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UN सुरक्षा परिषद में आतंकवाद पर जम कर बरसे विदेश मंत्री

दुनिया भर के अधिकतर देश बढ़ते आतंकवाद से जूझ रहे हैं। सुरक्षा परिषद की एक अहम बैठक में सदस्य देशों को आगाह करते हुए कहा गया है कि आतंकवाद से उपजे खतरे नए क्षेत्रों में बढ़ते जा रहे है। जिससे लाखों-करोड़ों लोगों की ज़िंदगियों पर असर हो रहा है। सुरक्षा परिषद के इसी बैठक में भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी शामिल हुए। विदेश मंत्री संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की मौजूदा अध्यक्षता के तहत होने वाले आतंकवाद-विरोधी और सुधारित बहुपक्षवाद पर दो हस्ताक्षर कार्यक्रमों की अध्यक्षता करने के लिए यहां पहुंचे।

इसी बैठक के दौरान विदेश मंत्री एस.जयशंकर आतंकवाद और इससे जुड़े संगठनों पर जम के बरसे हैं। उन्होंने ऐसे देशो को चेतावनी दी है जो आतंकवाद को पनाह दे रहे हैं। इन्होने विश्व भर के देशों को एक साथ आतंकवाद के खिलाफ लड़ने को कहा है। इनके कहने अनुसार भारत हमेशा आतंकवाद के खिलाफ अपनी आवाज उठाता रहेगा, आतंकवाद का खतरा एक गंभीर विषय है जिससे हमें मिलकर लड़ना चाहिए। अल-कायदा, दाएश, बोको हराम और अल शबाब जैसे आतंकवाद संगठन फल-फूल रहे हैं। इसलिए इसे खत्म करने के लिए दुनिया भर के देशों को एक साथ आना होगा। दक्षिण एशिया में आज भी आतंकवाद का नेटवर्क मजबूत है। गौरतलब है कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान में मौजूदा समय में कई आतंकी हमले हुए है। जिसका आरोप -प्रत्यारोप ये दोनों एक दूसरे पर लगाते आए हैं। विदेश मंत्री के मुताबिक कितना भी कोशिश कर लें लेकिन जब तक आतंकवाद के ठिकानों को खत्म नहीं किया जाएगा तब तक ये ऐसे ही मजबूत बने रहेंगे। इसी तर्ज पर विदेश ने कहा कि कुछ देश अपने आप को हर चीज में सक्षम बताते हैं लेकिन आतंकवाद की बात आने पर बहुत ही असहाय दिखने लगते हैं। जो कि हास्यास्पद सा लगता है।  इसलिए आतंकवाद से मुकाबला करने के लिए जवाबदेही तय करनी चाहिए।

विदेश मंत्री ने सुरक्षा परिषद में आतंकवाद के प्रभाव से जूझ रहे लोगों की ओर इशारा करते हुए कहा है कि 26/11 के मुंबई हमलों सहित कई आतंकवादी घटनाओं के पीड़ितों को न्याय मिलना बाकी है। हम फिर से “न्यूयॉर्क का 9/11” या “मुंबई का 26/11” नहीं होने दे सकते। सुरक्षा परिषद में वर्षों के प्रयासों में भारत सबसे आगे रहा है। जय शंकर ने ट्वीट कर कहा है कि सुरक्षा परिषद में सुधार की बढ़ती इच्छा को उजागर करने के लिए महासचिव का धन्यवाद। गौरतलब है कि भारत का 15 देशों की सदस्यता वाली सुरक्षा परिषद में दो साल का कार्यकाल इसी महीने खत्म हो रहा है।

 

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