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कोरोना वायरस सेहत ही नहीं वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी कर दिया है बेहाल

कोरोना वायरस सेहत ही नहीं वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी कर दिया है बेहाल

यह दुनिया केवल इंटरनेट के माध्यम से ही नहीं, बल्कि अपने बाजारों के माध्यम से भी जुड़ी हुई है। वैश्विक बाजार चीन के साथ एक श्रृंखला में काम करता है जो आर्थिक श्रृंखला का दूसरा सबसे बड़ा ब्लॉक है। वर्तमान में चीन अपने प्रमुख प्रांत, हुबेई प्रांत में कोरोना वायरस के प्रकोप को रोकने के लिए एक बड़े पैमाने पर अपने बाजार के कुछ भागों में तालाबंदी कर रहा है। चीन के हुबेई की राजधानी वुहान को ट्रांसपोर्ट हब के नाम से जाना जाता है, जहां से चीन अन्य देशों से अपना कारोबार करता है। फिलहाल यहां सभी स्टेशनों को अगले आदेश तक बंद कर दिया गया है।

एशियन डेवलपमेंट बैंक के अनुसार, अतीत में सेवर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (एसएआरएस) के प्रकोप से चीन की इकानमी में करीब 18 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ था। अब यह माना जा रहा है कि कोरोना वायरस के प्रभाव से वैश्विक स्तर पर इकॉनमी को और भी भारी नुकसान झेलना होगा। चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। चीन की अर्थव्यवस्था में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर में कोई भी उतार-चढ़ाव वैश्विक मंदी को प्रभावित करने के लिए काफी है। इधर जीडीपी वृद्धि दर को बदलने के लिए भारत का संघर्ष पहले से ही एक वैश्विक चिंता है। कोरोना वायरस के प्रकोप ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर नजर रखने वालों और प्रबंधकों के सिरदर्द को और बढ़ा दिया है।

कुछ पर्यवेक्षकों ने पहले भी विश्व अर्थव्यवस्था पर पिछली महामारियों के प्रभाव का हवाला दिया था। सन् 2002-03 में एसएआरएस (सेवर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम) ने चीन की इकानमी को झकझोर कर रख दिया था। जिसमें वर्तमान वुहान वायरस की तुलना में अधिक घातक दर थी। एक रिपोर्ट के अनुसार, एसएआरएस के प्रकोप ने चीन की जीडीपी के विकास दर को 1.1 से 2.6 प्रतिशत तक प्रभावित किया था। इस लिहाज से कोरोना वायरस का प्रकोप वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है।

स्टॉक एक्सचेंजों में कोरोना वायरस के प्रकोप का प्रभाव दुनिया भर में पहले से ही महसूस किया जा रहा है। जापान, अमेरिका और यूरोप के स्टॉक एक्सचेंज भारत में बीएसई सेंसेक्स 2 फरवरी को 1 प्रतिशत से अधिक गिर गया और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया तीन सप्ताह के निचले स्तर पर आ गया। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 70 लाख से अधिक लोगों ने विदेश यात्रा की योजना बनाई थी। लेकिन वास्तविक यात्रा 2019 की तुलना में 40 प्रतिशत कम होने का अनुमान है।

चीन में बड़े पैमाने पर परिवहन शटडाउन ने उद्योग को बुरी तरह प्रभावित किया है और आयात-निर्यात क्षेत्र को भी प्रभावित किया है। शोधकर्ता भी 2019- नावेल कोरोना वायरस प्रकोप के स्रोत का पता लगाने में असमर्थ रहे हैं। चीन में 2019-नावेल कोरोना वायरस (2019-एनसीओवी) नामक एक नए ‘रहस्यमय’ वायरस के प्रकोप ने दुनिया भर में लोगों के बीच खतरे की संख्या बढ़ा दी है क्योंकि संक्रमित लोगों की संख्या बढ़ रही है। इसके परिणाम स्वरूप मरने वालों की संख्या में वृद्धि जारी है।

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चीन में से अधिकांश मामले चीन के हुबेई प्रांत के एक प्रमुख शहर वुहान में दर्ज किए गए हैं, जहां संक्रमण शुरू हुआ था। वुहान में अभी तक छह मौतें हो चुकी हैं। हालांकि स्वास्थ्य अधिकारी अभी भी इस प्रकोप के सटीक स्रोत का पता लगा रहे हैं, प्रारंभिक जांच से संकेत मिलता है कि यह वुहान के हुआनान सीफूड होलसेल मार्केट में शुरू हुआ था। वुहान में अधिकांश संक्रमित रोगियों ने या तो इस बाजार में काम किया या दौरा किया। इसे 1 जनवरी से बंद कर दिया गया है।

वुहान के अलावा, बीजिंग, शंघाई, ग्वांगडोंग, झेजियांग और तियानजिन में भी नावेल कोरोना वायरस के मामले सामने आए हैं। अधिकारियों ने चीन के अन्य हिस्सों में भी संदिग्ध मामलों की पहचान की है। इस नए स्वास्थ्य आपातकाल का सामना करते हुए, चीन के वैज्ञानिक और अन्य जगहों पर वायरस के स्रोत की पहचान करने और उनके प्रभाव को शामिल करने के लिए प्रभावी उपाय खोजने के लिए विचार कर रहे हैं।

