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जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या मामले में पूर्व अमेरिकी पुलिस अधिकारी को साढ़े तीन साल की सजा

अमेरिका में अफ्रीकी मूल के जॉर्ज फ्लॉयड की पीठ को घुटने से दबाने वाले मिनियापोलिस के पूर्व पुलिस अधिकारी जे एलेक्जेंडर क्वेंग को 9 दिसंबर को साढ़े तीन साल की जेल की सजा सुनाई गई। दरअसल,जे अलेक्जेंडर क्वेंग ने 25 मई 2020 को फ्लॉयड की पीठ को उस समय घुटने से दबाए रखा था,जब एक अन्य पुलिसकर्मी उनकी गर्दन पर अपना घुटना रखे हुए था। इस दौरान सांस लेने में तकलीफ़ होने और दम घुटने के कारण फ्लॉयड की मौत हो गई थी। घटना का वीडियो सामने आने के बाद अमेरिका में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हुए थे। जे अलेक्जेंडर क्वेंग को अक्टूबर में सेकंड डिग्री हत्या के लिए उकसाने और उसमें सहयोग देने के लिए दोषी करार दिए गए थे ।

 

25 मई 2020 को पूर्व पुलिस अधिकारी डेरेक शॉविन ने फ्लॉयड की गर्दन को करीब 9 मिनट तक अपने घुटने से दबाए रखा था। जिसके उनकी मौत हो गई थी। इस मामले की सुनवाई के दौरान जे अलेक्जेंडर क्वेंग ने स्वीकार किया था कि उसने फ्लॉयड की पीठ को कसकर पकड़ रखा था और वह अपने अनुभव और पुलिस प्रशिक्षण की बदौलत जानता था कि हथकड़ी लगे व्यक्ति को इस स्थिति में पकड़े रहना उसके जीवन के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।बता दें कि अमेरिका में अश्वेत जॉर्ज फ्लॉयड की मौत की वजह से बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे। इसमें कई लोगों की मौत हो गई थी वहीं हज़ारों की संख्या में लोगों को गिरफ्तार किया गया था साथ ही अरबों डॉलर की संपत्ति को नुकसान हुआ था। यहां तक कि व्हाइट हाउस के बाहर भारी विरोध प्रदर्शन के कारण तत्कालीन राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप को बंकर में जाना पड़ा था।ज्ञात हो कि 25 मई 2020 को अश्वेत जॉर्ज फ्लॉयड को जब पुलिस ने पकड़ा और उनके गर्दन को घुटनों से दबाए रखा तो उन्होंने सांस लेने में परेशानी की बात कही थी,लेकिन अमेरीकी पुलिस ने उन्हें नहीं छोड़ा था। जिसके बाद दम घुटने से पुलिस हिरासत में उनकी मौत हो गई थी। बाद में यह वीडियो पूरे अमेरिका में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इसके बाद पूरे अमेरिका में भारी प्रदर्शन शुरू हो गए थे।एक बच्ची के पिता 46 वर्षीय अश्वेत नागरिक जॉर्ज फ्लॉयड अफ्रीकी अमेरिकी समुदाय के थे। उनका जन्म नॉर्थ कैरोलिना में हुआ था और वे टेक्सास के ह्यूस्टन में रहते थे।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक,वह काम खोजने के लिए कई साल पहले मिनियापोलिस चले गए थे। जॉर्ज मिनियापोलिस के एक रेस्टोरेंट में सुरक्षा गार्ड का काम करते थे और उसी रेस्टोरेंट के मालिक के घर में किराए पर पिछले 5 साल से रहते थे। इस घटना के बाद विरोध प्रदर्शन पूरे अमेरिका में फैल गया था। वाशिंगटन डीसी, अटलांटा, फिनिक्स, डेनवर और लॉस एंजिलिस समेत 140 शहरों में ये प्रदर्शन फैल गया था। कई अन्य मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका वॉशिंगटन में व्हाइट हाउस के बाहर सैकड़ों लोग प्रदर्शन करने लगे तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक बंकर में जाना पड़ा था।

इतना ही नहीं मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा कि नक्सलवाद हमारे देश की आत्मा पर एक दाग है। अश्वेत अमेरिकियों को जॉर्ज फ्लॉयड जैसा दर्द हर रोज सहना पड़ता है,इसलिए हम यहां रुकेंगे नहीं, हमें इस दिशा में काफी कुछ करना बाकी है। अमेरिका में नस्लवाद एक पुरानी समस्या है। इसको लेकर कांट ब्रीद जैसा प्रदर्शन 1960 के दशक में मार्टिन लूथर किंग के नेतृत्व में हुआ था।अमेरिका में नस्लवाद को लेकर हिंसा के बारे में द इकोनॉमिस्ट लिखता है कि अमेरिका में प्रत्येक साल पुलिस की गोली से लगभग 1000 लोग मारे जाते हैं। पुलिस के हाथों मारे जाने वाले लोगों में श्वेतों की तुलना में तीन गुना अधिक अश्वेत अमेरिकी होते हैं। युवा अश्वेतों की मौत का छठवां प्रमुख कारण पुलिस हिंसा है। अश्वेतों को सजा मिलने की संभावना भी अधिक रहती है। एक ही अपराध के लिए उन्हें श्वेतों के मुकाबले सज़ा भी ज्यादा मिलती है। जेलों में 33 फीसदी कैदी अश्वेत हैं। सजायाफ्ता लोगों में वयस्कों की आजादी के 13 फीसदी अश्वेत शामिल हैं।

 

 

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