[gtranslate]

ईरान में हिजाब को लेकर 22 साल की महसा अमीनी की मौत के बाद महिलाओं ने खुलकर प्रदर्शन शुरू कर दिया है। तमाम बंदिशों की बेड़ियों को तोड़ते हुए महिलाएं सड़कों पर उतर आई हैं। महिलाएं अपना हिजाब उतारकर फेंक रही हैं। इनके इस आंदोलन को दुनियाभर से समर्थन भी मिलने लगा है। लंदन और पेरिस जैसे यूरोपीय शहरों में भी हिजाब विरोधी आंदोलन शुरू हो गए हैं

पिछले कुछ दिनों से ईरान में हिजाब को लेकर प्रदर्शन जारी है। हिरासत में ली गई युवती की पुलिस कस्टडी में मौत के बाद महिलाएं अपना हिजाब उतारकर फेंक रही हैं और कैंची से बाल काटकर हिजाब के खिलाफ अपनी आवाज उठा रही हैं। ईरान में महिलाओं की मांग है कि हिजाब को अनिवार्य नहीं किया जाना चाहिए, इसकी वजह से उन्हें अपनी जान क्यों देनी पड़ रही है। अब इन आंदोलनों ने
वैश्विक रूप अपना लिया है। ईरान से बाहर लंदन और पेरिस जैसे यूरोपीय शहरों में भी हिजाब विरोधी आंदोलन हो रहे हैं। पेरिस में हजारों की संख्या में महिलाएं और पुरुष सड़कों पर उतरकर विरोध कर रहे हैं और ईरानी लोगों के प्रति अपना समर्थन जाहिर कर रहे हैं। ईरानी दूतावास के बाहर लोगों ने ‘मोरैलिटी पुलिस’ के खिलाफ आंदोलन किया। पेरिस के अलावा लंदन में भी इसी तरह के प्रदर्शन हो रहे हैं।

कनाडा में भी कुछ जगहों पर आंदोलन हुए हैं। लंदन में ईरानी दूतावास के बाहर तो प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ झड़प भी हुई। ये लोग ईरानी दूतावास के बाहर नारेबाजी कर रहे थे और ईरान में महिलाओं को अधिकार दिए जाने की मांग कर रहे थे। हालांकि हिजाब पर बवाल कोई नया नहीं है, दुनियाभर के कई देशों में इसे लेकर विवाद हो चुका है। जिसमें भारत भी शामिल है। दरअसल इस्लामिक देश ईरान में 22 साल की महसा अमीनी की मौत के बाद महिलाओं ने खुलकर प्रदर्शन शुरू कर दिया है। बंदिशों की तमाम बेड़ियों को तोड़ते हुए महिलाएं सड़कों पर उतर आईं हैं और खुलकर हिजाब को लेकर अपना विरोध जता रही हैं। इतना ही नहीं सोशल मीडिया पर भी जमकर इस प्रोटेस्ट को हवा दी जा रही है। ईरानी महिलाओं के इस प्रदर्शन को दुनियाभर के लोगों का समर्थन भी मिल रहा है। प्रदर्शन करने वाली महिलाओं की मांग है कि उन्हें इस बात की आजादी दी जानी चाहिए कि वे हिजाब पहने या नहीं, हिजाब की अनिवार्यता को लेकर उनकी जान को खतरा है। इसीलिए इसे खत्म कर दिया जाना चाहिए।

ईरान में हिजाब को लेकर लागू सख्त नियमों पर दुनिया भर में सवाल उठ रहे हैं। हाल ही में अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन की पत्रकार ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी का इंटरव्यू करने पहुंची थी। तब रईसी ने पत्रकार से कहा था कि यदि मेरा इंटरव्यू लेना है तो हिजाब पहनना होगा। इससे पत्रकार ने मना कर दिया और इंटरव्यू नहीं हो सका।

गौरतलब है कि ईरान में वर्ष 1779 में इस्लामिक रेवोल्यूशन के बाद महिलाओं को हिजाब पहनना अनिवार्य कर दिया गया था। वहीं ईरान की महिलाएं कई बार हिजाब को ढीला करके पहनती थीं जिस वजह से वह कई बार कान के पास या गर्दन पर आ जाता था। 1981 में कानून बनाया गया तब भी बड़े प्रदर्शन हुए थे। यूके की सरकार ने भी ईरान की महसा अमीनी की मौत को लेकर निंदा की है। हालांकि इस बात की आलोचना हो रही है कि हाल ही में न्यूयॉर्क में यूएन की बैठक के दौरान ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की आलोचना क्यों नहीं की गई।

ईरान में अब तक हिजाब के विरोध में आंदोलन को दो हफ्ते बीत चुके हैं। देश के 31 प्रांतों में यह आंदोलन पैर पसार चुका है और सरकार को इससे निपटने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। ईरान में हिजाब को लेकर बेहद कड़े नियम हैं। ईरान में नियम है कि यदि कोई लड़की 9 साल से अधिक उम्र की हो जाती है तो उसके लिए हिजाब पहनना जरूरी होता है। ऐसा न करने पर सजा का प्रावधान है।

क्या कहता है अंतरराष्ट्रीय कानून
इंटरनेशनल कॉन्वनेंट ऑन सिविल एंड पॉलिटिकल राइट्स (यूसीसीपीआर) के आर्टिकल 18 में धार्मिक आजादी का जिक्र किया गया है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक इसके तहत धर्म और विश्वास के तौर पर न सिर्फ बाकी चीजों की आजादी है, बल्कि विशिष्ट कपड़े या फिर सिर ढकने जैसे रीति-रिवाज भी शामिल हो सकते हैं। आर्टिकल 18 के तहत धर्म की स्वतंत्रता पर कोई भी बैन गैर भेदभावपूर्ण होना चाहिए।

भारत में भी जारी है बहस
भारत में भी हिजाब को लेकर बहस जारी है। कर्नाटक के कुछ कॉलेजों से उठा यह विवाद अब पूरे देशभर में फैल चुका है। कर्नाटक में स्कूल और कॉलेजों में हिजाब पहनकर जाने को लेकर विवाद शुरू हुआ था। मामला हाईकोर्ट तक गया, लेकिन मुस्लिम छात्राओं को यहां से झटका लगा। हाईकोर्ट ने साफ किया कि हिजाब इस्लाम में अनिवार्य धार्मिक परंपरा नहीं है। यानी हाईकोर्ट ने कर्नाटक सरकार के फैसले के पक्ष में अपना फैसला सुनाया। इसके बाद अब मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है।

इन देशों में बैन है हिजाब
हिजाब पर बैन लगाने वाले देशों की लिस्ट में लगातार नए नाम जुड़ते जा रहे हैं। दुनिया की एक बड़ी टूरिस्ट डेस्टिनेशन स्विटजरलैंड ने पिछले ही साल हिजाब पर बैन लगाया था। यहां बुर्का और हिजाब दोनों पर ही बैन है। साथ ही इसका उल्लंघन करने पर भारी जुर्माने का प्रावधान भी है। इसके अलावा बेल्जियम, श्रीलंका, ऑस्ट्रिया, नीदरलैंड, जर्मनी, चीन, बल्गेरिया, स्वीडन और रिपब्लिक ऑफ कांगो ऐसे देश हैं जहां पर हिजाब पूरी तरह से बैन है। इनके अलावा भी कई ऐसे देश हैं, जहां सरकारी स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब नहीं पहना जा सकता है।

You may also like

MERA DDDD DDD DD