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चीनी-ऑस्ट्रेलियाई अरबपति डॉ चाऊ चक विंग ने जीता ‘डिफेमेशन केस’

चीनी-ऑस्ट्रेलियाई अरबपति डॉ चाऊ चक विंग ने वर्ष 2017 में दो ऑस्ट्रेलियाई मीडिया संगठनों के खिलाफ मानहानि का मुकदमा किया था। जिसका फैसला 2 फरवरी 2021 को आया इसमें माना गया कि डॉ चाऊ चक विंग के नाम को समाचार में गलत तरीके से प्रयोग किया गया है। उन्होंने यह केस जीत लिया है जिसमें उन्हें एक समाचार में गलत तरीके से चीनी जासूस बताया गया था।

कौन है डॉ चाऊ चक विंग ?

डॉ चाऊ चक विंग का जन्म वर्ष 1954 में चीन के ग्वांगडोंग प्रोविंस में हुआ था। फ़िलहाल वह ऑस्ट्रेलिया के नागरिक हैं और सिडनी में रहकर प्रॉपर्टी डेवलपर का कार्य करते हैं। चाऊ चक ने रियल स्टेट में कार्य कर रही कंपनी ‘किंग गोल्ड ग्रुप’ की भी स्थापना कि जो चीन के गुआंगझाऊ में स्थित है।
डॉ चाऊ चक विंग,अपने परोपकारों के लिए भी जाने जाते हैं उन्होंने अपनी सम्पत्ति के कई हिस्सों को जन कल्याण में डोनेट भी किया है।

क्या था पूरा मामला ?

 

दरअसल ऑस्ट्रेलिया की एक मीडिया संस्थान ‘एबीसी’ ने वर्ष 2017 में एक कार्यक्रम प्रसारित किया था जिसका नाम था ‘फोर कॉर्नर्स एपिसोड’। इस कार्यक्रम में डॉ चाऊ चक विंग को  गलत तरीके से चीन का जासूस बताया गया और इसी के चलते डॉ चाऊ चक विंग द्वारा इस पर डिफेमेशन का केस दर्ज कराया गया।

अदालत ने पाया कि इस प्रकरण में उनके नाम को गलत तरीके से प्रयोग कर उनका दुष्प्रचार किया  गया। ठीक इसी तरह के एक कार्यक्रम में डॉ चाऊ चक विंग ने एक और मीडिया संस्थान जिसका नाम ‘नाइन एंटरटेनमेंट’ है उस पर भी डिफेमेशन केस किया था। 

वहीं दूसरी ओर ‘एबीसी’ और ‘नाइन एंटरटेनमेंट’ इस फैसले को मीडिया की स्वतंत्रता के लिए एक झटका बताया है। फैसले में दोनों मीडिया संगठनों को संयुक्त जांच में डॉ चाऊ को $ 590,000 के नुकसान का भुगतान करने का आदेश दिया गया है।

डॉ चाऊ के लिए वकील ने कहा कि वह इस कार्यक्रम और उसके पत्रकार द्वारा इस तरह के बेबुनियाद हमले के बाद कोर्ट द्वारा दिए गए इस फैसले से वे प्रसन्न हैं। हाल के वर्षों में चीन और ऑस्ट्रेलिया के बीच बिगड़ते राजनीतिक संबंधों के दौरान  इस तरह के  प्रकरण को लेकर कई अदालती लड़ाइयां लड़ी गयीं।

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