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विवादित प्रत्यर्पण बिल को वापस लेने पर राजी हुई कैरी लैम

हांगकांग में लोकतंत्र समर्थकों के चल रहे हिंसक प्रदर्शनों के थमने की अब आस जगने लगी है। दरअसल ,  हांगकांग की नेता और चीफ़ एग्ज़िक्यूटिव कैरी लैम द्वारा 4 अगस्त ,बुधवार को घोषणा की गयी कि विवादित प्रत्यर्पण विधेयक को वापस लिया जाएगा। इस विधेयक के चलते शहर में लोकतंत्र के समर्थन में पिछले तीन महीनों से रैलियां और  हिंसक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इस घोषणा के साथ ही मुख्य कार्यकारी कैरी लैम प्रदर्शनकारियों की पांच प्रमुख मांगों में से एक के आगे झुक गईं है। विधेयक को वापस लेने पर कई महीनों के इनकार करने के बाद लैम अंतत: मान गईं और उन्होंने सभी से शांति बनाए रखने की अपील की। इस घोषणा से पहले सोमवार को कैरी लैम का एक ऑडियो लीक हो गया था जिसमें वो काफ़ी दुखी स्वर में अपने इस्तीफ़े की बात कह रही थीं। लैम की ओर से बुधवार को जारी किया गया वीडियो संदेश उनके हाल ही के बयानों की तुलना में अधिक शांत था। लैम द्वारा कहा गया कि ”इस बात से फ़र्क नहीं पड़ता कि लोगों को सरकार के फ़ैसले से किस तरह की असहमतियां हैं, लेकिन किसी भी समस्या को हल करने के लिए हिंसा का रास्ता नहीं अपनाया जा सकता।”
दरअसल विधेयक में किसी अपराध के संदिग्ध को चीन को प्रत्यर्पित करने का प्रावधान था। लैम ने अपने कार्यालय से जारी एक वीडियो में कहा, “सरकार लोगों की चिंता का निपटारा करने के लिए औपचारिक तरीके से इस विधेयक को वापस लेगी।” स्थानीय मीडिया में उम्मीद जताई गई है कि प्रत्यर्पण विधेयक को वापस लेने की मांग मानने से संकट खत्म हो जाएगा। इन खबरों के बाद हांगकांग का शेयर बाजार दोपहर के कारोबार में लगभग चार प्रतिशत तक बढ़ा। हालांकि लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ताओं ने अपने अभियान की शेष मांगों को मानने का दबाव बनाने के लिए आक्रोश एवं निश्चय के साथ आंदोलन को अब भी फिर रखा हुआ है । प्रमुख कार्यकर्ता जोशुआ वोंग ने कहा ,कि बिल को वापस लेना एक बहुत ही देर से लिया गया छोटा क़दम है। वोंग को पिछले हफ्ते पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उन्होंने कहा, “हम दुनिया से इस चाल के प्रति सतर्क रहने और हांगकांग एवं चीन सरकार के बहकावे में नहीं आने की अपील करते हैं। वास्तव में उन्होंने कुछ भी नहीं माना है और पूर्ण कठोर पाबंदी लागू करने की तैयारी में है।”  लाखों लोगों के सड़कों पर उतर जाने के बाद लैम ने विधेयक को पारित कराने के प्रयासों को रोक दिया था लेकिन इसको औपचारिक रूप से वापस लेने की इस घोषणा ने अब लोगो के मन में एक बड़ी उम्मीद जगा दी है।
धीरे धीरे यह आंदोलन एक व्यापक अभियान के तौर पर उभरने लगा जिसमें प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कथित क्रूरता में स्वतंत्र जांच, गिरफ्तार किए गए लोगों को रिहा करने और प्रदर्शनकारियों को दंगाई कहे जाने का बयान वापस लेने की मांग शामिल की गई। प्रदर्शनकारियों की अन्य मांग यह थी कि हांगकांग के लोगों को अपना नेता सीधे चुनने की इजाजत हो। माना जा रहा है कि यह मांग चीन को नागवार भी गुजर सकती है।

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