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लम्बे विरोध के बाद झुकी हांगकांग सरकार

हांगकांग ने 23 अक्टूबर ,बुधवार को विवादित प्रत्यर्पण विधेयक को आधिकारिक तौर पर वापस ले लिया। इस विधेयक की वजह से यहाँ 20 हफ़्ते से प्रदर्शन चल रहे थे और राजनीतिक उथल-पुथल मची हुई थी। लेकिन अब विधेयक को वापस लेने से यहाँ प्रदर्शन थम जायेंगे इसकी आस लगाई जा रही है। स्थानीय मीडिया के अनुसार, हांगकांग की विधायिका ने विवादास्पद प्रत्यर्पण बिल को वापस लेने का फैसला किया है। इसके अलावा दूसरा रीडिंग बुधवार दोपहर को फिर से शुरु की जाएगी।

पांच महीने से लोगों ने इस बिल के खिलाफ सड़क पर प्रदर्शन किया ,एक रिपोर्ट में यह आशंका जताने के बाद  कि हांगकांग की प्रमुख कार्यकारी अधिकारी कैरी लैम पर गाज गिर सकती है उसी समय इस बिल को सरकार द्वारा वापस ले लिया गया।
क्या था कानून?
इस कानून के अनुसार अगर कोई व्यक्ति अपराध करके हांगकांग आ जाता है तो उसे जांच प्रक्रिया में शामिल होने के लिए चीन भेजा जा सकता। हांगकांग की सरकार इस मौजूदा कानून में संशोधन के लिए फरवीर में प्रस्ताव लाई थी। कानून में संशोधन का प्रस्ताव एक घटना के बाद लाया गया। जिसमें एक व्यक्ति ने ताइवान में अपनी प्रमिका की कथित तौर पर हत्या कर दी और हांगकांग वापस आ गया था।

हांगकांग की अगर बात की जाए तो यह चीन का एक स्वायत्त द्वीप है। चीन इसे अपने संप्रभु राज्य का हिस्सा मानता है। वहीं हांगकांग की ताइवान के साथ कोई प्रत्यर्पण संधि नहीं है। जिसके कारण हत्या के मुकदमे के लिए उस व्यक्ति को ताइवान भेजना मुश्किल है।

अगर ये कानून पास हो जाता तो इससे चीन को उन क्षेत्रों में संदिग्धों को प्रत्यर्पित करने की अनुमति मिल जाती, जिनके साथ हांगकांग के समझौते नहीं हैं। जैसे संबंधित अपराधी को ताइवान और मकाऊ भी प्रत्यर्पित किया जा सकता।

हांगकांग के लोग इस कानून का जमकर विरोध कर रहे थे। वो सरकार द्वारा कानून को निलंबित किए जाने के बाद भी नहीं थमे, उनका कहना था कि इसे पूरा तरह से खत्म कर दिया जाए। ऐसा इसलिए क्योंकि इन लोगों का मानना है कि अगर ये कानून कभी भी पास होता है तो हांगकांग के लोगों पर चीन का कानून लागू हो जाएगा। जिसके बाद चीन मनमाने ढंग से लोगों को हिरासत में ले लेगा और उन्हें यात्नाएं देगा।

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