकों की मौजूदगी वाले ‘आजादी मार्च’ का नेतृत्व कर रहे जमीयत उलेमा ए इस्लाम फ़ज्ल (जेयूआई-एफ) के नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री को अपदस्थ करने का आंदोलन ‘‘आगे बढ़ता रहेगा, इसे वापस नहीं लिया जाएगा।’’रहमान ने कहा कि जब तक खान इस्तीफा नहीं देते, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा। एक पाकिस्तानी न्यूज़ चैनल के अनुसार, जेयूआई-एफ ने भविष्य की कार्रवाई को लेकर विपक्षी दलों के नेताओं के साथ चर्चा करने के लिए एक सर्वदलीय बैठक बुलाई है।
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रहमान के इस व्यापक विरोध प्रदर्शन को पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज (पीएमएल-एन), पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी), पख्तूनख्वा मिल्ली आवामी पार्टी, कौमी वतन पार्टी, नेशनल पार्टी और आवामी नेशनल पार्टी का समर्थन प्राप्त है। हालांकि डॉन अखबार ने खबर दी कि पीपीपी प्रमुख बिलावल भुट्टो जरदारी और पीएमएल-एन प्रमुख शहबाज शरीफ के सर्वदलीय बैठक में शामिल होने की संभावना नहीं है।
खबर में संबंधित पार्टी नेताओें के हवाले से कहा गया, ‘‘ज्यादा संभावना है कि पार्टियों के प्रमुख बिलावल भुट्टो जरदारी और शहबाज इतने कम समय के नोटिस पर इस्लामाबाद में बैठक में शामिल न हो पाएं।’’ प्रधानमंत्री इमरान खान ने प्रदर्शनकारियों की इस्तीफे की मांग को खारिज कर दिया और कहा कि प्रदर्शन भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल में बंद पीएमएल-एन और पीपीपी के नेताओं को रिहा कराने के लिए समझौते का प्रयास है।

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