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आसमान छूने को तैयार कच्चे तेल के दाम, महंगाई की आशंका से थर्राया विश्व बाजार 

देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें एक बार फिर सारे रिकॉर्ड तोड़ सकती हैं। दरअसल, इन दिनों पूरी दुनिया में कच्चे तेल की मांग बढ़ रही है और आपूर्ति में गिरावट देखने को मिल रही है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमत में लगातार इजाफा हो रहा है। आए दिन अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुसार तेलों के दाम बढ़ते-घटते हैं।जानकारों के मुताबिक घरेलू बाजार में पेट्रोल के दाम अगले एक से दो हफ्ते में तेजी से बढ़ सकते हैं।

दरअसल विश्व के बाजार में बीते 5 दिन में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रहीं हैं। सोमवार, 27 सितंबर को कच्चे तेल की कीमतें (brent ब्रेंट) साल 2018 के बाद अपने शीर्ष पर पहुंच गई। सोमवार को इंटरनेशनल मार्केट में कच्चा तेल 80 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।

कोरोना संकट के बाद अब जिंदगी जैसे-जैसे पटरी पर लौट रही है, पेट्रोल-डीजल की डिमांड बढ़ रही है। मार्केट एक्सपर्ट के अनुसार अभी कच्चे तेल का उत्पादन उस तेजी से नहीं बढ़ पाया है।  इससे मांग और आपूर्ति में बड़ा अंतर आ गया है, जिसके कारण ईंधन के दामों में भारी तेजी आ रही है।

पूरी दुनिया में बढ़ रहे कच्चे तेल के दाम

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक लंदन में कच्चे तेल की कीमत 0900 घंटे (जीएमटी) पर 79.24 अमेरिकी डॉलर थी और यह पिछले दिन की तुलना में करीब 1.5 फीसदी ज्यादा थी। कच्चे तेल में पिछले तीन हफ्ते से लगातार तेजी जारी है। अमेरिका में भी कच्चे तेल का भाव पूर्व में 1.5 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 75.05 डॉलर पर पहुंच गया। यह इस साल जुलाई के बाद का सबसे ऊंचा रेट है।

वहीं, गोल्डमैन सैक्स एजेंसी के मुताबिक, 2021 के अंत तक ब्रेंट की कीमत 90 डॉलर तक पहुंच सकती है। पिछले कुछ सालों में लोगों की आवाजाही बढ़ी है। इस वजह से तेल की मांग भी बढ़ रही है। अमेरिका में आए तूफान ऐडा की तबाही का भी तेल आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ा है। गोल्डमैन ने अपने अनुमान में कहा है कि मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर उम्मीद से कहीं ज्यादा बढ़ गया है।

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ओपेक का प्रोडक्शन बढ़ाने से इंकार

तेल उत्पादन करने वाले देशों का संगठन ओपेक ने मौजूदा जरुरत के हिसाब से तेल उत्पादन करने से मना कर दिया है। ओपेक के  मुताबिक मौजूदा समय कच्चे तेल की सप्लाई बढ़ा लेना, उसके कैपेसिटी से बाहर है। ओपेक का कहना है कि तेल के कुएं या सप्लाई के इंफ्रास्ट्रक्चर में इंवेस्ट कम हो गया है और इंफ्रा का मेंटेनेंस बेहद धीमी गति से चल रहा है। ऐसे में सप्लाई बढ़ाने की संभावना कम है। मेक्सिको की खाड़ी में भी तेज हलचल है, जिस वजह से तेल की सप्लाई में मुश्किलें  आ रही हैं।

भारत ने बढ़ाया तेल का आयात

अगस्त में पिछले तीन महीनों में भारत के तेल आयात में सबसे अधिक वृद्धि हुई है। जुलाई के बाद से आयात में भारी उछाल देखा गया है, तेल की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए रिफाइनर भारी मात्रा में तेल जुटा रहे हैं। इसलिए बड़ी मात्रा में तेल का आयात किया गया है। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत बढ़ती है तो भारतीय रिफाइनर भी उसी दर पर तेल की आपूर्ति करेंगे। साथ ही यह स्टॉक भी कुछ दिनों के लिए भर जाएगा, भारत के पास अंतरराष्ट्रीय बाजार से बढ़ी हुई कीमत पर तेल आयात करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा। हालांकि केंद्र सरकार लगातार इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को प्रोत्साहन दे रही है। इसके लिए सरकार सब्सिडी भी दे रही है। हालांकि भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल न के बराबर है, इसलिए इसका ज्यादा असर नहीं होने वाला है। आपको तेल की बढ़ी हुई कीमतों के लिए भुगतान करने के लिए तैयार रहना होगा।

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