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अपने षड्यंत्र में बेनकाब पाक

कहते हैं कि ‘एक तो चोरी और ऊपर से सीना जोरी’। भारतीय नौसेना अधिकारी कुलभूषण जाधव के मामले में पाकिस्तान का यही रवैया रहा। लेकिन झूठ के पैर नहीं होते और वह ज्यादा समय तक अपने कुतर्कों पर टिका नहीं रह सकता। अंतरराष्ट्रीय अदालत (आईसीजे) में पाक को अपने झूठ की वजह से मुंह की खानी पड़ी है। नीरदरलैंड के हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय अदालत ने कुलभूषण जाधव के मामले में पाकिस्तान की दलीलों को खारिज करते हुए जाधव की फांसी की सजा पर रोक लगा दी है। अदालत ने पाकिस्तान को यह भी कहा है कि जाधव की सजा पर पुनर्विचार करना होगा और उन्हें राजनायिक मदद भी देनी होगी।

आईसीजे के जज अब्दुलकावी अहमद युसूफ की अगुवाई वाली 16 सदस्यीय पीठ ने 15 -1 के बहुमत से फैसला सुनाया। सुनवाई के दौरान भारत की दलीलों के आगे पाकिस्तान की एक न चली। इस दौरान पाकिस्तान ने कई बार झूठ का सहारा लिया। लेकिन समय के साथ उसके झूठ के पुलिंदे की परतें खुलती गई।

कुलभूषण ने वर्ष 1987 में नेशनल डिफेंस एकेडमी ज्वाइन की थी। और वर्ष 1991 में भारतीय नौसेना में शामिल हुए थे। साल 2013 में ‘रा’ के लिए काम करना शुरू किया था। तीन मार्च 2016 को पाकिस्तान ने भारतीय नौसेना के इन पूर्व अधिकारी को ईरान से अगवा कर लिया था। 24 मार्च को पाक की सुरक्षा एजेंसियों ने दावा किया कि भारतीय जासूस जाधव को दक्षिणी ब्लूचिस्तान से गिरफ्तार किया गया है। भारत ने पाक के दावे को सिरे से खारिज कर दिया था। भारत ने कहा था कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि ईरान में कारगो कारोबार का मालिकाना हक रखने वाले भारतीय नौसेना के सेवानिवृत्त अधिकारी जाधव को ब्लूचिस्तान में गिरफ्तार किया गया था। लेकिन पाक जाधव के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई को आमादा था। लिहाजा पाक की सैन्य अदालत में उन पर जासूसी का आरोप लगाते हुए मामला चलाया गया और फांसी की सजा भी सुना दी गई।

जब यह मामला अंतरराष्ट्रीय अदालत में पहुंचा तो आईसीजे ने जाधव की फांसी पर रोक लगा दी। इस पर 29 मई 2017 को पाकिस्तान ने दावा किया कि उसके पास जाधव के खिलाफ नए सबूत हैं। पाक विदेश कार्यालय ने कहा कि जाधव ने पाकिस्तान में आतंकवादी हमलों से संबंधित खुफिया जानकारी का आदान -प्रदान किया है। हालांकि यह भी पाकिस्तान के झूठ के पुलिंदे का एक और झूठ ही निकला। पाकिस्तान यह कभी साबित नहीं कर पाया कि जाधव ने ऐसी कोई जानकारी कहीं पहुंचाई थी।

पाक सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल गफूर का यह दावा भी झूठा निकला कि 22 जून 2017 को कुलभूषण जाधव ने पाक सैन्य प्रमुख के समक्ष दया याचिका दायर की थी। जिसमें उन्होंने स्वीकार किया है कि वह ब्लूचिस्तान में विध्वंसक गतिविधियों में शामिल थे। पाकिस्तान न तो कभी यह साबित कर पाया कि जाधव का ऐसी किसी घटना से संबंध था और न ही दया याचिका किसी के सामने आई।

हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय अदालत में मजबूती से अपना पक्ष रखते हुए भारत ने कहा कि यह एक दुर्भाग्यपूर्ण मामला है, जिसमें एक निर्दोष की जान खतरे में है। आईसीजे में मामले की सुनवाई 15 जुलाई से ही शुरू हुई थी। भारत यह उम्मीद कर रहा था कि आईसीजे पाकिस्तान को वियना संधि के उल्लंघन का दोषी करार देगा और हुआ भी ऐसा ही। खास बात है कि इस मामले में ऐसे समय पर फैसला आया है जब हाल में ही वाघा बार्डर पर भारत और पाकिस्तान के अधिकारियों के बीच करतारपुर कारिडोर पर बातचीत हुई है।

