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चीन ने बीबीसी पर फिर साधा निशाना, अफवाहें फैलाना और साख बिगाड़ने का लगाया आरोप

चीन ने बीबीसी पर एक बार फिर सख्ती दिखाई है। इस बार चीन ने बीबीसी के संवाददाता जॉन सडवर्थ के चीन छोड़े जाने के तरीकों पर सवाल खड़े किए है। शुक्रवार 2 अप्रैल को चीन की विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा कि जॉन सडवर्थ ने अनौपचारिक ढंग से चीन छोड़कर चले गए। उन्होंने सक्षम प्राधिकारियों को इसकी सूचना नहीं दी, और न ही औपचारिकताएं पूरी की। हालांकि बीबीसी ने इस बात की जानकारी अपने ट्वविटर हैंडल पर एक पोस्ट करके दी थी।

बीबीसी ने 31 मार्च को यह जानकारी दी थी कि उनके संवाददाता जॉन सडवर्थ बीजिंग से ताइवाइ शिफ्ट हो रहे है। बीबीसी की टीम ने कहा था कि “चीन संवाददाता रहते हुए जॉन सडवर्थ ने जो क़ाबिले-तारीफ़ काम किया, उस पर संस्थान को गर्व है। जॉन ने उन सच्चाईयों को चीन से बाहर लाने का काम किया, जिन्हें चीनी प्रशासन दुनिया तक नहीं पहुँचने देना चाहता था।” बीबीसी की खबर के अनुसार हुआ चुनयिंग ने कहा कि ‘उन्हें (जॉन सडवर्थ) अगर अपनी सुरक्षा की चिंता थी, तो उन्हें पुलिस से संपर्क करना चाहिए था। पर उन्होंने भागने का निर्णय किया। क्यों? वो इतनी जल्दबाज़ी में चीन से क्यों चले गये? उन्हें किस बात का डर था? हमें इसकी एक ही वजह समझ आती है, वो है अपराधबोध-ग्रस्त होना।”

चीन ने जॉन सडवर्थ पर कोविड़-19 और शिनजियांग प्रांत को लेकर फर्जी खबर दिए जाने का आरोप लगाया है। हुआ चुनयिंग ने बीबीसी पर आरोप लगाते हुए कहा कि बीबीसी जानबूझकर चीन को निशाना बना रहा है। चीनी सरकार ने जॉन सडवर्थ का प्रेस कार्ड रद्द कर दिया है। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा कि जॉन सडवर्थ ने चीन से जाने के बाद, जिस तरह चीन की कम्युनिस्ट पार्टी पर आरोप मढ़ने की कोशिश की, वो एक बढ़िया उदाहरण है कि कैसे तथ्यों से छेड़छाड़ कर दूसरों पर आरोप थोपे जाते हैं। उन्होंने कहा, “चीन को आप पसंद करें या ना करें, लेकिन हम आपको अफ़वाहें फैलाने और चीन की साख पर धब्बा लगाने की अनुमति नहीं देंगे। हम दूसरे देशों से चीन में रिपोर्टिंग करने आये पत्रकारों को सुविधाएं देते रहे हैं, उनकी मदद करते रहे हैं।” इससे पहले चीन ने बीबीसी पर कुछ दिनों के लिए बैन लगा दिया था। यह दूसरी बार है जब चीन किसी विदेशी मीडिया को लेकर बौखलाया हुआ है।

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