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अपने ही बुने जाल में फंसते इमरान

पाकिस्तान में सियासी उथल-पुथल जारी है। कार्यवाहक प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ जहां विपक्ष ने मोर्चा खोल रखा है वहीं अब इस मामले को लेकर इमरान अपने ही बुने जाल में फंसते नजर आ रहे हैं। दरअसल, इमरान खान को पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट में जवाब देना मुश्किल हो रहा है। विदेशी साजिश वाली जिस कथित चिट्ठी को रैलियों में दिखा-दिखाकर इमरान जनता की सहानुभूति बटोरना चाहते थे उसी चिट्ठी को लेकर कोर्ट में अब इमरान को बड़ी फजीहत झेलनी पड़ रही है।

गौरतलब है कि इमरान सरकार के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को डिप्टी स्पीकर द्वारा यह कहकर यह खारिज कर दिया गया कि इमरान सरकार गिराने में विदेशी ताकतों का हाथ है। इस मामले की सुनवाई कर रहे सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने कार्यवाहक पीएम इमरान खान को फटकार लगाई है। चीफ जस्टिस ने कहा कि मौजूदा संकट में आपने 90 दिनों के लिए देश को बेसहारा छोड़ दिया।

कोर्ट ने इमरान सरकार गिराने में विदेशी
साजिश के दावों को साबित करने के लिए कहा है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इमरान सरकार से राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक के विवरण भी मांगें हैं। वहीं विपक्षी दलों के संगठन पीडीएम के चीफ मौलाना फजल-उर-रहमान ने साफ कर दिया है कि गठबंधन अब कोर्ट के अलावा सड़कों पर भी इमरान खान का मुकाबला करेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने इमरान से मांगें सबूत
सुप्रीम कोर्ट ने पूछा है कि तथ्यों को पेश किए बिना अविश्वास प्रस्ताव को खारिज कैसे किया जा सकता है? अविश्वास प्रस्ताव खारिज होने और संसद भंग करने के मामले में अदालत से कोई बड़ा फैसला आने की उम्मीद है। उधर मरियम नवाज ने तंज कसते हुए कहा है कि इमरान सरकार जाली खत लेकर आई। आपने खत क्यों नहीं दिखाए। यह खत सुप्रीम कोर्ट में दिखाना चाहिए था। सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष कमजोर पड़ते देखकर अब इमरान खान की पार्टी जगह-जगह शक्ति प्रदर्शन में जुटी है।

पाक में रहा है सेना के तख्ता पलट का इतिहास पाकिस्तान का इतिहास लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार को कुचलने का रहा है। वर्ष 1958 में अय्यूब खान ने तत्कालीन प्रधानमंत्री फिरोज खान नून का तख्ता पलट दिया था। 1965 में भारत से करारी हार के बाद अय्यूब खान खुद तख्ता पलट का शिकार हुए थे। याह्या खान ने उनका तख्ता पलट कर खुद सत्ता हथिया ली थी। 1977 में जनरल जियाउल हक ने जुल्फिकार अली भुट्टो को गिरफ्तार कर खुद सत्ता पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद 1999 में तत्कालीन सेनाध्यक्ष परवेज मुशर्रफ ने तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को हटा कर खुद सत्ता की बागडोर संभाल ली थी।

पाकिस्तान के मौजूदा हालात ऐसे हैं कि वहां कुछ भी हो सकता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि पाकिस्तानी सेना के खिलाफ जा कर इमरान खान फिलहाल भले ही अपनी कुर्सी बचाने में कामयाब हो गए हों लेकिन सेना का वर्चस्व को वो पूरी तरह खत्म नहीं कर पाए हैं। कार्यवाहक प्रधानमंत्री को तौर पर तो वो ऐसा बिल्कुल नहीं कर पाएंगे। लिहाजा पाकिस्तान के इतिहास को देखते हुए यह आशंका बनी रहेगी कि कहीं सेना इमरान खान का भी तख्ता पलट करके सत्ता की बागडोर खुद अपने हाथों में न ले लें। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

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