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क्या हांगकांग में थियानमेन स्क्वायर नरसंहार दोहरायेगा चीन?

हांगकांग जोकि चीन का सेमी ऑटोनोमस टेरिटरी है मतलब हांगकांग पूरी तरह से चीन के अधिकार में नहीं है। वहां का अपना लोकतंत्र है, अपना झण्डा है और अपनी संसद है।
हाल ही में वहां आपराधिक कानून विधेयक 2019 को पारित करने के लिए लाया गया था जिसके अनुसार हांगकांग में शरण लेने या छुपने आये भगोड़ों को या अपराधियों को चीन अपने यहां ले जाकर सजा दे सकता है।
जिसका हांगकांग की जनता ने बड़े स्तर पर विरोध किया है, उनका कहना है कि चीन में कोई लोकतंत्र नहीं है न ही प्रेस की कोई स्वतंत्रता है।
ऐसे में वो इस कानून का गलत इस्तेमाल कर सकता है और हांगकांग के लोगों को  खासकर पत्रकार और बुद्धिजीवियों को जो यहां रहकर चीन की हित की बात करते हैं और चीन के तानाशाही रवैये का विरोध करते हैं। इस कानून के तहत चीन, हांगकांग पर अपना आधिपत्य जमाना चाहता है।
क्योंकि हांगकांग में यह विधयेक चीन के इशारे पर ही लाया गया है।

हांगकांग की जनता द्वारा इस मूवमेंट को ‘अम्ब्रेला मूवमेंट’ के नाम से 2014 में शुरू किया गया था। तब वहां की नागरिकों ने अपनी स्वायत्तता को मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। अब फिर वही मूवमेंट 2019 में एक व्यापक रूप लेकर सामने आ रहा है। लोग मानव चैन बना कर, रात में अपने मोबाइल की फ़्लैश लाइट जला कर, हाथों को लहर कर आदि शन्तिपूर्ण तरीके से चीन का विरोध  कर रहे हैं।
हांगकांग को सड़कों पर लगभग 10 लाख नागरिकों का जमावड़ा होता है जिसमें अधिकतर विश्वविद्यालयों के छात्र होते हैं।
उनका कहना है कि चीन अपने उस संधि को ठुकरा रहा है जिसमें उसने यह कहा था कि वो 2047 तक हांगकांग की स्वायत्तता पर कोई हस्तक्षेप नहीं करेगा।
इस मामले को तूल पकड़ने के बाद हांगकांग की चीफ एग्जीक्यूटिव यानी वहां की हेड कैरी लेम ने विधेयक को पारित नहीं किया। पर वहां की जनता कैरी लेम पर चीन की कठपुतली होने का आरोप लगाती रहती है और अब वो अपने प्रदर्शन में कैरी लेम के इस्तीफे को मांग कर रहे हैं। उनकी मांग है कि इस कानून को पूरी तरह वापस ले लिया जाए।
बात अगर थियानमेन स्क्वायर के नरसंहार की करें तो यह जगह चीन में  हैं। जहां 15 अप्रैल 1989 को वहां के विश्वविद्यालयों के छात्रों द्वारा चीन में लोकतंत्र को बचाने के लिए प्रदर्शन किया था। पर चीन ने अपनी पीओपल्स लिब्रेशन आर्मी की मदद से उन प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलवा  दी थी जिसमें हजारों लोगों की जान चली गयी थी।
हालांकि चीन ने बाद में इस बात को नकारते हुए कहा कि ऐसा कोई प्रदर्शन हुआ ही नहीं था।
लेकिन उस वक्त की तसवीरें आज भी उस लोकतंत्र की हत्या की कहानी को बयां करती हैं।
चीन का यही वो खेल है, जो हांगकांग में प्रदर्शन कर रहे लोगों को चीन के खिलाफ बोलने के लिए खड़ा करता है।
उनका मानना है कि चीन कभी भी अभिव्यक्ति की आज़ादी को बढ़ावा नहीं देता और कब कैरी लेम, हांगकांग को धोखा देकर चीन की मदद मांग ले , इसका कोई भरोसा नहीं।
लेकिन हम तैयार हैं, अपने लिए, अपने हांगकांग के लिए।

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