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हाऊ डू यू डू मोदी और ट्रंप 

इन दिनों भारतीय प्रधानमंत्री की अमेरिका के ह्यूस्टन में रविवार 22 सितंबर की शाम होने जा रही सभा का हो हल्ला जितना भारत में है, उतनी ही अमेरिका में भी इसको लेकर बात हो रही है। ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम अमेरिका के टेक्साल राज्य के सबसे ज्यादा आबादी वाले शहर ह्यूस्टन में भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिकों ने संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा में भाग लेने पहुंचे भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सम्मान में आयोजित किया है। अनुमान लगाया जा रहा है कि लगभग पचास हजार भारतवंशी इसमें भाग लेंगे। अमेरिका में इस कार्यक्रम को लेकर चर्चा इसलिए जोर पकड़ चुकी है क्योंकि विश्व का सबसे शक्तिशाली नेता, पोट्स (Potus) इसमें शामिल होगा। पोट्स अमेरिकी राष्ट्रपति को कहा जाता है। (President of the United States) ऐसा अमेरिका के इतिहास में पहली बार हो रहा है कि किसी विदेशी राजनेता के सम्मान में आयोजित निजी कार्यक्रम में पोट्स भाग लेगा।
कैसे शुरू हुई हाउडी मोदी कम्पैन
महिना था जून, 2019, जगह थी ह्यूस्टन शहर में भारतीय मूल के मित्रों की बैठकी। इन मित्रों को में जब पता चला कि पीएम मोदी सितंबर में अमेरिका आ रहे हैं और अमेरिका के दो बड़े शहरों-शिकागो और बोस्टन में रह रहे भारतीय मोदी के सम्मान में कार्यक्रम करना चाहते हैं तो टेक्सास इंडिया फोरम ने तय किया कि वे भी पीएम मोदी से समय से अपने शहर में बड़ा कार्यक्रम करेंगे। इन भारतीयों में शामिल थे जुगल मलानी जो टेक्सास इंडिया फोरम के अध्यक्ष हैं। फिर किया था एक के बाद एक भारतीय इसमें जुड़ते चले गए, कारवां बनता गया। प्रधानमंत्री मोदी के सम्मान में आयोजित इस मेगा इवेंट के लिए अब तक कुल 17 करोड़ रूपये (2 ़4 मिलियन डाॅलर) एकत्रित किए जा चुके हैं। कल की अमेरिकी शाम भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूती देने वाली शाम कहा जा रहा है। भारत-अमेरिका के संबंध इन दिनों तनावपूर्ण हैं। ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप  की इस कार्यक्रम में उपस्थिति के मायने समझने का प्रयास किया जाए।
कैसे हैं भारत-अमेरिकी रिश्ते
बहुत  सारे मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय मंच में एक दूसरे का साथ देते नजर आ रहे दोनों देशों के बीच कई गंभीर मतभेद भी हैं जिन्हें मोदी-ट्रंप की आत्ममियता से परे देखा जाना जरूरी है। एक बड़ा विवाद आयात-निर्यात के क्षेत्र में भारतीय उत्पादों में अधिक टैक्स अमेरिका द्वारा लगाए जाने का है। इस विवाद के चलते भारत का अमेरिकी बाजार में उत्पाद खासा महंगा हो चला है। ऐसे में निर्यात में गिरावट आ रही है। ईरान और वेनीजुएला पर अमेरिका द्वारा  आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भारत के सामने तेल का संकट पैदा हो गया है। ईरान के साथ हमारे रिश्ते मधुर हैं। ऐसे में अमेरिकी दबाव के चलते भारत की विदेश नीति प्रभावित हो रही है। दूसरी तरफ रूस से एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदने का भारत का निर्णय अमेरिका संग तनाव का कारण बन चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति एच1बी वीजा को लेकर भी सख्त रूख अपना चुके हैं। इस सबके बावजूद दोनों मुल्कों को एक दूसरे की जरूरत आर्थिक और सामरिक कारणों से है। चीन के बढ़ते प्रभाव को कम करने के लिए  अमेरिका की मजबूरी है कि वह भारत को अपना राजनीतिक पार्टनर बनाए रखे। आतंकवाद से लड़ने के लिए भी भारत का सहयोग आवश्यक है। अमेरिका लगातार इस मुद्दे पर भारत के प्रयास सराहता आ रहा है। चूंकि इस समय विश्व भर की राजनीति विचार पर नहीं बल्कि अर्थव्यवस्था पर निर्भर है इसलिए दोनों देशों की बीच आर्थिक मुद्दों पर सहमति भविष्य के संबंध तय करेगी।
ट्रंप की हाउडी मोदी राजनीति
राष्ट्रपति टंªप ने मोदी के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने के लिए सहमति मात्र मोदी से अपनी प्रगाड़ता चलते नहीं दी है। इसके पीछे एक बड़ा कारण अगले वर्ष जनवरी में होने जा रहे राष्ट्रपति चुनावों का होना है। अमेरिका में इस समय 20 प्रतिशत से अधिक एशियाई मूल के नागरिक हैं जो वहां क डेमोक्रट पार्टी समर्थक रहे हैं। टंªप चाहते हैं कि इस एशियाई समाज का वोट बैंक उनकीरिपब्लिकन पार्टी की तरह खिसके ताकि वे दोबारा राष्ट्रपति बन सके। हाउडी मोदी कार्यक्रम में जाना इस दृष्टि से उनकी राजनीतिक चाल और मजबूरी, दोनों है।

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