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हड़तालों से हड़कंप में ब्रिटेन

ब्रिटेन में इन दिनों हड़तालों का दौर चल रहा है। इस महीने 07 तारीख़ को पहली हड़ताल शुरू हुई थी। 07 से 31 दिसंबर के बीच एक भी दिन ऐसा नहीं है , जब किसी ना किसी सेक्टर के लोग हड़ताल पर ना जा रहे हों। दरअसल देश में स्वास्थ्य सेवा, रेलवे, हवाई अड्डे के कर्मचारी, शिक्षा क्षेत्र, ऊर्जा क्षेत्र, डाकघर और अन्य सरकारी कर्मचारी हड़ताल पर चले गए हैं। इनमें से प्रत्येक समूह की अलग-अलग समस्याएं हैं, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण मांग विकास की है। कोरोना और कई देशों की आपसी जंगो के कारण बढ़ती महंगाई का मुकाबला करने के लिए लाखों मजदूर वेतन वृद्धि की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं। इस विरोध – प्रद्रशन में नर्सों के भी शामिल होने से इसे नया आयाम मिल गया है। नए प्रधानमंत्री बने ऋषि सुनक के सामने इन हड़तालों की वजह से चुनौतियों का पहाड़ खड़ा हो गया है। ऐसे में कहा जा रहा है कि इन हड़तालों से पार पाना ऋषि सुनक के लिए किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं है।

हड़ताल की योजना

ब्रिटिश अनुशासन का पालन करते हुए हड़तालों को ठीक से निर्धारित किया गया है। ये आंदोलन सही मायने में 7 दिसंबर से शुरू हुए थे। 7 और 8 को शिक्षा विभाग के साढ़े पांच हजार कर्मचारी हड़ताल पर चले गए। अगले दिन बस सेवा कर्मचारी और रॉयल मेल डाक कर्मचारी हड़ताल पर चले गए। इसके बाद ही स्वास्थ्य विभाग ने 12 दिसंबर से हड़ताल शुरू कर दी है। उत्तरी आयरलैंड में ‘आवश्यक सेवाओं’ के रूप में वर्गीकृत एम्बुलेंस कर्मचारी हड़ताल पर चले गए। इंग्लैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड में लगभग 1 लाख नर्स विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरीं।

हड़ताल होना परेशानी क्यों ?

पूरा ब्रिटेन इस समय क्रिसमस की छुट्टी के मूड में है। इन दिनों अधिक से अधिक लोग हवाई, रेल, बस से यात्रा कर रहे हैं। जिसके कारण कुछ विशेष संगठनों के लिए हड़ताल बुलाकर सरकार पर और दबाव बनाना संभव हो गया है। सत्ताधारी पार्टी प्रधानमंत्री पद की कुर्सी लगातार बदलती आर्थिक नीतियों के कारण पहले ही अपनी लोकप्रियता खो चुकी है। वहीं हो रही हड़तालों ने आम लोगों और नेताओं के बीच बढ़ती खाई को और बढ़ाने का काम किया है।

क्या नर्सों की हड़ताल वाजिब

ब्रिटेन में ‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा’ के इतिहास में पहली बार देश भर की नर्सें हड़ताल पर गई हैं। खास बात यह है कि हड़ताल का फैसला लोकतांत्रिक तरीके से लिया गया है। रॉयल कॉलेज ऑफ नर्सिंग (आरसीएन), जो सभी सरकारी अस्पतालों और बड़े निजी अस्पतालों को नर्स उपलब्ध कराता है, ने देश भर में 3 लाख एसोसिएशन सदस्यों का सर्वेक्षण किया। इसने सभी को बढ़ती समस्याओं के लिए हड़ताल को हथियार बनाने के लिए प्रेरित किया। कई लोगों ने सरकार से इस हड़ताल को होने से रोकने की कोशिश करने की अपील की है। लेकिन चूंकि वार्ता अभी तक सफल नहीं हुई है, नर्सों के पास हड़ताल पर जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

क्या हैं नर्सों की मांगें?

