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क्वाड के खिलाफ कवायद

चीन और रूस ने जो नया मंच बनाया है उसे क्वाड का जवाब माना जा रहा है

दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका के खिलाफ एकजुट तो दो बड़े देश हो रहे हैं। संकट लेकिन भारत का बढ़ रहा है। दरअसल, चीन और रूस ने अपनी क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर एक नया मंच बनाया है। जिसे क्षेत्रीय सुरक्षा संवाद मंच कहा गया है। इस क्षेत्रीय मंच को ‘क्वाड’ का जवाब माना जा रहा है। क्वाड यानी द क्वाड्रिलैटरल सिक्योरिटी डायलाॅग, वही क्वाड जिसमें भारत भी शामिल है। एक महीने पहले ही क्वाड की वर्चुअल मीटिंग हुई थी। ये आस्ट्रेलिया, भारत, जापान और अमेरिका के बीच अनौपचारिक वार्ता समूह है। 2007 में जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने इसे शुरू किया था जिसे भारत, आस्ट्रेलिया और अमेरिका ने भी समर्थन दिया। माना जा रहा है कि क्वाड के बनाने के पीछे बड़ी वजह है चीन के बढ़ते प्रभाव को कम करना। अमेरिका चीन को बढ़ती चुनौती के तौर पर देख रहा है। चीन और अमेरिका के रिश्तों में पिछले काफी समय से खटास आई हुई है। अमेरिका ने चीन को उनकी गलत नीतियों को लेकर कई बार चेताया भी है।

दूसरी तरफ जापान और आस्ट्रेलिया का भी दक्षिण चीन सागर में चीन के साथ टकराव है। भारत और चीन के बीच सीमा विवाद काफी पुराना है। इसलिए इस क्वाड सिक्योरिटी डाॅयलाग के जरिये चारों सदस्य देश यानी भारत, अमेरिका, जापान और आस्ट्रेलिया एक मंच पर साथ आए हैं। क्वाड को लेकर रुस और चीन अपनी आपत्ति जाहिर कर चुके हंै। चीन के उप-विदेश मंत्री लूओ जाझो क्वाड को चीन विरोधी फ्रंटलाइन कह चुके हंै, वहीं रूस ने भी क्वाड को लेकर अपनी क्षेत्रीय आशंका जाहिर की है। उसने क्वाड समझौते को लेकर बैका समझौते पर भी चिंता जताई है। बैका यानी बेसिक एक्सचेंज ऐंड काॅपरेशन एग्रीमेंट, इसके तहत भारत और अमेरिका एक दूसरे के साथ रक्षा से लेकर साजो समान साझा करेंगे।

चीन के खिलाफ इस लामबंदी के चलते अब रूस और चीन सक्रिय हो चले हैं। रूसी राष्ट्रपति पुतिन को अपना सबसे अच्छा दोस्त कहने वाले चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग लंबे अर्से से एंटी अमेरिकी फ्रंट बनाने पर जोर देते आए हैं। अब क्वाड से मिली चुनौती ने क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए एक अलग मंच के विचार को जन्म दे दिया है। कभी एक-दूसरे के विरोधी रहे रूस और चीन इन दिनों खासे नजदीक हो चले हैं। अमेरिकी द्वारा इन दोनों देशों के ऊपर लगाए गए प्रतिबंधों के बाद इन दोनों देशों के बीच मित्रता प्रगाढ़ हुई है। इस समय दोनों देश पश्चिम विरोधी एजेंडे पर चल रहे हैं। रूस अमेरिका पर तब ज्यादा सख्त हुआ, जब व्लादिमीर पुतिन के विरोधी एलेक्स नवालनी को जेल में जाना पड़ा। उस दौरान अमेरिका ने रूस की कड़ी निंदा की थी।

जानकारों का मानना है कि भारत क्वाड में शामिल नहीं होना चाहता था, लेकिन बाद में इसका हिस्सा बन गया। चीन पहले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर परेशान था, अब अमेरिका के नए राष्ट्रपति जो बाइडन की सख्त नीतियों को लेकर चिंतित है। इसी को मद्देनजर रखते हुए और अपनी क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए चीन और रूस एक साथ आए और एक नए मंच को जन्म दिया।

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