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ताइवान को चीन की चेतावनी, स्वतंत्रता का मतलब युद्ध होगा

अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने घोषणा की थी कि अमेरिका व ताइवान के राजदूतों और अधिकारियों के बीच के संपर्कों पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया गया है। इस फैसले से ताइवान के साथ अमेरिका के रिश्ते मजबूत होंगे। लेकिन चीनी मीडिया ने फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। ताइवान पर अमेरिका के इस कदम से चीन नाराज है। चीन ने पिछले दिनों ही ताइवान की सीमा में अपने फाइटर जेट और बमवर्षक विमान घुसा दिए है। लेकिन अब चीन ताइवान पर पूरी सख्ती दिखा रहा है। अमेरिकी हस्तक्षेप के बाद चीन ताइवान पर और ज्यादा दावा ठोकने लगा है। गुरूवार 28 जनवरी को चीन ने ताइवान पर सख्ती दिखाते हुए कहा कि स्वतंत्रता का मतलब युद्ध होगा।

चीनी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता वू कियान ने कहा कि ताइवान में मुट्ठी भर लोग स्वतंत्रता की मांग कर रहे हैं। हम ऐसे लोगों को चेतावनी देते हैं कि वो आग से खेल रहे हैं और खुद जल जाएंगे। यदि ताइवान स्वतंत्रता की मांग पर कायम रहता है तो उसे गंभीर परिणामों के लिए तैयार रहना चाहिए। आजादी का सीधा मतलब युद्ध होगा। इतना ही नहीं चीन ने उन देशों को भी चेताया है जो चीन और ताइवान के बीच हस्तक्षेप कर रहे है।

दरअसल चीन ताइवान को अ्पना अभिन्न अंग मानता है। लेकिन ताइवान खुद को एक स्वतंत्र राष्ट्र कहता है। चीन के इस रूख पर कई बार अमेरिका भी चीन को कई बार फटकार लगा चुका है। चीन मानता है कि ताइवान स्वतंत्रता की गुहार लगाकर इंटरनेशनल समुदाय का समर्थन हासिल करना चाहता है। चीनी प्रवक्ता ने आगे कहा कि ताइवान चीन का अभिन्न हिस्सा है। ताइवान के जलक्षेत्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी हमारी है और इस मामले में किसी की दखलंदाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। स्वतंत्रता की मांग करने वालों को वक्त रहते सुधर जाना चाहिए।

चीन की इस धमकी का ताइवान ने भी करारा जवाब दिया है। मेनलैंड अफेयर काउंसिल ने कहा है कि ताइवान अपनी संप्रभुता की रक्षा करना जानता है। इससे पहले ताइवान ने चीन के बढ़ते खतरे को लेकर सभी एशियाई देशों को आगाह किया था। राष्ट्रपति त्साई इंग-वेन ने कहा था कि अगर चीन को नहीं रोका गया तो एशिया के दूसरे देश उसके निशाने पर आ जाएंगे।

संयुक्त राज्य अमेरिका ने 1949 में गृह युद्ध के अंत में चीन से अपने अलगाव के बाद से ताइवान के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए रखा है। लेकिन हाल के दिनों में, उसने चीन से दुश्मनी से बचने के लिए ताइवान के साथ अपनी दोस्ती को प्रदर्शित करने से परहेज किया है। चीन की स्थिति यह है कि ताइवान उसका ही टूटा हुआ प्रांत है और समय आने पर इसे देश की मुख्य सीमा तक ले जाया जाना चाहिए। लेकिन ताइवान के नेताओं का स्पष्ट कहना है कि यह एक संप्रभु राष्ट्र है।

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