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शादी से पहले शारीरिक संबंध पर प्रतिबंध

दुनिया में सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी वाले देश इंडोनेशिया ने अपनी दंड संहिता में बहु-प्रतीक्षित एवं विवादास्पद संशोधन को पारित कर दिया है, जिसके तहत विवाहेतर यौन संबंध दंडनीय अपराध है जो देश के नागरिकों तथा विदेशियों पर समान रूप से लागू होता है

दुनिया तेजी से बदलाव की ओर बढ़ रही है। कई देशों में तो बदलाव की ऐसी बयार चली कि लोगों को यकीन ही नहीं हो रहा है। भारत में विवाहेतर संबंध अब बेशक अपराध नहीं रहा लेकिन दुनिया के ऐसे कई देश हैं जहां पर कड़े कानून हैं। इस बीच दुनिया में सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी वाले देश इंडोनेशिया ने अपनी दंड संहिता में बहु-प्रतीक्षित एवं विवादास्पद संशोधन को पारित कर दिया है, जिसके तहत विवाहेतर यौन संबंध दंडनीय अपराध है जो देश के नागरिकों तथा विदेशियों पर समान रूप से लागू होता है। इस कानून के तहत अब शादी से पहले सेक्स करना अपराध माना जाएगा।

‘द एसोसिएटेड प्रेस’ के पास मौजूद संशोधित दंड संहिता की एक प्रति के अनुसार, विवाहेतर यौन संबंध का दोषी पाए जाने पर एक साल की जेल की सजा का प्रावधान है, लेकिन व्यभिचार का आरोप पति, माता-पिता या बच्चों द्वारा दर्ज की गई पुलिस शिकायत पर आधारित होना चाहिए। दरअसल कानून में बदलाव करते हुए संसद ने अपनी दंड संहिता में शादी से पहले किसी के साथ बनाए गए शारीरिक संबंध को गैर-कानूनी और अपराध की श्रेणी में डाल दिया है। इस बिल के लागू होने से इंडोनेशिया में अब केवल पति-पत्नी ही शारीरिक संबंध बना सकते हैं। अगर शादी-शुदा कपल अपने पार्टनर के अतिरिक्त किसी और के साथ शारीरिक संबंध बनाते हैं तो उसे सजा दी जाएगी। इस नए कानून में शादी से पहले सेक्स और शादी के बाद किसी अन्य के साथ शारीरिक संबंध, अविवाहित जोड़ों को शादी से पहले लिव इन में रहना, राष्ट्रपति और राष्ट्रीय प्रतीकों जैसे राष्ट्रीय ध्वज या राष्ट्रगान का ‘अपमान करना’ भी दंडनीय अपराध माना जाएगा। लिव इन में रहने के अपराध में छह महीने तक की सजा का प्रावधान किया गया है।

इस क्रिमिनल कोड के आर्टिकल 413 के पैराग्राफ 1 में लिखा गया है कि यदि कोई भी व्यक्ति किसी ऐसे व्यक्ति से सेक्स करता है जो कि उसका पति या पत्नी नहीं है तो उसे व्यभिचार का दोषी ठहराया जाएगा। ऐसी स्थिति में उस पर जुर्माना भी लगाया जाएगा। कानून के तहत उसे एक साल की सजा भी सुनाई जाएगी। हालांकि इसमें एक शर्त भी रखी गई है कि यह कार्रवाई तभी संभव होगी जब ऐसा करने वाले के पति या पत्नी व्यभिचार की शिकायत दर्ज करवाते हैं या फिर आरोपी के नाबालिग होने की स्थिति में उसके माता-पिता की ओर से शिकायत दर्ज कराई जाएगी। इस कानून को विधेयक के रूप में संसद ने नवंबर में अंतिम रूप दिया था और अब सांसदों ने इसे पारित तो कर दिया है। लेकिन इस कानून के विरोध में एक बार फिर देश की जनता सड़कों पर उतर आई है।

शिकायत ली जा सकेगी वापस
ट्रायल कोर्ट में कार्यवाही शुरू होने से पूर्व आर्टिकल 144 के तहत ऐसी शिकायतों को वापस भी ले सकते हैं। इंडोनेशिया के कानून मंत्री एडवर्ड उमर शरीफ ने कानून के बारे में कहा, ‘हमें गर्व है कि हम ऐसा क्रिमिनल कोड लाने वाले हैं जो इंडोनेशिया के संस्कारों को मानने वाला है।’

