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डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया सीनेट के हवाले

डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया सीनेट के हवाले

अमेरिका में इसी साल नवंबर में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होने हैं। लेकिन इससे पहले दुनिया की नजरें मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ संसद के ऊपरी सदन यानी सीनेट में शुरू हुई महाभियोग की प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं। इस प्रक्रिया में कितने दिन लगेंगे, इसको लेकर अभी सस्पेंस बना हुआ है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि यदि ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के सांसद चाहें तो राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया दो सप्ताह में समाप्त हो सकती है। ट्रंप पर डेमोक्रेट्स सांसदों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को रिपब्लिकन खारिज कर दें तो यह परीक्षण दो सप्ताह में खत्म हो जाएगा।

इसके पहले 1999 में तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया पांच सप्ताह चली थी। वर्ष 1868 में एंड्रयू जॉनसन पर महाभियोग की प्रक्रिया तीन महीने तक चली थी। सीनेट में राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू हो गई है। सीनेट में रिपब्लिकन सांसदों का बहुमत है और वे महाभियोग के खिलाफ हैं। ऐसे में सीनेट में महाभियोग का पास होना मुश्किल ही माना जा रहा है।
सीनेट में बहुमत के नेता मिच मैककोनेल ने कहा, “मुद्दा तब तक तय नहीं किया जाएगा जब तक परीक्षण के प्रारंभिक तर्क और सवाल सामने नहीं आ जाते हैं।” वहीं, व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा, “मैं समझता हूं कि महाभियोग प्रक्रिया दो सप्ताह से ज्यादा नहीं चलेगी। इसे अधिक समय तक खींचने की आवश्यकता भी नहीं है। राष्ट्रपति को बरी होना चाहिए और यही होने जा रहा है।”

दूसरी ओर ट्रंप की कानूनी टीम ने सीनेट से प्रतिनिधि सभा द्वारा पारित महाभियोग प्रस्ताव के दो आरोपों को खारिज करने का अनुरोध किया है। इस टीम ने इसे स्वतंत्र रूप से राष्ट्रपति चुनने के अमेरिकी लोगों के अधिकार पर खतरनाक हमला करार दिया। ट्रंप पर लगे आरोपों पर व्हाइट हाउस की कानूनी टीम ने कहा, “महाभियोग का प्रस्ताव देश के लोगों की इच्छा को पलटने, 2016 के चुनाव परिणामों को बदलने और 2020 के चुनाव में हस्तक्षेप करने का एक घिनौना और गैरकानूनी प्रयास है। राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग लाने के अत्यधिक पक्षपातपूर्ण प्रयास उसी दिन से शुरू हो गए थे, जिस दिन से उन्होंने कार्यभार संभाला था और आज भी जारी हैं।”

इस वर्ष अमेरिका में चुनाव होने वाले हैं। इसको लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। अमेरिका में चुनावों से पहले आई एक सर्वेक्षण रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि 2020 के अमेरिकी चुनाव में लगभग 52 प्रतिशत अमेरिकी मतदाताओं ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ मतदान करने की योजना बनाई है। हालांकि इसके साथ ही कहा गया है उन्होंने कोर रिपब्लिकन समर्थन बरकरार रखा है। मतदान संगठन ने एक प्रेस रिलीज में कहा, नवीनतम रासमुसेन रिपोर्ट राष्ट्रीय टेलीफोन और ऑनलाइन सर्वेक्षण में पाया गया है कि 42 प्रतिशत अमेरिकी मतदाताओं का कहना है कि वे 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप के लिए मतदान करने की अधिक संभावना रखते हैं।

ट्रंप के खिलाफ ऐतिहासिक महाभियोग की सुनवाई सीनेट में शुरू हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश जान राबर्ट ने सीनेटरों को निष्पक्ष फैसला करने को लेकर शपथ दिलाई। इस प्रक्रिया के दौरान 99 सांसद मौजूद थे जबकि एक गैरहाजिर था। रिपब्लिक सीनेटर जेम्स इनहोफ शपथ लेने नहीं पहुंचे। इसके पीछे पारिवारिक कारण बताए जा रहे हैं। सीनेट में इस बात का फैसला होना है कि अमेरिका के 45वें राष्ट्रपति को पद से हटाया जाए या नहीं। ट्रंप पिछले कई महीनों से महाभियोग की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने सुनवाई की शुरुआत को फर्जी बता दिया है। ओवल आॅफिस में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मुझे यकीन है कि यह बहुत जल्द खत्म हो जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कार्यवाही पूरी तरह से पक्षपातपूर्ण है। मुझे एक फर्जी प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा क्योंकि विपक्षी डेमोक्रेट चुनाव जीतने की कोशिशों में लगे हैं।

बीते 18 दिसंबर को डेमोक्रेट के बहुमत वाली प्रतिनिधि सभा में ट्रंप के खिलाफ महाभियोग की कार्यवाही हुई थी। डेमोक्रेटिक-बहुमत वाले हाउस आॅफ रिप्रजेंटेटिव के सदन में रखे प्रस्ताव के पक्ष में 230 में से 197 वोट पड़े। अधिकतर सांसदों ने दोनों आर्टिकल पर यानी सत्ता के दुरुपयोग और कांग्रेस के काम में बाधा पहुंचाने पर महाभियोग चलाए जाने के पक्ष में मतदान किया। इससे पहले ट्रंप ने प्रतिनिधि सभा की स्पीकर नैंसी पेलोसी को एक पत्र लिख कर उनके खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया रोकने को कहा था। ट्रंप ने पेलोसी को लिखे एक पत्र में कहा था कि महाभियोग डेमोक्रेट सांसदों के शक्ति के अप्रत्याशित एवं असंवैधानिक दुरुपयोग को दर्शाता है। अमेरिकी विधायी इतिहास की लगभग ढ़ाई शताब्दी में कभी ऐसा नहीं हुआ। सीनेट में रिपब्लिक का बहुमत ज्यादा होने के चलते तय माना जा रहा है कि वहां महाभियोग का प्रस्ताव पारित नहीं होगा, 100 सदस्यों की सीनेट में रिपब्लिकन के 53 सदस्य हैं।

ट्रंप से पहले भी आए महाअभियोग
ट्रंप पर अ पने पद का दुरुपयोग करने के आरोप हैं। सबसे बड़ा आरोप यह है कि उन्होंने अपने देश के दो डेमोक्रेट नेताओं के खिलाफ जांच के लिए यूक्रेन के राष्ट्रपति पर दबाव डाला था। अमेरिका के इतिहास में पहले भी दो राष्ट्रपतियों, 1886 में एंड्रयू जानसन और 1998 में बिल क्लिंटन के खिलाफ महाभियोग लाया गया था, लेकिन उन्हें पद से हटाया नहीं जा सका। 1974 में राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन पर अपने एक विरोधी की जासूसी करने का आरोप लगा था। इसे वाटरगेट स्कैंडल का नाम दिया गया था। लेकिन महाभियोग चलाने से पहले उन्होंने इस्तीफा दे दिया था क्योंकि उन्हें पता था कि मामला सीनेट तक पहुंचेगा और उन्हें इस्तीफा देना पड़ सकता है।

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