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हांगकांग से फिर हारा चीन

जीवन सिंह टनवाल
हांगकांग में लोकतंत्र समर्थकों को स्थानीय निकाय चुनावों में मिली शानदार जीत को अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चीन की हार के तौर पर देखा जा रहा है। हांगकांग में छह महीनों से लोकतंत्र समर्थकों की ओर से जारी विरोध- प्रदर्शनों के बीच जिला परिषद के लिए रिकाॅर्ड तोड़ 70 प्रतिशत वोटिंग हुई। मतदान के इस रुझान को सरकार विरोधी और लोकतांत्रिक समूह की भारी कामयाबी के तौर पर देखा जा रहा है। इस चुनाव को हांगकांग की नेता और चीफ एग्जिक्यूटिव कैरी लैम के लिए एक शक्ति परीक्षण के तौर पर देखा जा रहा है। लोकतंत्र समर्थक विरोध समूहों को उम्मीद है कि करीब छह महीने की अशांति और सरकार विरोध के बाद हुई वोटिंग से चीनी सरकार को एक संदेश मिलेगा। वित्तीय हब माने जाने वाले हांगकांग में लोकतंत्र समर्थक उम्मीदवारों ने पहली बार 452 जिला परिषद सीटों में से आधे से अधिक पर जोरदार जीत हासिल की है। जब आधी रात के बाद नतीजे आने शुरू हुए तो बीजिंग समर्थक लोग डेमोक्रेट्स की जीत से परेशान नजर आए। कुछ मतदान केंद्रों पर लोकतंत्र समर्थक जोर-शोर से ‘लिबरेट हांगकांग, रिव्योलूशन नाऊ’ के नारे लगा रहे थे। हांगकांग की सड़कों पर यह नारा पिछले छह महीने से गूंज रहा है।
हांगकांग में लम्बे समय से चल रहे प्रत्यपर्ण बिल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के बीच स्थानीय निकाय चुनाव  में भारी मतदान से सवाल भी उठने लगा है कि क्या अब लोकतंत्र की सुलग रही आंच खत्म हो गई? क्या लोकतंत्र के लिए छह माह पूर्व शुरू हुए आंदोलन का दौर खत्म  हो जाएगा। इस चुनाव में भारी मतदान को लेकर हांगकांग सरकार भले ही अपनी पीठ थपथपाए। लेकिन सरकार की मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं। हांगकांग में अब यह संघर्ष और दिलचस्प हो गया है। इस जंग में अमेरिका के कूद जाने से यह लड़ाई बीजिंग और वाशिंगटन के बीच सीधे-सीधे शुरू हो चुकी है। अमेरिका इसी जुगत में था कि उसे चीन में हस्तक्षेप करने का मौका मिले। इस मामले में हांगकांग समस्या उसके लिए बेहतर और सटीक हथियार है। हांगकांग मामले में चीन बहुत फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है। उसने अब तक इस आंदोलन पर सीधे हस्तक्षेप नहीं किया है। हांगकांग में लोकतंत्र समर्थकों का आंदोलन उसके लिए धैर्य की नई परीक्षा भी है। लेकिन हांगकांग सरकार ने जिस तरह से इस आंदोलन को दबाने के लिए पुलिस बल का सहारा लिया है, उससे अमेरिका की दिलचस्पी बढ़ गई है। हांगकांग आंदोलन में अमेरिकी दिलचस्पी ड्रैगन को रास नहीं आ रही है। इस बाबत वह अमेरिकी प्रशासन को सचेत कर चुका है। चीन का मानना है कि हांगकांग की समस्या चीन का आंतरिक मामला है। इस पर अमेरिका को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। अमेरिका को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
हांगकांग को लेकर अमेरिका और चीन के रिश्तों में तल्खी बढ़ती जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने  हांगकांग के लोकतंत्र समर्थकों के पक्ष में पास किए गए बिल पर अपनी मुहर लगा दी है। हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप के इस कदम से चीन भड़क गया है और उसने अमेरिका के खिलाफ बड़े कदम उठाने की धमकी दी है।
हांगकांग में लम्बे समय से चल रहे प्रत्यपर्ण बिल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के बीच स्थानीय निकाय चुनाव  में भारी मतदान से सवाल भी उठने लगा है कि क्या अब लोकतंत्र की सुलग रही आंच खत्म हो गई? क्या लोकतंत्र के लिए छह माह पूर्व शुरू हुए आंदोलन का दौर खत्म  हो जाएगा। इस चुनाव में भारी मतदान को लेकर हांगकांग सरकार भले ही अपनी पीठ थपथपाए। लेकिन सरकार की मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं। हांगकांग में अब यह संघर्ष और दिलचस्प हो गया है। इस जंग में अमेरिका के कूद जाने से यह लड़ाई बीजिंग और वाशिंगटन के बीच सीधे-सीधे शुरू हो चुकी है। अमेरिका इसी जुगत में था कि उसे चीन में हस्तक्षेप करने का मौका मिले। इस मामले में हांगकांग समस्या उसके लिए बेहतर और सटीक हथियार है। हांगकांग मामले में चीन बहुत फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है। उसने अब तक इस आंदोलन पर सीधे हस्तक्षेप नहीं किया है। हांगकांग में लोकतंत्र समर्थकों का आंदोलन उसके लिए धैर्य की नई परीक्षा भी है। लेकिन हांगकांग सरकार ने जिस तरह से इस आंदोलन को दबाने के लिए पुलिस बल का सहारा लिया है, उससे अमेरिका की दिलचस्पी बढ़ गई है। हांगकांग आंदोलन में अमेरिकी दिलचस्पी ड्रैगन को रास नहीं आ रही है। इस बाबत वह अमेरिकी प्रशासन को सचेत कर चुका है। चीन का मानना है कि हांगकांग की समस्या चीन का आंतरिक मामला है। इस पर अमेरिका को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। अमेरिका को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
हांगकांग को लेकर अमेरिका और चीन के रिश्तों में तल्खी बढ़ती जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने  हांगकांग के लोकतंत्र समर्थकों के पक्ष में पास किए गए बिल पर अपनी मुहर लगा दी है। हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप के इस कदम से चीन भड़क गया है और उसने अमेरिका के खिलाफ बड़े कदम उठाने की धमकी दी है।
इस बीच चीन के विदेशमंत्री वांग यी ने कहा कि हांगकांग चीन का हिस्सा है और वहां हुए सामुदायिक स्तर के चुनावों में ‘क्या हो रहा है, मायने नहीं रखता’ हांगकांग के सामुदायिक स्तर के चुनाव के लिए मतगणना के आंशिक परिणामों के अनुसार लोकतंत्र समर्थक धड़े ने  भारी जीत दर्ज की है। इन नतीजों ने चीन समर्थक सरकार को स्पष्ट संदेश भेजा है कि लोगों का समर्थन प्रदर्शनकारियों की मांगों के साथ है। हालांकि यह स्पष्ट है कि हांगकांग चीन और उसके विशेष प्रशासनिक क्षेत्र का हिस्सा है और क्या हो रहा है, यह मायने नहीं रखता। उन्होंने कहा, ‘‘हांगकांग से छेड़छाड़ करने और उसकी समृद्धि एवं स्थिरता को नुकसान पहुंचाने की कोई भी कोशिश सफल नहीं होगी।

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