नर्सों की मुख्य मांग वर्कलोड और काम के बोझ को कम करना है। पिछले कुछ वर्षों में अपर्याप्त पारिश्रमिक के कारण कई लोगों ने यह नौकरी छोड़ दी है। फिलीपींस, भारत, ब्राजील और अन्य देशों से बड़ी संख्या में नर्सें हैं। इसका कारण यह है कि अधिकांश ब्रिटिश नागरिक इस पेशे के प्रति उत्सुक नहीं हैं। रोजाना 14-15 घंटे काम करना एक आम बात हो गई है। नर्सों की शिकायत है कि उन्हें अक्सर मरीजों के लिए बना फूड खाना पड़ता है। हालांकि, बढ़े हुए काम के अनुपात में मजदूरी में वृद्धि नहीं हुई है। इन नर्सों के सामने सवाल है कि बढ़ती महंगाई के बीच अपनी जिंदगी को कैसे मैनेज करें।

आम ब्रिटिश नागरिकों की हड़ताल के बारे में क्या राय है?

फ्लोरेंस नाइटिंगेल की परंपरा में नर्सों के लिए ब्रिटेन में सहानुभूति की भावना रहती है। इसलिए यह तस्वीर है कि अपनी जायज मांगों को लेकर हड़ताल पर जाने वाली नर्सों को नागरिकों का समर्थन मिल रहा है। हड़ताल के पहले दिन आम नागरिकों ने सड़कों पर प्रदर्शन कर रही नर्सों के लिए चाय और भोजन की व्यवस्था की थी। हड़ताल के पहले दिन आउट पेशेंट और गैर-जरूरी सर्जरी प्रभावित हुई है। क्रिसमस की छुट्टियों को लेकर ब्रिटेन में हड़ताल से जनजीवन अस्त-व्यस्त है। हालांकि आम जनता की सहानुभूति हड़तालियों के पक्ष में नजर आ रही है।

हड़ताल पर ब्रिटेन सरकार का क्या रुख है?

अन्य कर्मचारियों की तुलना में नर्सों की हड़ताल को सबसे गंभीर मुद्दा माना जा रहा है। RCN सरकार के साथ बातचीत सफल न होने के बाद प्रधान मंत्री ऋषि सुनक ने अब सीधी चेतावनी देना शुरू कर दिया है। उन्होंने आवश्यक सेवा कर्मियों को अगले साल हड़ताल पर जाने से रोकने के लिए एक कानून लाने की पहल शुरू कर दी है। उन्होंने ट्रेड यूनियनों से अपनी हड़ताल तत्काल वापस लेने की अपील की है। उनके रुख के बाद विपक्षी लेबर पार्टी ने आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा, “नर्सों की हड़ताल सुनक सरकार के लिए शर्म की बात है।”

सुनक और पार्टी के लिए मुश्किल होगी यह हड़ताल

ब्रिटेन में आम चुनाव अभी 2 साल दूर हैं, लेकिन ब्रिटेन के सतर्क मतदाता हड़ताल और सुनक की प्रतिक्रिया को आसानी से भूल नहीं पाएंगे। इसके विपरीत हड़ताल विरोधी कानून होगा तो विरोध और बढ़ेगा जिससे जनसेवाएं प्रभावित होने की संभावना है। यह सत्ताधारी पार्टी के लिए एक वेक-अप कॉल है, जो दो दशकों से अधिक समय से सत्ता में है। सुनक के सामने कई चुनौतियां हैं जैसे ऊर्जा संकट को सुलझाना, महंगाई को कम करना, देश के वित्तीय संतुलन को ठीक करना। यदि मध्यस्थता के माध्यम से हड़ताल का समाधान नहीं किया गया तो भविष्य में इन चुनौतियों के और गहराने की संभावना है।

यह भी पढ़ें : UK में 106 साल के इतिहास में पहली बार नर्सिंग स्टाफ ने की हड़ताल

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