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ह्यूस्टन में’हाउडी मोदी’ कार्यक्रम आज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी का ह्यूस्टन शहर पहुंचे हैं। पीएम मोदी सात दिनों के अमेरिकी दौरे पर हैं जहां पर वे आज हाउडी मोदी कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। इस कार्यक्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी उनके साथ मंच शेयर करेंगे।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने तय कार्यक्रम के अनुसार आज ह्यूस्टन में तेल एवं ऊर्जा उद्योग क्षेत्र के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ राउंड टेबल मीटिंग शुरू कर दी है।

पी एम् मोदी आज अमेरिका में  ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम में शिरकत करेंगे, जिसे पोप के बाद किसी विदेशी नेता का अमेरिका में सबसे बड़ा कार्यक्रम बताया जा रहा है। दुनिया की ऊर्जा राजधानी ह्यूस्टन पहुंचने के साथ ही अमेरिकी कारोबारी समुदाय विश्व के दो सबसे बड़े लोकतंत्रों के बीच किसी व्यापारिक सौदे की उत्सुकता से उम्मीद कर रहा है। व्यापारिक सौदे पर मतभेद भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों में एक प्रमुख अड़चन के रूप में सामने आए हैं। ह्यूस्टन पहुंचने पर भारतीय समुदाय के लोगों ने उनका जोरदार स्वागत किया। टेक्सस के सबसे बड़े शहर ह्यूस्टन के जॉर्ज बुश इंटरनैशनल एयरपोर्ट पर उनका प्लेन उतरा। प्लेन से उतरने पर ट्रेड ऐंड इटरनैशनल अफेयर्स के डायरेक्टर क्रिस्टफर ओल्सन ने पीएम मोदी का स्वागत किया।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ह्यूस्टन कश्मीरी पंडितों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ मुलाकात की। एक सदस्य ने प्रधानमंत्री के हाथ को चूमा और कहा, ‘मैं सात लाख कश्मीरी पंडितों की तरफ से आपको धन्यवाद कहना चाहता हूं।

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई बैठक के दौरान टेक्सास के ड्रिफ्टवुड में टेलूरियन और पेट्रोनेट कंपनी ने एकसाथ मिलकर इक्विटी निवेश के माध्यम से तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) के 50 लाख टन (5 मिलियन टन) तक उत्पादन को लेकर समझौता प्रस्ताव (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। टेल्यूरियन और पेट्रोनेट ने 31 मार्च 2020 तक इस समझौते को अंतिम रूप देने का लक्ष्य रखा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी पीएम मोदी के कार्यक्रम में शिरकत करेंगे। यह पहली बार होगा जब कोई अमेरिकी राष्ट्रपति भारतीय-अमेरिकी समुदाय के कार्यक्रम में भारतीय प्रधानमंत्री के साथ हिस्सेदारी करेगा। एनआरजी फुटबॉल स्टेडियम में होने वाले इस कार्यक्रम में करीब 50 हजार भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिकों के पहुंचने की संभावना है।ह्यूस्टन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात से पहले ही बलोच, सिंधी और पश्तो लोगों के प्रतिनिधि समूह एनआरजी स्टेडियम के बाहर प्रदर्शन के लिए एकत्र हो गए हैं। दरअसल इसके पीछे उनका लक्ष्य दोनों ही नेताओं का ध्यान खींचकर उन्हें पाकिस्तान से आजादी दिलाने में मदद की गुहार लगाना है।

इन समूहों में बालोची अमेरिकी,सिंधी अमेरिकी और पश्तो अमेरिकी समुदायों के सदस्य शामिल हैं। ये सभी कल शनिवार को अमेरिका के विभिन्न हिस्सों से यहां पहुंचे हैं। ताकि अपनी तरह से इस पहले प्रदर्शन में हिस्सा ले सकें। जिसमें वे अपनी मांग उठाएंगे।  इन समूहों के सदस्यों ने  आरोप लगाया था कि पाकिस्तान और एजेंसियां इन समुदायों के खिलाफ मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन कर रहा है।ह्यूस्टन से पीएम नरेंद्र मोदी न्यूयॉर्क के लिए उड़ान भरेंगे, जहां वे 27 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा के वार्षिक सत्र को संबोधित करेंगे। इससे पहले पीएम मोदी 24 सितंबर को न्यूयॉर्क में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ द्विपक्षीय बैठक में भाग लेंगे। यह इन दोनों नेताओं के बीच हालिया महीनों में चौथी मुलाकात होगी। इस बैठक में दोनों देशों के अगले कुछ सालों के संबंधों का खाका खींचे जाने की संभावना है।

अगले साल अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव होने हैं। इस चुनाव में एशियाई मूल के लोगों की खासकर अमेरिकी भारतीयों की बड़ी भूमिका होती है, क्योंकि अमेरिका में 20 फीसद लोग एशियाई देशों के हैं। वोटरों की संख्या के कारण भारतवंशियों का अमेरिकी राजनीति में काफी दबदबा है।

दरअसल, पारंपरिक रूप से भारतवंशियों का झुकाव डेमोक्रेटों की तरफ रहा है जबकि ट्रंप रिपब्लिकन पार्टी के हैं। ऐसे में अमेरिकी चुनाव में मोदी की छवि को भुनाने की कोशिश भी राष्ट्रपति ट्रंप करने में जुटे हैं। मोदी के साथ इस मेगा शो के मंच को साझा करने की सहानुभूति रिपब्लिकन पार्टी को मिल सकती है। इस तरह ट्रंप इस मेगा ईवेंट के बहाने डेमोक्रेटों के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश भी कर रहे हैं।पुलवामा आतंकी हमला हो या कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म करने का मुद्दा अथवा पाक के जैश सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित कराना, भारत के रुख को पूरी दुनिया में जबरदस्त समर्थन मिला है।

अमेरिका ने ऐसे मामलों में भारत को खुला साथ देकर पाकिस्तान को हर मोर्चे पर शिकस्त दी है। जिस तरह से ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ मंच साझा करने की उत्सुकता दिखाई है, उससे दुनिया में भारत का नाम शिखर पर आया है। ऐसे में यदि ट्रंप इस मंच से कुछ बड़ा ऐलान करते हैं तो यह भी भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत होगा।

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