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हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन अमेरिका के लिए नहीं बनी रामबाण, दवा लेने वाले मरीजों की मौत ज्यादा

कोरोना वायरस के कारण ब्राजील में एक दिन में 1269 लोगों ने तोड़ा दम

कोरोना की भयावहता का सामना कर रहे अमेरिका ने भारत से मदद मांगी थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी भरे लहजे का इस्तेमाल भी किया था। वह भी सिर्फ एक दवा के लिए। इस दवा का नाम है हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन। अब अमेरिका से ही एक नई स्टडी सामने आई है जिसमें कहा गया है कि सामान्य इलाज की तुलना में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा लेने वाले मरीजों की मौत ज्यादा हो रही है।

स्टडी में कहा गया है कि हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन की दवा से करीब 28 फीसदी कोरोना मरीजों की मौत हो रही है। जबकि, सामान्य प्रक्रिया से इलाज करते हैं तो सिर्फ 11 प्रतिशत मरीज ही अपनी जान गवां रहे हैं। जिन 97 मरीजों को हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन की दवा दी गई थी, उसमें से 27.8% मरीजों की मौत हो गई। जिन 113 मरीजों को हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन की दवा के साथ एजिथ्रोमाइसिन की दवा दी गई थी उनमें से 22.1% मरीजों की मौत हो गई।

जबकि, उन 158 मरीजों की बात करें तो जिन्हें हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन की दवा नहीं दी गई, उनमें सिर्फ 11.4% मरीज ही मारे गए। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन को दुनियाभर में कोरोना के इलाज के लिए अनुमति मिलती है तो उससे ये दवा बनाने वाली कंपनियों को बहुत फायदा होगा।

ऐसी ही एक कंपनी में डोनाल्ड ट्रंप का शेयर है। साथ ही उस कंपनी के बड़े अधिकारियों के साथ डोनाल्ड ट्रंप के गहरे रिश्ते हैं। अमेरिका में कोरोना वायरस की वजह से 7.89 लाख से ज्यादा लोग बीमार है। जबकि, 45 हजार से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिकी सरकार द्वारा फैसला लेने में की गई लेटलतीफी है।

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