20 जनवरी को, चीन ने पुष्टि की कि 2019 नावेल कोरोना वायरस मनुष्यों के बीच संचार कर सकता है (यह पहले माना जाता था कि केवल जानवरों से मनुष्यों में संचारित होता है)। यह एक चिंताजनक विषय है क्योंकि इसका मतलब है कि वायरल संक्रमण आगे और बहुत तेजी से फैल सकता है, विशेष रूप से नए साल के उत्सव के कारण चीन में चल रहे वार्षिक प्रवास की पृष्ठभूमि में जब लाखों लोग पूरे चीन में यात्रा करते हैं। चीन में इस वायरस के चलते पर्यटकों की संख्या घट सकती है। इसका सीधा असर चीन की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

पहले ही चीन की अर्थव्यवस्था सुस्ती के दौर में है। कई देशों ने अपने नागरिकों से चीन नहीं जाने के लिए कहा है। कई देशों ने वुहान से आने वाले लोगों पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। रूस ने चीन के साथ अपने पूर्वी बॉर्डर को भी बंद कर दिया है। लगभग 18 साल पहले सार्स वायरस से भी ऐसा ही खतरा बना था। 2002- 03 में सार्स की वजह से पूरी दुनिया में 700 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। पूरी दुनिया में हजारों लोग इससे संक्रमित हुए थे। इसका असर आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ा था। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने 4 फरवरी को अपनी आपातकालीन समिति की बैठक बुलाई ताकि यह तय किया जा सके कि प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया जाए या नहीं। आमतौर पर, ये घोषणाएं गंभीर महामारियों के चलते की जाती हैं। इससे पहले कांगो में चल रहे इबोला प्रकोप, 2016 में अमेरिका में जीका वायरस और 2014 में पश्चिम अफ्रीका इबोला के प्रकोप को स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया जा चुका है।

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क्या है कोरोना वायरस

कोरोना वायरस (सीओवी) का संबंध वायरस के ऐसे परिवार से है, जिसके संक्रमण से जुकाम से लेकर सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्या हो सकती है। इस वायरस को पहले कभी नहीं देखा गया है। इस वायरस का संक्रमण दिसंबर में चीन के वुहान में शुरू हुआ था। डब्लूएचओ के मुताबिक, बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ इसके लक्षण हैं। अब तक इस वायरस को फैलने से रोकने वाला कोई टीका नहीं बना है।

कोरोना के लक्षण

इसके संक्रमण के फलस्वरूप बुखार, जुकाम, सांस लेने में तकलीफ, नाक बहना और गले में खराश जैसी समस्या उत्पन्न होती हैं। यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। इसलिए इसे लेकर बहुत सावधानी बरती जा रही है। यह वायरस दिसंबर में सबसे पहले चीन में पकड़ में आया था। इसके दूसरे देशों में पहुंच जाने की आशंका जताई जा रही है।

बचाव के उपाय

स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना वायरस से बचने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इनके मुताबिक, हाथों को साबुन से धोना चाहिए। अल्कोहल आधारित हैंड रब का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। खांसते और छीकते समय नाक और मुंह रूमाल या टिश्यू पेपर से ढककर रखें। जिन व्यक्तियों में कोल्ड और फ्लू के लक्षण हों उनसे दूरी बनाकर रखें। अंडे और मांस के सेवन से बचें। जंगली जानवरों के संपर्क में आने से बचें।

कोरोना का कहर

कोरोना वायरस दुनिया के विभिन्न देशों में फैल चुका है। 70 देशों में इसके संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन पहले ही इसे इमर्जेंसी घोषित कर चुका है। दुनिया भर में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 94,000 के पार चली गई है ।

1. चीन में अब तक 3200 लोग मर चुके हैं। भारत में भी अब तक इसके 29 ताजा मामले सामने आ चुके हैं।
2. ईरान में अब तक कोरोना से 92 और दक्षिण कोरिया में 32 लोगों की मौत हो चुकी है।
3. सियेटल में फेसबुक के एक इम्पलाई में कोविड 19 का संक्रमण पाया गया है।
4. सिर्फ इटली में ही अब तक कोरोना से 107 लोगों की मौत हो गयी है।
5. चीन के हुबेई प्रांत में अब तक कोरोना से प्रभावित लोगों की संख्या 67,466 हो गयी है।
6. चीन के हुबेई प्रांत में अब तक कोरोना से मरने वाले लोगों की संख्या 2,902 हो गई है।

भारत सहित कई एशियाई देशों ने स्वास्थ्य सलाह जारी की है, और कई ने अपने हवाई अड्डों पर चीन से आने वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग शुरू कर दी है। 17 जनवरी को, यूएस-लास एंजिल्स, न्यूयार्क और सैन फ्रांसिस्को में तीन प्रमुख हवाई अड्डों ने वुहान से आने वाले लोगों की स्क्रीनिंग शुरू की। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने भी कहा है कि संक्रमण अन्य स्थानों पर फैल सकता है, और 2019-नावेल कोरोना वायरस के बारे में उपलब्ध सीमित जानकारी के आधार पर अंतरिम दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

हालांकि इसने अभी तक किसी भी व्यापार या यात्रा प्रतिबंध के लिए नहीं कहा है। चीन से बाहर 72 देशों में कोरोना वायरस के कई मामलों की पुष्टि हुई है। इन देशों में थाईलैंड, ईरान, इटली, जापान, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया, अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं।

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