आईसीजे के फैसले के मद्देनजर पाकिस्तान के अटार्नी जनरल अनवर मंसूर खान और विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद फैसल हेग गए थे। दिलचस्प यह है कि आईसीजे में मुंह की खाने के बाद भी पाक फैसले को अपने पक्ष में बता रहा है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने कुलभूषण जाधव मामले में आईसीजे के फैसले की सराहना की है। इमरान खान ने ट्वीट कर कहा, हम कमांडर कुलभूषण जाधव को बरी और रिहा नहीं करने व भारत वापस नहीं भेजने के आईसीजे के फैसले की सराहना करते हैं। वो पाकिस्तान के लोगों के खिलाफ किए गए अपराध के लिए दोषी हैं। पाक मामले में कानून के मुताबिक आगे बढ़ेगा।

इधर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत पूरे देश ने कुलभूषण जाधव मामले में बुधवार 18 जुलाई को आए आईसीजे के फैसले का स्वागत किया है। कुलभूषण पर आईसीजे के फैसले को भारत की बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि आईसीजे ने अपने आदेश में पाकिस्तान को जाधव को फांसी नहीं देने का निर्देश देते हुए सैन्य अदालत के सुनाए गए फैसले पर दोबारा विचार करने के लिए कहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, हम आईसीजे के आदेश का स्वागत करते हैं, सत्य और न्याय की जीत हुई है। हमारी सरकार हर भारतीय की सुरक्षा और कल्याण के लिए हमेशा काम करेगी।

भारत पाकिस्तान के इस दावे को खारिज करता रहा है कि जाधव को 3 मार्च 2016 को ब्लूचिस्तान प्रांत से गिरफ्तार किया गया था। भारत का दावा है कि जाधव को ईरान से अगवा किया गया था, जहां उनका निजी व्यापार था। भारत ने इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में यह दलील दी कि जाधव को कान्सुलर एक्सेस यानी भारतीय दूतावास के अधिकारियों से बात करने का हक न देकर पाकिस्तान ने विएना संधि का उल्लंघन किया है। पाकिस्तान का कहना है कि जासूसी के मामले में दोषी को कान्सुलर एक्सेस नहीं दिया जा सकता।

ऐसे में भारत ने अंतरराष्ट्रीय अदालत में अपील करते हुए कहा कि जाधव की मौत की सजा रद्द की जाए और उन्हें तुरंत रिहा किया जाए। भारत का कहना है कि जाधव की सुनवाई में तय प्रक्रिया के न्यूनतम मानकों का भी पालन नहीं किया गया। सुनवाई के दौरान भारतीय वकील हरीश साल्वे ने कहा कि पाकिस्तान के पास जाधव को दोषी ठहराने के लिए उनके जबरन इकबालिया बयान के अलावा कोई और सबूत नहीं है। साथ ही साल्वे ने ये भी कहा कि पाकिस्तान अपनी अंतरराष्ट्रीय जांच से ध्यान भटकाने के लिए कुलभूषण जाधव को मोहरे की तरह इस्तेमाल कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में सुनवाई को बेपटरी करने की नाकाम कोशिशें भी कर चुका है। साल्वे ने पाकिस्तानी सैन्य अदालत का जिक्र करते हुए कहा कि कोई देश अपने यहां के कानून का हवाला देकर अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन नहीं कर सकता है।

दिसंबर 2017 में जाधव की मां और पत्नी उनसे मिलने पाकिस्तान गई थीं। इसके बाद भारत ने कहा था कि इस पूरी प्रक्रिया में कोई विश्वसनीयता नहीं थी, और इस मुलाकात का माहौल ‘धमकी भरा’ था। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा था कि जाधव की मां और पत्नी से जबरदस्ती कपड़े बदलवाए गए, उन्हें मातृभाषा में बात करने की इजाजत नहीं दी गई और उनकी पत्नी के जूते भी नहीं लौटाए गए।

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