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इमरान खान की कुर्सी खतरे में, सड़कों पर उमड़ा जनाक्रोश

पाकिस्तान की इमरान सरकार अब बर्बादी के दलदल में गले तक धंसती नजर आ रही है । प्रधानमंत्री इमरान खान से उनके देश की जनता नाराज हैं और अपना गुस्सा जाहिर करने के लिए अब सड़को पर उतर चुकी हैं। पाकिस्तान की जनता ठान चुकी हैं कि या तो पाकिस्तान में सुधार हो या पीएम इस्तीफा दे दें। जनता के इसी गुस्से का नेतृत्व अब पाकिस्तान की 11 पार्टियां एक मंच पर आकर कर रही हैं। पाकिस्तान की 11 पार्टियों ने एक मंच पर आकर इमरान खान के विरोध में एक बड़ा आंदोलन छेड़ दिया है।

जिसके बाद अब इमरान खान की कुर्सी खतरे में आ गई है। बीते दो दिनों में गुजरांवाला और कराची में बड़ी रैलियां आयोजित की गई और इन रैलियों में भारी संख्या में लोगों ने भाग लिया। हजारों की संख्या में भीड़ एकत्रित हुई। देश में इमरान को कोई नालायक वजीरे आलम की उपाधि दे रहा है तो कोई उन्हें सेना के पीछे छिप जाने वाला डरपोक इंसान बता रहा है।

दरअसल हुआ यह की नवाज शरीफ इस वक्त लंदन में हैं लेकिन उन्होंने इस रैली में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़कर पाकिस्तानी के आर्मी चीफ जनरल बाजवा पर बड़ा हमला कर दिया था। जिसके बाद पाकिस्तानी सेना की कठपुतली कहे जाने वाले इमरान खान बौखला गए और उनपर भारत के पीएम मोदी की भाषा बोलने का आरोप मढ दिया। इमरान खान का कहना यह था कि जिस ढंग से नवाज शरीफ ने आर्मी चीफ की आलोचना की वो बिलकुल मोदी की तरह थी।

मरियम नवाज ने इमरान खान की आलोचना की

इस वक्त पाकिस्तान का मौसम एकदम सियासी और तूफानी हैं। सड़कों पर जनसैलाब और लोगों की बेहताशा भीड़ की तस्वीरें देखकर यकीनन इमरान खान की रातों की नींद गायब हो गई होगी। पाकिस्तान में मंजर कुछ ऐसा है कि कोई इमरान खान को कभी आटा चोर कह देता है तो कोई कभी चीनी चोर। इमरान खान को बेरोजगार भी जी भर के कोस रहे हैं और पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली तो किसी से छिपी ही नहीं हैं। विपक्ष इस वक्त इमरान खान पर भारी पड़ता नजर आ रहा है। विपक्ष की रैली का मुख्य आकर्षण थीं पूर्व पीएम नवाज शरीफ की बेटी मरियम नवाज।

इस रैली में मरियम नवाज ने इमरान खान पर एक के बाद एक वार किए। कराची में रैली की गई और कश्मीर का जिक्र भी इस रैली में हुआ। मरियम नवाज़ ने कश्मीर को लेकर पाकिस्तान की इंटरनेशनल बेइज्ज़ती को इमरान खान का कारनामा बताते हुए सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि सेना हो, विपक्ष हो या सरकार, पाकिस्तान में कश्मीर के फ्यूल से ही सियासत की गाड़ी आगे बढ़ती है। अबतक घरेलू परेशानी से बचने के लिए पाकिस्तान की सरकारें कश्मीर को बड़े मुद्दे की तरह पेश करती थीं…लेकिन अब उनकी कश्मीर पर दहशत फैलाकर समर्थन हासिल करने की रणनीति पर बड़ा झटका लगा है- अनुच्छेद 370 के खात्मे के बाद कश्मीर में पाकिस्तान की साजिश नाकाम हो रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मित्र कौन हैं?

इस बीच भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अचानक पाकिस्तान में चल रहे इस राजनीतिक विकास के मामले में सबसे आगे आ गए हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ 11 प्रमुख राजनीतिक दलों द्वारा रैली  की जा रही हैं और सत्तारूढ़ और विपक्षी दोनों समूह एक-दूसरे पर भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दोस्त होने का आरोप लगा रहे हैं।

पाकिस्तान के पीएम इमरान खान और पाकिस्तान के पूर्व पीएम नवाज़ शरीफ की बेटी मरियम नवाज़, एक दूसरे पर पीएम मोदी का करीबी होने का आरोप लगा रहे हैं और इस बहाने खुद को पाकिस्तान का सबसे बड़ा देशभक्त साबित करने पर तुले हैं।  नवाज शरीफ ने इमरान खान पर सेना की कठपुतली होने का आरोप लगाया था। अब इमरान खान उन्हें आईना दिखा रहे हैं। दिलचस्प तो ये है कि दोनों सब छोड़ ये साबित करने में लगे हुए हैं कि आखिर कौन पाकिस्तानी सेना का कितना बड़ा मुरीद है।

