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#इमरान का बाउंसर

पड़ोसी देश पाकिस्तान की सियासी सूरत काफी हद तक भारत को प्रभावित करती है। वहां 25 जुलाई को आम चुनाव हुए। जिनके नतीजे 26 जुलाई को आ गए। नतीजों में अपने जमाने के मशहूर क्रिकेटर इमरान खान की पार्टी ‘पीटीआई’ पर जनता ने भरोसा जताया है। बाकी नवाज शरीफ और भूट्टो की पार्टी बहुत पीछे हो गई है। चुनाव में पिछड़ने के बाद नवाज शरीफ की ‘पाकिस्तान मुस्लिम लीग’ ने मतगणना में बड़ी धांधली का आरोप लगाया है। माना जा रहा है कि किसी भी दल को बहुमत न मिलने पर ‘पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी’ के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी किंगमेकर की भूमिका निभा सकते हैं।
इस चुनाव में आतंकी संगठन लश्कर के प्रमुख हाफिज सईद की पार्टी ‘अल्लाहू अकबर तहरीक’ का खाता तक नहीं खुल सका। हाफिज के बेटे-दामाद को भी पराजय का सामना करना पड़ा है। नतीजे आने के बाद हाफिज ने पाकिस्तान गृह मंत्रालय पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हाफिज ने अपनी पार्टी के बैनर तले 268 उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारा।
जम्हूरियत के जश्न को पाकिस्तान की जनता ने काफी उत्साह के साथ मनाया। घरों से निकलकर वोट डाले। मगर यह चुनाव भी हिंसा के साए से अलग नहीं रह सका। मतदान के दौरान बम ब्लॉस्ट में 31 लोगों की मौतें हुई। इस घटना की जिम्मेदारी आईएसआईएस ने ली है।
कुछ लोगों को लगता था कि पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की गिरफ्तारी से उनको सहानुभूति मिलेगी। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। इमरान खान पिछले लंबे अरसे से आवाम का दिल जीतने की कोशिश कर रहे थे। इस बार उनको जबरदस्त ढंग से कामयाबी मिली है।
इमरान खान ने 1971-1992 तक पाकिस्तान क्रिकेट टीम के लिए खेला। 1982 से 1992 यानी दस सालों तक वह पाक क्रिकेट टीम के कप्तान भी रहे। वर्ष 1987 के क्रिकेट विश्व कप के बाद उन्होंने संन्यास भी ले लिया था। लेकिन दबाववश 1988 में उन्हें दोबारा टीम में शामिल किया गया। इमरान की कप्तानी ने पाकिस्तान को विश्वकप का खिताब दिलाया था।
क्रिकेट से संन्यास के बाद इमरान का मन सियासत में लग गया। अप्रैल 1996 में उन्होंने ‘पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ’ राजनीतिक पार्टी बनाई। तब वह अकेले ही अपनी पार्टी से संसद के लिए चुने गए। इमरान खान को उनके प्रतिद्वंदी तालिबान खान कहते हैं। कहा जा रहा है कि उनकी पार्टी को अमेरिका से घोषित उन आतंकवादियों का समर्थन हासिल है जो अलकायद से जुड़े रहे हैं। वो तालिबान से सहानुभूति रखते हैं। इमरान खान का स्टैंड हमेशा ही अमेरिका के खिलाफ रहा है। इमरान खान का भारत के प्रति भी बहुत दोस्ती का रवैया नहीं रहा है। वह यह बात बार-बार कहते हैं कि चीन का दबदबा कायम करने के लिए अंतरराष्ट्रीय संगठन भारत की मदद करते हैं। इमरान पाक को मिली विदेशी मदद की मुखालफत करते हैं। वर्ष 2013 के चुनावों में धांधलियों का आरोप लगाकर उन्होंने 2014 में इस्लामाबाद में लगातार 126 दिनों तक प्रदर्शन का नेतृत्व किया था। इमरान खान की निजी जिंदगी बहुत विवादित रही। उन्होंने कई शादी की और तलाक दिए।
बहरहाल अब इमरान खान क्रिकेट में कप्तानी के बाद अपने देश की सियासत की कप्तानी करने को तैयार हैं। उन्हें देश के युवाओं और महिलाओं का बहुत समर्थन मिला है। यह भी बात है कि उनके सियासी रूप को पाक मीडिया हमेशा ही नजरअंदाज करता रहा है और उनकी निजी जिंदगी में ज्यादा दिलचस्पी ली। आज हालात पलट गए हैं। अब सबसे अहम है कि वहां नवाज शरीफ का क्या होगा? अमेरिका के प्रति वह क्या रुख लेते हैं और भारत को लेकर उनका रवैया कैसा रहता है।
पाकिस्तान आम चुनाव
पार्टी बढ़त
पीटीआई 118
पीएमएल (एन) 63
पीपीपी 42
अन्य 12
आईए 0

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