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फ्रांस : “तुर्की को ‘हथियार सामग्रियों’ की नियोजित निर्यात पर रोक लगा दी गई है”

सीरिया में कुर्द लड़ाकों के खिलाफ तुर्की के हमले को लेकर फ्रांस के बाद जर्मनी ने कदम उठाते हुए तुर्की को किए जाने वाले हथियारों के निर्यात पर रोक लगा दी है। यूरोप के कई शहरों में रैलियां कर प्रदर्शनकारियों ने तुर्की की एकतरफा कार्रवाई की निंदा की है। इससे पहले तुर्की के सैनिकों ने कुर्द लड़ाकों के खिलाफ गत बुधवार सीमा पार से हमले करने शुरू कर दिए थे। तुर्की इन लड़ाकों को आतंकवादियों के रूप में देखता है। माना जा रहा है कि यह रोक इस आशंका के बीच लगाई गई है कि इन हथियारों का प्रयोग सीरिया पर किए जा रहे हमलों में किया जा सकता था।

रक्षा एवं विदेश मंत्रालयों की ओर से जारी संयुक्त बयान में फ्रांस ने बताया कि उसने तुर्की को ‘हथियार सामग्रियों’ की नियोजित निर्यात पर रोक लगा दी है। जर्मनी तुर्की का मुख्य हथियार आपूर्तिकर्ता है। कई देशों ने तुर्की के हमले की निंदा की है और में फिनलैंड, नॉर्वे और नीदरलैंड पहले से ही तुर्की को हथियार निर्यात पर रोक लगाने की घोषणा कर चुके हैं। बीते बुधवार को तुर्की ने सीरियाई कुर्द सैन्य बल या पीपल्स प्रोटेक्शन यूनिट्स (वाईपीजी) के खिलाफ अभियान शुरू किया था। तुर्की ने इसका उद्देश्य कुर्दिश पीपुल्स प्रोटेक्शन यूनिट्स को अपनी सीमा से दूर रखने के लिए एक बफर जोन स्थापित करना बताया है। तुर्की कुर्द लड़ाकों को आतंकवादी मानता है।

हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अन्य पश्चिमी सहयोगियों ने तुर्की के इस कदम की कड़ी आलोचना की है, क्योंकि तुर्की ने वाईपीजी को हाल के वर्षों में आतंकवादी समूह इस्लामिक स्टेट से लड़ने में इस्तेमाल किया था। इसी बीच तुर्की ने 13 अक्टूबर (रविवार) को दावा किया कि उसकी सेना ने सीरिया के रास अल एन शहर के मध्य में नियंत्रण पा लिया है। तुर्की के सुरक्षा अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि सेना का शहर के मध्य में नियंत्रण है और स्थिति काबू में है। हालांकि कुर्द के नेतृत्व वाली सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेस (एसडीएफ) ने  12 अक्टूबर (शनिवार) को इस दावे का खंडन किया।

