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मदद को भटकता पाकिस्तान

पाकिस्तान के सूचना मंत्री चौधरी फवाद हुसैन ने 9 अक्टूबर को कहा कि सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने पैसे देने के बदले अस्वीकार्य शर्त रखी थी। उन्होंने शर्त तो नहीं बताई। लेकिन अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का कहना है कि भले चौधरी फवाद हुसैन ने उन शर्तों को सार्वजनिक नहीं किया, लेकिन यह अबूझ भी नहीं है।

पिछले कुछ सालों से पाकिस्तान पर सऊदी अरब का दबाव है कि वो यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ लड़ाई में शामिल हो। यमन में पिछले तीन सालों से सऊदी, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात में साथ मिलकर लड़ रहे हैं, लेकिन कोई जीत नहीं मिली। सऊदी का मानना है कि इस लड़ाई में पाकिस्तान के शामिल होने से वो जीत लेगा और ईरान को अलग-थलग करने में आसानी होगी। दूसरी तरफ पाकिस्तान नहीं चाहता है कि वो भारत के बाद एक और देश से टकराए जिससे उसकी सीमा लगती है।

सऊदी पाकिस्तान का करीबी रहा है, लेकिन वो ईरान को भी नाराज नहीं करना चाहता है। चौधरी फवाद हुसैन ने सऊदी और यूएई की शर्तों पर एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में यह बात कही। उन्होंने कहा कि मुफ्त में कुछ भी नहीं मिलता है। उन्होंने कहा कि हर देश के अपने-अपने हित होते हैं। हालांकि चौधरी फवाद की टिप्पणी पर सऊदी और यूएई से कोई तत्काल प्रतिक्रिया नहीं आई। दरअसल, पाकिस्तान भारी आर्थिक संकट से गुजर रहा है। जिस कारण वह अपने मित्र देशों से आर्थिक मदद मांग रहा है। पर अभी तक उसे कहीं से ठोस मदद नहीं मिल पाया है।

9 अक्टूबर को पाकिस्तान ने जैसे ही अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से मदद मांगने का फैसला किया, वैसे ही उसकी मुद्रा रुपए में ऐतिहासिक गिरावट आई। एक डॉलर की तुलना में पाकिस्तानी रुपया 124 से 133 तक पहुंच गया। आईएमएम से पाकिस्तान को अगर मदद मिलती है तो उसे कड़े आर्थिक फैसले लेने होंगे।

आर्थिक मदद के लिए ही प्रधानमंत्री इमरान खान ने अपने वादे को तोड़ दिया था, क्योंकि उन्होंने वादा किया था कि वो पीएम बनने के बाद तीन महीने तक विदेश यात्रा नहीं करेंगे। मगर प्रधानमंत्री बने तीन महीना पूरा होने के पहले ही मदद के लिए इमरान को सऊदी अरब जाना पड़ा था। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को सऊदी से काफी उम्मीद थी। इसीलिए उन्होंने प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली विदेश यात्रा के लिए सऊदी अरब को चुना था।

अपने ही संकल्प को तोड़ने पर इमरान ने सऊदी अरब जाने पर कहा था कि वह किंग सलमान के आग्रह पर आए हैं और हर मुसलमान के लिए सऊदी जाना उसकी चाहत होती है। सऊदी और पाकिस्तान दशकों से करीब रहे हैं। दोनों देश मित्र भी हैं। इस कारण इमरान को वहां से कुछ मिलने की उम्मीद थी। सऊदी को रिझाने के लिए प्रधानमंत्री ने बहुत प्रयास भी किया।

इमरान ने इस दौरे पर कहा था कि पाकिस्तान सऊदी पर किसी बाहरी देश को आक्रमण नहीं करने देगा। इमरान के इस बयान से उसका पड़ोसी देश ईरान खुश नहीं हुआ होगा, क्योंकि ईरान और सऊदी अरब में शत्रुता चरम पर है। सऊदी के बाद इमरान खान संयुक्त अरब अमीरात पहुंचे थे। हालांकि इमरान का यह बयान सऊदी के लिए काफी साबित नहीं हुआ। तभी तो किंग ने मदद के बदले ऐसी शर्त रख दी पाकिस्तान उसे पूरा ही नहीं कर सकता।

पाकिस्तान के सूचना मंत्री चौधरी फवाद हुसैन

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