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अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ दूसरी बार महाभियोग की कार्रवाई शुरू

अमेरिकी इतिहास में पहली बार है कि किसी राष्ट्रपति पर दो बार महाभियोग लगाया जा रहा है। कल 9 फरवरी से डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ सीनेट में दूसरे महाभियोग पर सुनवाई शुरू हो चुकी है।

गौरतलब है कि ट्रंप पर चुनाव के नतीजों को पलटने का प्रयास करने और छह जनवरी को हिंसा भड़काने का आरोप लगाया गया है। अमेरिकी सीनेट का मानना है कि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दूसरा महाभियोग संवैधानिक है।

महाभियोग को लेकर ट्रंप के वकीलों ने दलील दी है कि ट्रंप ने अपने समर्थकों की रैली को संबोधित जरूर किया था परन्तु इस दौरान उन्होंने किसी को भी दंगे करने के लिए नहीं भड़काया। वकीलों ने एक वक्तय पर जोर दिया कि ट्रंप की ओर से बार-बार अपने समर्थकों से अपील की गई कि वे शांतिपूर्ण और देशभक्त ढंग से अपनी आवाज उठाएं।

उन्होंने तर्क दिया कि ट्रम्प की टिप्पणी यदि आप जी जान से नहीं लड़ते हैं, तो आप इस देश को खोने जा रहे हैं, चुनाव सुरक्षा के सामान्य संदर्भ में थी न कि हिंसा के लिए कॉल करने के लिए। सुनवाई के मद्देनजर राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। वकीलों ने यह भी कहा कि कानून के प्रवर्तकों ने पहले ही 6 जनवरी को हिंसा होने की चिंता व्यक्त की थी, इसलिए ट्रंप खुद किसी को भी हिंसा के लिए नहीं उकसा सकते थे।

असंवैधानिक है महाभियोग चलाना

ट्रंप का पक्ष ले रहे वकीलों का दावा है कि ट्रंप को संविधान के पहले संशोधन के तहत संरक्षण मिला हुआ था। उन्होंने यह भी कहा है कि ट्रंप पर महाभियोग चलाना असंवैधानिक है, क्योंकि वह अब राष्ट्रपति पद से हट चुके हैं। वकीलों का कहना है कि संविधान के अनुसार किसी भी साधारण नागरिक पर महाभियोग नहीं चलाया जा सकता है। साथ ही इस प्रक्रिया में किसी गवाह को भी बुलाने की संभावना नहीं है। गवाही में शामिल होने से ट्रंप ने भी इनकार कर दिया है।

मुकदमे का नहीं कोई कानूनी आधार

वकीलों का कहना है कि अब ट्रंप व्हाइट हाउस में नहीं हैं। जबकि महाभियोग में दोषी साबित होने के बाद बचाव पक्ष (ट्रंप) को पद से हटाना उद्देश्य होता है। लेकिन ट्रंप अब व्हाइट हाउस में नहीं हैं, इसलिए ऐसे मुकदमे का कोई कानूनी आधार नहीं है। वहीं इसपर डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्यों का कहना है कि ऐतिहासिक मिसालें हैं जब पद से हटने वाले लोगों के आचरण के खिलाफ महाभियोग चलाया गया था। हालांकि यह राष्ट्रपति को लेकर नहीं रहे हैं।

बुधवार, 10 फरवरी से दोनों पक्षों की ओर से दलीलें रखने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और दोनों पक्षों को 16-16 घंटे दिए जाएंगे।

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