मीडिया (एसडीएफ) के अधिकारी मानवान क्वामशलो ने कहा कि तुर्की समर्थित सेनाओं ने औद्योगिक जिले रास अल एन में घुसने की कोशिश जरूर की लेकिन एसडीएफ की भारी गोलीबारी के कारण उन्हें पीछे हटने को मजबूर होना पड़ा। अब एसडीएफ ने हमला शुरू कर दिया है और बेहद ही भयंकर झड़पें शुरू हो चुकी हैं। औद्योगिक जिले में दोनों ओर से गोलीबारी जारी है। रास अल एन शहर तुर्की की सीमा के बेहद निकट है।
सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स ने गत शनिवार को कहा कि तुर्की के उत्तरी सीरिया में किए गए हमले के कारण 30 नागरिकों की मौत हुई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तरी सीरिया में अमेरिकी सैनिकों की वापसी के साथ ही तुर्की ने कुर्द लड़ाकों के खिलाफ जिस संघर्ष की शुरुआत की उसमें आम नागरिकों के अलावा दर्जनों कुर्द लड़ाके मारे गए हैं।
अब हालात ऐसे हो गए हैं कि पूरे मध्यपूर्व में शक्ति संतुलन बिगड़ सकता है। वहीं दूसरी तरफ अरब लीग सुरक्षा जनरल ने तुर्की को सीरिया पर हमले के लिए चेताया। लीग ने कहा कि सीरिया पर तुर्की का हमला अरब की धरती और संप्रभुता के खिलाफ है। वहीं ईरान का कहना है कि वह तुर्की और कुर्द के बीच सुलह कराने को तैयार है।
वहीं, इससे पहले तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन ने सीरिया में कुर्द आतंकियों के खिलाफ हो रही कार्रवाई को लेकर बड़ा बयान दिया था। उन्होंने  गत शुक्रवार को कहा था कि धमकियों के बाद भी तुर्की उत्तरी सीरिया में कुर्द आतंकियों के खिलाफ अपने अभियानों पर रोक नहीं लगाने वाला है। राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन ने कहा कि तुर्की द्वारा उत्तरी सीरिया में कुर्द आतंकवादियों के खिलाफ अपने अभियान को नहीं रोकेगा। उन्होंने इस बात को खारिज कर दिया कि यह कार्रवाई दूसरे देशों के लिए खतरा है।   

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इस्तांबुल में एर्दोगन ने कहा कि हम पीछे नहीं हटेंगे। हम इस लड़ाई को तब तक जारी रखेंगे जब तक कि सभी आतंकवादी हमारी सीमा से दक्षिण में 32 किलोमीटर की दूरी तक नहीं चले जाते हैं, जिस बात जिक्र खुद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने किया था।  उत्तरी सीरिया में तुर्की की कार्रवाई के बाद लगातार बढ़ रहे डर और तनाव के माहौल की वजह से बड़ी संख्या में लोग वहां से विस्थापित हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक करीब एक लाख लोग यहां से अपना घरबार छोड़कर जा चुके हैं।

इस क्षेत्र में तीन दिन पहले कुर्द लड़ाकों के खिलाफ शुरू हुए तुर्की के अभियान में करीब 11 नागरिकों और दर्जनों कुर्द लड़ाकों की मौत हो गई है। तुर्की ने यह कार्रवाई अमेरिका द्वारा अपनी सेना वहां से हटाने के विवादास्पद फैसले के तुरंत बाद की थी। साथ ही ट्रंप प्रशासन ने  भी तुर्की पर प्रतिबंध की धमकी दी है। वित्त मंत्री स्टीवन म्नुशिन ने कहा, राष्ट्रपति ट्रंप एक नए शासकीय आदेश पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। ताकि वित्त मंत्रालय को बेहद महत्वपूर्ण नए प्रतिबंध अधिकार मिल सकें और तुर्की सरकार से जुड़े किसी भी व्यक्ति को निशाना बनाया जा सके। उन्होंने कहा, ‘ये प्रतिबंध प्रत्यक्ष या परोक्ष दोनों होंगे।’ इस बाबत वित्तीय संस्थानों को आगाह किया जा चुका है।
कुर्द मध्य-पूर्व  का एक जातीय समूह हैं। यहाँ ज्यादातर कुर्द सुन्नी इस्लाम को मानने वाले है साथ ही इस समुदाय में कई और धर्मों के मानने वाले लोग भी शामिल हैं। कुर्द तुर्की के पहाड़ी इलाकों और सीमाई क्षेत्रों के साथ-साथ इराक, सीरिया, ईरान और अर्मेनिया में भी रहते हैं।
अब अनुमान लगाया जा रहा है कि इस क्षेत्र में इनकी आबादी लगभग साढ़े तीन करोड़ हो सकती है। इतनी जनसंख्या के बावजूद कुर्दों का कोई अलग एक देश नहीं है। कुर्द तुर्की में अपनी स्वायत्तता के लिए लड़ रहे हैं तो सीरिया और इराक में आईएसआईएस के खिलाफ जमीनी संघर्ष भी कर रहे हैं।

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