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खाड़ी में फिर काले बादल

ईरान के रुख से साफ है कि वह किसी भी दशा में अमेरिका के आगे झुकने को तैयार नहीं है। वह अपनी शर्तों पर ही अमेरिका से किसी बातचीत के लिए तैयार है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि उस पर लगे सभी आर्थिक प्रतिबंध हटाए जाएं। ईरान ने यूरोपीय देशों को भी दो टूक शब्दों में आगाह किया है कि यदि वे परमाणु समझौते से हटते हैं, तो ईरान भी अगला कदम उठाने को मजबूर होगा। दूसरी तरफ अमेरिका निरंतर ईरान पर अपनी शर्तों के अनुरूप झुकने के लिए दबाव बनाए हुए है। टकराव की यह स्थिति लंबे समय से निरंतर चली आ रही है। इसके चलते खाड़ी में युद्ध की आशंकाएं जन्म लेती रही हैं। ईरान के ताजा रुख से भी एक बार फिर खाड़ी में युद्ध के बादल मंडराने की आशंकाएं बढ़ गई हैं।

पिछले चार महीनों से जारी ईरान और अमेरिका की जुबानी जंग के बीच अब अचानक ईरान ने धमकी दे दी है कि अगर अमेरिका की वजह से न्यूक्लियर डील फेल होती है, तो दुनिया उसके अगले कदम के लिए तैयार रहे। जाहिर है ईरान के इस अगले कदम का मतलब है परमाणु जंग, जो खाड़ी में कयामत ला देगी। खाड़ी में एक बार फिर हालात बिगड़ने लगे हैं। अमेरिकी दबाव में यूरोप ने ईरान का साथ छोड़ दिया है। साथ ही अमेरिका के खिलाफ ईरान ने ‘परमाणु कदम’ उठाने की चेतावनी दी है। दुनिया के लिए दुखद है कि जब-जब लगने लगता है कि खाड़ी में हालात बेहतर हो रहे हैं तब-तब फिर कुछ ना कुछ ऐसा हो जाता है कि घूम-फिर कर सुई युद्ध पर अटक जाती है।

दरअसल, ईरान को उम्मीद थी कि अगस्त के आखिरी हफ्ते में फ्रांस में हुई जी-7 देशों की समिट में जेसीपीए यानी ज्वाइंट काम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन में उसकी परमाणु डील को लेकर न सिर्फ चर्चा होगी बल्कि कोई रास्ता भी निकलेगा। फ्रांस ने कोशिश भी की और ऐन मौके पर ईरान के विदेश मंत्री को पेरिस बुलाकर उनसे बात भी की मगर कोई नतीजा नहीं निकला। उल्टा अमेरिका ईरानी विदेशमंत्री को फ्रांस बुलाए जाने पर नाराज हो गए। जेसीपीए में ईरान के साथ जो फाइव प्लस वन देश शामिल हैं उनमें फ्रांस भी है। फ्रांस लगातार कोशिश कर रहा है कि खाड़ी के हालात बेहतर हो जाएं, मगर अमेरिका के डील से अलग होने और ईरान पर कई महीनों से लगे आर्थिक प्रतिबंधों से अब राष्ट्रपति रुहानी काफी गुस्से में हैं और वे इस डील में शामिल फ्रांस को आगाह कर रहे हैं कि यूरोपीय देश परमाणु समझौते से हटते हैं, तो ईरान भी अपना अगला कदम उठाने के लिए मजबूर हो जाएगा।

दुनिया की चिंता इस बात को लेकर है कि ईरान के अगले कदम का मतलब है उसका परमाणु कार्यक्रम। ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने ये धमकी फ्रांसिसी राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों से फोन पर बातचीत करते हुए दी है रुहानी ने आगाह किया कि अगर यूरोपीय देशों ने वक्त रहते नई शर्तों पर बात नहीं की तो वो 2015 के परमाणु सौदे से हटकर एक कड़ा कदम उठाएंगे। ईरान ने धमकी दी है कि यूरोपीय देश जल्द से जल्द उसे ये बताएं कि वो किस तरह अपने कच्चे तेल को वैश्विक बाजार में बेचे।

उल्लेखनीय है कि ईरान के सरकारी प्रवक्ता अली रबीई के मुताबिक ईरान का तेल खरीदा जाना चाहिए और इस पैसे की सुलभ वापसी होना चाहिए। यही हमारी बातचीत का एजेंडा है। हालांकि अभी तक ये साफ नहीं हुआ है कि किन शर्तों पर बातचीत होनी है। यूरोपीय देश अगर इस सप्ताह खत्म हो रही समय सीमा के भीतर नई शर्तों पर बात नहीं करते तो हम 2015 के परमाणु सौदे से हटकर एक कड़ा कदम उठाने के लिए मजबूर होंगे।

ईरान ने चार साल पहले दुनिया के पांच ताकतवर देशों से परमाणु समझौता किया था। जिनमें अमेरिका, चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और जर्मनी शामिल थे। मगर पिछले साल डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते से अमेरिका को बाहर निकालकर ईरान पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए थे जिसके चलते ईरान अपना कच्चा तेल नहीं बेच पा रहा है। अमेरिका ने साफ कहा था कि ईरान का कच्चा तेल खरीदने वालों को भी अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा।

ईरान अपने परमाणु समझौते को बचाने के लिए लगातार कोशिशें कर रहा है। डेडलाइन करीब आने से पहले ईरानी विदेश मंत्री जावाद जरीफ मास्को में हैं, जबकि उप विदेश मंत्री फ्रांस में बातचीत कर रहे हैं। जानकार मान रहे हैं कि ये ईरान की आखिरी कोशिश है। जिसके बाद ईरान आर-पार के मूड में आ जाएगा। ये धमकी ईरानी विदेश मंत्री दे रहे हैं, मगर शब्द राष्ट्रपति रुहानी के हैं। मतलब साफ है कि ईरान किसी भी कीमत पर अमेरिका के सामने झुकने को तैयार नहीं है।

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