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ताइवान को लेकर चीन ने जापान को दी परमाणु हमले की धमकी 

चीन दुनिया के मुल्कों को धमकाने वाली अपनी  हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। उसने ताइवान मामले को लेकर एक बार फिर जापान को परमाणु हमले की धमकी दी है। चीन ने लिथुआनिया को अपने यहां ताइवानी दूतावास खोलने की इजाजत देने पर चेतावनी दी है। चीन द्वीपीय क्षेत्र ताइवान को अपना मानता है। वह इस क्षेत्र पर बलपूर्वक कब्जा करने की धमकी भी दे चुका है। वह ताइवान के साथ किसी देश के राजनयिक संबंध स्थापित करने का भी विरोध करता है।

 

दरअसल ,जब भी जापान और चीन के दुश्मनी भरे रिश्ते और इतिहास की बात होती है, तो वर्ष 1937 चीनी शहर नानजिंग में शुरू हुए कत्लेआम को ज़रूर याद किया जाता रहा है। तब जापानी सैनिकों ने नानजिंग शहर को अपने क़ब्ज़े में लेकर हत्या, रेप और लूट को अंजाम देना शुरू कर दिया था।यह कत्लेआम वर्ष 1937 में दिसंबर महीने में शुरू हुआ था और 1938 में मार्च महीने तक चला था।

चीन ने ताइवान को हमेशा से ऐसे प्रांत के रूप में देखा है जो उससे अलग हो गया है।  चीन मानता रहा है कि भविष्य में ताइवान चीन का हिस्सा बन जाएगा। जबकि ताइवान की एक बड़ी आबादी अपने आपको एक अलग देश के रूप में देखना चाहती है।यही वजह रही है कि  दोनों के बीच अक्सर तनाव देखने को मिलता है।

वर्ष 1642 से 1661 तक ताइवान नीदरलैंड्स की कॉलोनी  था। उसके बाद चीन का चिंग राजवंश वर्ष 1683 से 1895 तक ताइवान पर शासन करता रहा। लेकिन साल 1895 में जापान के हाथों चीन की हार के बाद ताइवान, जापान के हिस्से में आ गया।

 

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दूसरे विश्व युद्ध में जापान की हार के बाद अमरीका और ब्रिटेन ने तय किया कि ताइवान को उसके सहयोगी और चीन के बड़े राजनेता और मिलिट्री कमांडर चैंग काई शेक को सौंप देना चाहिए। चैंग की पार्टी का उस वक़्त चीन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण था,लेकिन कुछ सालों बाद चैंग काई शेक की सेनाओं को कम्युनिस्ट सेना से हार का सामना करना पड़ा। तब चैंग और उनके सहयोगी चीन से भागकर ताइवान चले आए और कई वर्षों तक 15 लाख की आबादी वाले ताइवान पर उनका प्रभुत्व रहा।

कई साल तक चीन और ताइवान के बीच बेहद कड़वे संबंध होने के बाद साल 1980 के दशक में दोनों के रिश्ते बेहतर होने शुरू हुए। तब चीन ने ‘वन कंट्री टू सिस्टम’ के तहत ताइवान के सामने प्रस्ताव रखा कि अगर वो अपने आपको चीन का हिस्सा मान लेता है तो उसे स्वायत्ता प्रदान कर दी जाएगी।

 


ताइवान और चीन के संबंध तनावपूर्ण

ताइवान ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया

 

साल 2000 में चेन श्वाय बियान ताइवान के राष्ट्रपति चुने गए जिन्होंने खुलेआम ताइवान की स्वतंत्रता का समर्थन किया। ये बात चीन को नागवार गुजरी। तब से ताइवान और चीन के संबंध तनावपूर्ण ही रहे।  बीच-बीच में ज़रूर ताइवान ने चीन के साथ व्यापारिक संबंध बेहतर बनाने की कोशिशें की।

 

अमेरिका की भूमिका

 

