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चीनी वायरस कहे जाने पर चीन का पलटवार

चीन और अमेरिका के बीच तनाव थम नहीं रहा है। इस बीच में अमेरिका की ओर से वहां काम कर रहे पांच सरकारी पत्रकारों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह पत्रकार सरकारी मीडिया से जुड़े थे। जिसके बाद चीन ने भी इसकी जवाबी कार्रवाई में दोनों देशों के बीच रिश्तों में तनाव को और हवा दे दी है।

चीन ने तीन अमेरिकी समाचार पत्रों के सभी पत्रकारों का मीडिया क्रेडेंशियल रद्द करने का फैसला किया है। इन अमेरिकी अखबारों में न्यूयॉर्क टाइम्स, वॉल स्ट्रीट जर्नल और वाशिंगटन पोस्ट शामिल हैं।

इसकी घोषणा चीन ने कल बुधवार यानी 18 मार्च को की। इस दौरान चीन ने कहा कि तीनों अखबारों में काम करने वाले ऐसे अमेरिकी नागरिक जिनके क्रेडेंशियल साल के अंत तक खत्म हो रहे हैं वे दस दिनों के भीतर अपने प्रेस कार्ड सरेंडर कर दें।

इस मामले पर बीजिंग ने कहा कि निष्कासित पत्रकारों को चीन, हांगकांग और मकाऊ की धरती पर काम करने के लिए अनुमति नहीं होगी। ऐसे में इन दोनों देशों के बीच जैसे को तैसा वाली श्रंखला के तहत कार्रवाईया चल रही हैं।

इससे पहले अमेरिका की ओर से मार्च की शुरुआत में चीनी सरकारी मीडिया के 160 में से सिर्फ 100 कर्मचारियों के वीजा ही मंजूर किए गए थे। इस मामले पर चीन ने कहा है कि अमेरिका इससे पहले भी ट्रेड वॉर और कोरोनावायरस को लेकर चीन के साथ टकरावपूर्ण व्यवहार अपनाता रहा है।

इस पर अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने चीन से इस मामले पर फिर विचार करने का आग्रह किया है। पोंपियो ने कहा, मुझे चीन के फैसले पर दुख है। उन्होंने पत्रकारों के निष्कासन की निंदा करते हुए कहा कि चीन में मीडिया की आजादी पर यह कड़ा प्रहार है।

गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से महामारी का रूप धारण कर चुके कोरोना को चीनी वायरस कहा गया था तब से ही दोनों देशों के बीच तल्खी और ज्यादा बढ़ गई थी। इसके बाद दोनों देशों ने एक दूसरे पर आरोप न लगाए जाने की मांग की थी।

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