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म्यांमार में फंसा IMF का 35 करोड़ डालर

म्यांमार में इन दिनों हालात काफी ज्यादा चिंताजनक हो गए है। सेना के दवारा किए गए तख्तापलट के बाद अब वहां सेना ने सभी सोशल साइट पर रोक लगा दी है। 1 फरवरी को देश के राष्ट्रपति बिन बिन मिन्त और सर्वोच्च नेता आंग सान सू को नरजबंद कर दिया गया है। एक तरफ देश में सेना का तख्तापलट और दूसरी तरफ कोरोना महामारी। म्यांमार गरीब देशों की श्रेणी में आता है। इसलिए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने कोरोना महामारी से निपटने के लिए म्यांमार को 35 करोड़ रूपए डॉलर दिए थे। ताकि देश कोरोना महामारी से ऊभर सके।

अब इस फंड के वापिस होने पर सवालिया निशान उठ रहे हैं। IMF बोर्ड ने 13 जनवरी को इस पैकेज को मंजूरी दी थी। इसके लिए कोई शर्त भी नहीं थी। संगठन के प्रवक्ता ने न्यूज एजेंसी से कहा- जो कुछ हुआ, वो परेशान करने वाला है, लेकिन हम इस पर करीबी नजर रख रहे हैं। इस घटना का असर वहां की इकोनॉमी और लोगों पर पड़ेगा।

13 जनवरी को म्यांमार की आर्थिक मदद मंजूर करते वक्त IMF ने कहा था- वहां महामारी की वजह से अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान हुआ है। यह फंड हालात बेहतर करने के लिए हैं। वहां आर्थिक स्थिरता जरूरी है। IMF के पूर्व इकोनॉमिस्ट स्टीफन सीगल कहते हैं, इस तरह की मदद के प्रोग्राम सशर्त नहीं होते और न इन पर मोलभाव होता। मुझे नहीं लगता कि पहले IMF ने किसी देश को मदद दी हो और फिर उसे वापस लिया गया हो। आईएमएफ ने कोरोना से निपटने के लिए 80 देशों को आर्थिक सहायता प्रदान की थी। एक दिक्कत यह है कि संगठन अब वहां की सरकार को ये भी नहीं बता सकता कि फंड को कैसे और कहां खर्च करना है। म्यांमार में फिलहाल IMF का सहयोगी संगठन वहां का सेंट्रल बैंक है। अब IMF उम्मीद कर रहा है कि सेंट्रल बैंक पर वहां की फाइनेंस मिनिस्ट्री का दबाव नहीं होगा।

दरअसल पिछले वर्ष 2020 के नवम्बर माह में देश में चुनाव हुए थे जिसमें आंग सान सू की की नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेटिक पार्टी ने ससंद के सदनों के 476 सीटों में से 396 सीटों पर जीत हासिल कर सत्ता पर आसीन होने वाली थी और 1 फरवरी को पार्टी अपने पदों का भार आधिकारित रूप में संभालने वाली थी लेकिन इसी बीच सेना के कमांडर इन चीफ मिंग आन लाइन के नेतृत्व में विपक्षी पार्टियों ने आंग सान सू की पर चुनाव में धांधली करने का आरोप लगा कर देश में आपातकाल लगाते हुए आंग सान सू की के साथ-साथ उनके अन्य समर्थक नेताओं को भी गिरफ्तार कर लिया। कार्यकारी राष्ट्रपति मीएन स्वे ने हस्ताक्षर कर देश में एक वर्ष तक आपातकाल लगाए रखने की घोषणा कर दी है।

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