अमेरिका ताइवान का सबसे अहम और एकमात्र दोस्त माना जाता रहा है। हालांकि तब अमेरिकी कांग्रेस ने इसके जवाब में ‘ताइवान रिलेशन एक्ट’ पास किया जिसके तहत तय किया गया कि अमेरिका ताइवान को सैन्य हथियार सप्लाई करेगा और अगर चीन ताइवान पर किसी भी तरह का हमला करता है तो अमेरिका उसे बेहद गंभीरता से लेगा। उसके बाद से अमेरिकी का ज़ोर चीन और ताइवान दोनों ही के साथ अपने रिश्तों का संतुलन बनाए रखने की नीति पर रहा।

 


वर्ष 1931 में जापान ने चीन के मंचूरिया में आक्रमण

 

चीन और जापान का युद्ध

 

वर्ष 1931 में जापान ने चीन के मंचूरिया में आक्रमण किया। जापान ने यह आक्रमण एक विस्फोट के बाद किया था जो जापानी नियंत्रण वाले रेलवे लाइन के पास हुआ था।  इस दौरान जापानी सैनिकों का मुक़ाबला चीनी सैनिक नहीं कर पाए और जापान ने कई चीनी इलाक़ों को अपने क़ब्ज़े में ले लिया। जापान चीन पर अपनी पकड़ मजबूत बनाता गया और चीन कम्युनिस्टों और राष्ट्रवादियों के गृह युद्ध में फंसा था। चीन के राष्ट्रवादी नेता च्यांग काई-शेक ने नानजिंग को राष्ट्रीय राजधानी घोषित किया था।

कई जापानियों को लगता है कि चीन में जापान की ज़्यादती को वहां की टेक्स्ट बुक में बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है , हालांकि यह ऐतिहासिक तथ्य है कि 1931 में जापान ने बड़ी आक्रामकता से चीन में मंचूरिया पर क़ब्ज़ा किया था।

दूसरे विश्व युद्ध में पूर्वी एशिया जंग का मैदान बना हुआ था।  इस इलाक़े में राष्ट्रीय अस्मिता को केंद्र में लाने में दूसरे विश्व युद्ध की बड़ी भूमिका रही है।  चीन आज की तारीख़ में आर्थिक और सैन्य शक्ति में काफ़ी आगे निकल चुका है , लेकिन इस सफर में उसके अतीत की भी ख़ासी भूमिका रही है।

खबरों के मुताबिक इन दिनों चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) का एक वीडियो सामने आ रहा है। सीसीपी द्वारा स्वीकृत एक चैनल पर दिखाए गए इस वीडियो में कहा गया कि गैर परमाणु शक्तियों के खिलाफ परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं करने की चीन की नीति है। जापान इसका अपवाद बन सकता है। इसमें यह चेतावनी दी गई है कि ताइवान मामले में जापान ने दखल दिया तो परमाणु हमला कर दिया जाएगा। हालांकि इस वीडियो को बाद में चीनी वीडियो शेयरिंग प्लेटफार्म शिगुआ से हटा दिया गया। इसे 20 लाख से ज्यादा बार देखा गया। यह वीडियो हटाए जाने से पहले ही यूट्यूब और ट्विटर पर भी अपलोड कर दिया गया।

खबरों के अनुसार चीन ने लिथुआनिया को चेतावनी देते हुए कहा कि वह गलत संदेश नहीं दे। इससे पहले ताइवान ने कहा कि वह बाल्टिक क्षेत्र के इस देश में अपना दूतावास खोलेगा। वहीं इससे पहले चीन ने ताइवान के मामले में अमेरिका को भी सीधे देख लेने की धमकी दे दी थी। चीन ने अप्रत्यक्ष रूप से जंग की धमकी दी थी। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा था कि ताइवान हमारी मुख्य भूमि का हिस्सा है और अमेरिका इस मामले में हस्तक्षेप कर खतरा उठा रहा है। इसके अलावा चीन के रक्षा मंत्रालय ने अमेरिका को ताइवान के साथ सैन्य संपर्क बढ़ाने के खिलाफ चेतावनी दी थी। मंत्रालय के प्रवक्ता रेन गुओकियान्ग ने कहा था कि चीन इस द्वीप-देश को जोड़ने में भरोसा रखता है और किसी बाहरी हस्तक्षेप का विरोध करता है। एक बयान में उन्होंने ताइवान से सभी सैन्य संबंध तोड़ने को कहा था।

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