पाकिस्तान में, 11 प्रमुख विपक्षी दल पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) नामक एक संयुक्त मंच बनाने के लिए एक साथ आए हैं।  शुक्रवार को पहली बैठक आयोजित होने के बाद दूसरी बैठक कराची में हुई थी। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ पिछले कुछ हफ्तों से इमरान खान की सरकार और सेना प्रमुख की आलोचना कर रहे हैं। इमरान खान के समूह से शरीफ पर भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का दोस्त होने और उनके एजेंडे पर काम करने का आरोप लगाया गया था। विपक्षी दलों ने इन आरोपों का जवाब दिया है।

मरियम नवाज ने कराची की रैली में इमरान सरकार पर सवाल उठाया कि इमरान खान ने आरोप लगाया कि हम नरेंद्र मोदी की भाषा बोल रहे हैं। आप (इमरान खान) मोदी की सफलता के लिए प्रार्थना करते हैं, आप मोदी के साथ चर्चा करने के लिए उत्सुक हैं, आप कुलभूषण जाधव के लिए एक मध्यरात्रि अध्यादेश जारी करेंगे, आप सरकारी खर्च पर वकील भी प्रदान करेंगे, आप कश्मीर को एक थाली भी देंगे, आप भारत के लिए संयुक्त राष्ट्र में मतदान करेंगे और हम मोदी की भाषा बोलते हैं।

विपक्षी समूहों ने पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा के विरोध में संघर्ष विराम का आह्वान किया। गिलगित-बाल्टिस्तान राज्य का दर्जा देने से सेना प्रमुख और विपक्ष के बीच विवाद छिड़ गया है। प्रधानमंत्री इमरान खान ने विपक्ष पर कटाक्ष किया था, जिसकी अब विपक्ष आलोचना कर रहा है। खान ने कहा था कि बाजवा की शरीफ आलोचना पूरे पाकिस्तान की सेना की आलोचना थी। खान ने कहा कि नरेंद्र मोदी ने अक्सर शरीफ की प्रशंसा की है।

इमरान के खिलाफ जारी रहेगा विपक्षी आंदोलन

पाकिस्तान की विपक्षी पार्टियां इमरान की सत्ता को उखाड़ फेंकने की योजना बनाने के लिए एक मंच पर हैं। 11 दलों की विपक्षी टीम एक साथ खेल रही है। पहली रैली 16 अक्टूबर को गुजरांवाला और 18 अक्टूबर को जिन्ना-बाग, कराची में हुई थी, लेकिन विपक्ष का दिल अभी तक नहीं भरा है। इस तरह की 4 और रैलियां होनी बाकी हैं।

राजनीति में प्रवेश करने से पहले इमरान खान 11 लोगों की टीम यानि पाकिस्तानी टीम का नेतृत्व करते थे। लेकिन राजनीति की घुमावदार पिच पर अब वह ग्यारह विपक्षी दलों का सामना कर रहे हैं। अब यह जानना दिलचस्प होगा कि इमरान विपक्ष के बाउंसरों से कैसे मुकाबला करते हैं। एक तरफ विपक्ष की संयुक्त ताकत है और दूसरी तरफ माना जाता है कि इमरान खान को सेना का खुला समर्थन मिला हुआ है। लेकिन कोई नहीं जानता कि जनरल बाजवा कितने दिनों तक इमरान के लिए फील्डिंग करेंगे।

हालाँकि इमरान खान बड़े परिवर्तन का नारा देकर सत्ता में पहुँचे थे, लेकिन अब पाकिस्तान में उनकी लोकप्रियता कम हो रही है। इमरान के सत्ता में आए दो साल हो चुके हैं, लेकिन वह कुछ खास करने में असफल रहे हैं। उनके कार्यकाल के दौरान पाकिस्तान कंगाल हो गया है। हाल के दिनों में पाकिस्तानी लोगों पर मुद्रास्फीति का भारी बोझ है। आटा बाजार से गायब है।

खाद्य पदार्थों की कीमतें आसमान को छू रही हैं। बाजार में प्रत्येक रोटी 20-20 रुपये में बेची जा रही है। पाकिस्तान की आर्थिक दुर्दशा बदतर होती जा रही है। 1.5 करोड़ लोग अब तक बेरोजगार हैं। पाकिस्तान आतंकवाद पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पहले से ही बार-बार बदनाम है। अब यह देखना बाकी है कि खान और सेना के खिलाफ शरीफ की लड़ाई किस तरह खत्म होगी। क्या वह एक शक्तिशाली सेना प्रमुख और वर्तमान प्रधान मंत्री को बाहर करने में सफल होंगे? या उन्हें यह उपलब्धि हासिल करने के लिए किसी की मदद की जरूरत होगी?

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