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ब्राजील के लोगों की मांग,राष्ट्रपति पर चलाया जाए ‘महाभियोग’

ब्राजील देश के राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो के विरोध में लाखों लोगों लोग ब्राजील के सड़कों पर उतर चुकें हैं और एक सुर में यह मांग कर रहे हैं कि वर्तमान सरकार बोल्सोनारो पर महाभियोग चला कर उन्हें राष्ट्रपति पद से हटाने की प्रक्रिया पूरी की जाए।
दरअसल राष्ट्रपति बोल्सोनारो पर यह आरोप है कि उन्होंने कोविड-19 के इस महामारी के बीच देश में कोविड-19 से सम्बंधित किसी भी नियम का पालन ठीक से नहीं करवाया। लोगों का मानना है कि इसी वजह से आज ब्राजील में लगभग 2,15,000 लोग कोरोना संक्रमित हैं। इस आकड़े के साथ ब्राजील विश्व का दूसरा सबसे अधिक संख्या में कोरोना से संक्रमित देश बन चुका है।

राष्ट्रपति के विरोध में सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि यदि सही समय पर बोल्सोनारो ने कोरोना से लड़ने के लिए लॉक डाउन, मास्क आदि नियमों को लागू किया होता तो आज यह नौबत नहीं आती।
ब्राजील की रहने वाली गैबरीला लोट्टा जो कि देश की जन नीतियों की विशेषज्ञ भी हैं उनका इस पूरे मामले में कहना है कि, ‘आज देश तीन बड़ी समस्याओं से जूझ रहा है एक है कोरोना से बढ़ती मौत की संख्या के चलते स्वास्थ समस्या ,दूसरा देश में चल रहा पोलिटिकल क्राइसिस जिससे कई जन नीतियां प्रभावित हुईं हैं और तीसरा देश की जीडीपी में लगातार गिराव जिससे देश के सामने अर्थव्यवस्था को बनाये रखने की चुनौती से झूझना पड़ रहा है।’
उन्होंने आगे कहा है कि यही कारण है कि राष्ट्रपति  बोल्सोनारो ने जनता से जो वादा किया था कि वे इस भयंकर बीमारी से लड़ने के लिए अपने देश के नागरिकों को आर्थिक सहायता देंगे वह वादा पूरा नहीं कर पाए। अनगिनत लोगों के पैसे लंबित पड़े हैं। जिसकी वजह से भी राष्ट्रपति बोल्सनारो को लोगों का विरोध झेलना पड़ रहा है।

ब्राजील के इस राजनीतिक उथल-पुथल में ट्रम्प की भागीदारी भी ,जानें कैसे ? 

 

गैबरीला एक अहम बात भी इस बीच एक मीडिया संस्थान को पैनल डिस्कशन के दौरान बताती हैं। वो कहती हैं कि यह कहना गलत होगा कि सिर्फ कोरोना काल में लापरवाही  की वजह से ही नहीं यह विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। दरअसल इसके पीछे के किस्से में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प  की अहम भागीदारी हैं।
क्योंकि वर्ष 2019 में जब जेयर बोल्सनारो सत्ता में आये थे उसके प्रथम कार्यकाल में उन्होंने अपनी सरकार के माध्यम से नागरिकों के बीच यह माहौल बनाया कि वे अमेरिका के राष्ट्रपति के बेहद करीबी हैं।
उन्होंने ट्रम्प की तरह ही कोविड-19 की सिचुएशन को डील किया। बोल्सनारो ने पहले-पहल कोविड-19 को गंभीरता से नहीं लिया क्योंकि जिस दौरान विश्व की विभिन्न देशों ने लॉक डाउन लगाया था उस दौरान ब्राजील के राष्ट्रपति ने न तो देश में लॉक डाउन लगाया न ही कोविड-19 के नियमों का सख्ती से पालन कराया।

अगर ट्रम्प अमेरिका के लिए सही नहीं  हैं तो बोल्सोनारो भी ब्राजील के लिए सही नहीं हैं

गैबरीला कहती हैं कि राष्ट्रपति बोल्सोनारो को लगता था कि वो जैसा कर रहे हैं वैसा ही तो ट्रम्प भी कर रहे हैं और इसीलिए यह सही है। लेकिन जब अमेरिका में ट्रम्प की सरकार चली गयी तो उसी के साथ ब्राजील के लोगों का अपने राष्ट्रपति बोल्सोनारो से भी विश्वास उठता गया। वो मानने लगे कि अगर ट्रम्प अमेरिका के लिए सही नहीं  हैं तो बोल्सोनारो भी ब्राजील के लिए सही नहीं हैं।
इन सबके बीच जो सबसे अहम बात रही वह यह कि ब्राजील में राष्ट्रपति चुनाव के दौरान जिस राजनीतिक पार्टी का समर्थन बोल्सोनारो को मिला था आज वही पार्टी बोल्सोनारो का विरोध भी कर रही है और अन्य जनता की तरह बोल्सोनारो पर महाभियोग का समर्थन करती नजर आ रही है। उस राजनीतिक पार्टी का नाम है सोशल लिबरल पार्टी ,जिसके समर्थकों को कंजर्वेटिव ग्रुप भी कहा जाता है। वर्ष 2016 में बोल्सोनारो ने सोशल क्रिस्चियन पार्टी को ज्वाइन करके ब्राजील की मुख्य राजनीति में कदम रखा था उसके बाद उन्होंने वर्ष 2018 में यह पार्टी छोड़कर ‘सोशल लिबरल पार्टी’ ज्वाइन कर ली थी।

एक समय जिनका मिला था सर्मथन, वही कर रहे हैं विरोध  

वर्ष 2018 में ब्राजील के राष्ट्रपति पद के लिए हुए चुनाव में इसी पार्टी ने बोल्सोनारो को अपना भरपूर समर्थन दिया था जिसके बाद वे राष्ट्रपति पद पर आसीन हुए थे। लेकिन अब जब देश कोविड-19 से जूझ रहा है और इस  दौरान देश में हुए स्वास्थ्य गड़बड़ियों के लिए राष्ट्रपति बोल्सोनारो पर आरोप लगाए जा रहे हैं तो कन्जर्वेटिव ग्रुप के लोग भी प्रदर्शनों में प्रतिभाग कर रहे हैं।
आपको बता दें कि ब्राजील की कांग्रेस में राजनीतिक दलों की श्रेणी में ऊपर, वर्कर्स पार्टी (पीटी), ब्राजीलियन डेमोक्रेटिक मूवमेंट (एमडीबी), सोशल लिबरल पार्टी (पीएसएल) और डेमोक्रेट (डीईएम) एक साथ सीनेट में पूर्ण बहुमत की सीटों को नियंत्रित करते हैं। 
ब्राजील जो कि इस वक़्त कोरोना संकट से जूझ रहा है वहां लोग यह कह रहे हैं कि यहां ऐसा माहौल बन चुका है जैसे कोई सरकार ही नहीं है।  न तो अस्पतालों में कोरोना संक्रमित लोगों के लिए पर्याप्त बेड न ही संक्रमित लोगों के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन सिलिंडर्स। ऐसे में राष्ट्रपति का देश भर में जगह-जगह आक्रोशित लोगों द्वारा विरोध किया जा रहा है। अब सवाल यह उठता है कि राष्ट्रपति बोल्सोनारो महाभियोग से बचने के लिए क्या कदम उठाएंगे ?

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