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ताइवान को लेकर अमेरिका के रुख से भड़का चीन

अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने घोषणा की है कि अमेरिका व ताइवान के राजदूतों और अधिकारियों के बीच के संपर्कों पर प्रतिबंध को हटा दिया गया है। इस फैसले से ताइवान के साथ अमेरिका के रिश्ते मजबूत होंगे। लेकिन चीनी मीडिया ने फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। ताइवान पर अमेरिका के इस कदम से चीन नाराज है। चीन की ओर से कड़े शब्दों में कहा गया है कि इसके ऐसे गंभीर परिणाम होंगे, जो किसी ने सोचे भी नहीं होंगे।

चीन की स्थिति यह है कि ताइवान उसका ही टूटा हुआ प्रांत है और समय आने पर इसे देश की मुख्य सीमा तक ले जाया जाना चाहिए। लेकिन ताइवान के नेताओं का स्पष्ट कहना है कि यह एक संप्रभु राष्ट्र है।

पोम्पियो ने शनिवार को एक बयान में कहा, “पिछले कई दशकों में, हमारे विदेश विभाग ने हमारे राजदूतों, राजनयिक सेवा के सदस्यों और उनके ताइवान के समकक्षों के साथ बातचीत करने के लिए जटिल आंतरिक प्रतिबंध लगाए।” लेकिन अब विदेश मंत्रालय ताइवान के साथ राजनयिक स्तर पर और अन्य स्तरों पर संपर्क कायम करने पर लगे प्रतिबंधों को समाप्त कर रहा है।

संयुक्त राज्य अमेरिका ने 1949 में गृह युद्ध के अंत में चीन से अपने अलगाव के बाद से ताइवान के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए रखा है। लेकिन हाल के दिनों में, उसने चीन से दुश्मनी से बचने के लिए ताइवान के साथ अपनी दोस्ती को प्रदर्शित करने से परहेज किया है।

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पोम्पियो ने कहा, अमेरिका दुनिया भर में अनौपचारिक रूप से साझेदारों के साथ रिश्ते कायम रखता है और इसमें ताइवान कोई अपवाद नहीं है। पोम्पियो ने कहा, हमारे दो लोकतंत्र व्यक्तिगत स्वतंत्रता, कानून के शासन और मानव की गरिमा का सम्मान करने वाले समान मूल्यों को साझा करें।

आज का बयान यह मानता है कि अमेरिका-ताइवान के रिश्ते को हमारी नौकरशाही के खुद के प्रतिबंधों से बचना चाहिए। इन दिनों ताइवान से आपसी रिश्तों को बढ़ाने की अमेरिका लगातार कोशिश कर रहा है। बीते अगस्त में स्वास्थ्य एवं मानव सेवा मंत्री एलेक्स एजार ताइवान गए थे। 2014 के बाद ताइवान जाने वाले वे अमेरिकी कैबिनेट के पहले सदस्य थे।

ताइवान के विदेश मंत्री जौशीह जोसेफ वू ने ट्वीट कर पोम्पियो की इस घोषणा का स्वागत करते हुए कहा, अमेरिकी झंडा हमारे साझा मूल्यों, साझा हितों और आजादी व लोकतंत्र में अटूट विश्वास पर आधारित है। हम दुनिया की बेहतरी के लिए काम करते रहेंगे।

चीनी सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने कहा, “ऐसा लगता है कि पोम्पेओ अमेरिका के साथ द्विपक्षीय रिश्ते को खराब करना चाहता है।” वैश्विक शांति से उनका कोई मतलब नहीं है। यह कदम अवांछित विवाद पैदा करेगा।

वहीं, चाइना ग्लोबल टेलीविजन नेटवर्क ने कहा, यह आने वाले अमेरिकी प्रशासन के खिलाफ कायरतापूर्ण कार्रवाई है। डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन कार्यालय छोड़ने से पहले इस तरह के क्षुद्र कार्य कर रहे हैं। ऐसा कदम चीन-अमेरिका के शांति प्रयासों को खतरे में डालना है।

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