एलजीबीटी समुदाय पर पड़ेगा प्रभाव
इंडोनेशिया दक्षिण पूर्व एशिया और ओशिनिया में स्थित एक विशाल देश है। इस देश की जनसंख्या लगभग 27 करोड़ है, यह दुनिया का चौथा सबसे अधिक आबादी और दुनिया में सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश है। मुस्लिम बाहुल्य देश इंडोनेशिया में ऐसे कई कानून हैं जो महिलाओं, अल्पसंख्यकों और एलजीबीटी कम्युनिटी के लोगों के साथ बड़े स्तर पर भेदभाव को दर्शाते हैं। एलजीबीटी समुदाय एक ओर खुद के अधिकारों के लिए पूरी दुनिया में लड़ रहा है तो वहीं इंडोनेशिया के कानून से वो काफी हद तक निराश हुआ है। क्योंकि इस संशोधन से इंडोनेशिया में एलजीबीटी समुदाय पर बहुत प्रभाव पड़ सकता है। इंडोनेशिया में समलैंगिक विवाह को भी मंजूरी नहीं है। संसद जो नया कानून लाई है वह इंडोनेशिया के नागरिकों पर तो लागू होगा ही साथ ही जो इस देश की यात्रा करेगा उसे भी इसका पालन करना होगा। इसलिए अगर आप इंडोनेशिया घूमने की सोच रहे हैं तो पहले पूरी जानकारी हासिल कर लें।

इस कानून का हो रहा विरोध
इस नए कानून से लोगों में डर लग रहा है कि अगर उनके पास मैरिज सर्टिफिकेट नहीं होगा तो वे किसी होटल में भी ठहर नहीं सकेंगे। अनमैरिड कपल के लिए तो और भी समस्या है।
इंडोनेशिया और इसके बाहर कई लोग इस कानून को बेहद सख्त बताते हुए इसका विरोध कर रहे हैं। टूरिज्म सेक्टर के लोग तो सरकार के इस फैसले के विरोध में सड़कों पर उतर आए हैं।
गौरतलब है कि इंडोनेशिया में कोविड से टूरिज्म सेक्टर को काफी नुकसान हुआ है जिससे उभरने के प्रयास जारी थे लेकिन अब इस नए संशोधन से लोगों को लगता है कि टूरिज्म इंडस्ट्री तबाह हो जाएगी। टूरिज्म सेक्टर ही क्यों, आम लोगों को भी लग रहा है कि नया कानून दुनिया में इंडोनेशिया की इमेज खराब करेगा और इसका सीधा असर लाखों लोगों के रोजगार पर पड़ेगा। एक ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट ने कहा- ‘इससे बुरा और कुछ नहीं हो सकता। फिलहाल सरकार ने अब तक ऑफिशियली इस कानून पर कोई सफाई नहीं दी है।’ हालांकि इस कानून का विरोध पहली बार नहीं हो रहा है। इससे पहले इंडोनेशिया सरकार ने लगभग तीन साल पहले भी यह संशोधन लागू करने की तैयारी की थी। मगर हजारों लोगों ने सड़कों पर उतरकर इसका विरोध किया था। प्रदर्शनकारियों ने इसे फ्रीडम ऑफ स्पीच का हनन करार दिया था। लेकिन अब बिल पारित करते हुए कानून और मानवाधिकार मंत्री यासोना लाओली ने कहा, ‘हमने अहम मुद्दों और अलग-अलग रायों को समायोजित करने के लिए अपनी पूरी कोशिश की है, जिन पर बहस हुई थी। हालांकि यह हमारे लिए दंड संहिता संशोधन पर एक ऐतिहासिक निर्णय लेने और औपनिवेशिक आपराधिक संहिता को पीछे छोड़ने का समय है।’
देश के औपनिवेशिक युग के कानूनों को संशोधित करने का काम दशकों से जारी रहा है और हाल के वर्षों में इसके खिलाफ बड़े पैमाने पर सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन देखने को मिलते आए हैं, लेकिन इस मुद्दे पर इस साल सार्वजनिक स्तर पर दुनिया के तीसरे सबसे बड़े लोकतंत्र में एक बड़ी चुप्पी सामने आ रही है।

गर्भपात भी अपराध
इस नए संशोधन के अनुसार गर्भनिरोधक और गर्भपात को भी अवैध बना दिया गया है। इसके लिए तीन साल की जेल का प्रावधान है। अब से गर्भपात को अपराध माना जाएगा। लेकिन कुछ स्थितियों में उन महिलाओं को जिन्हें गर्भ कायम रखने से उनकी जान को खतरा हो या जो बलात्कार के बाद गर्भवती हो गई हों उन्हें थोड़ी बहुत छूट जरूर दी गई है। छूट में गर्भपात के लिए कुछ शर्त रखी गई है जैसे भ्रूण 12 सप्ताह से कम उम्र का हो। जैसा कि 2004 के ‘मेडिकल प्रैक्टिस’ कानून में पहले से ही विनियमित किया गया है। वहीं, इस नए संशोधन में देश में गर्भनिरोधक या धार्मिक निंदा को भी अवैध करार दिया गया है। इसके लिए तीन साल की जेल का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही गर्भपात को भी अपराध की श्रेणी में डाल दिया गया है। मगर इसमें उन महिलाओं को जिन्हें गर्भ कायम रखने से उनकी जान को खतरा हो या जो बलात्कार के बाद गर्भवती हो गई हों उन्हें अपवाद माना गया है। मगर गर्भपात के लिए यह भी शर्त रखी गई है कि भ्रूण 12 सप्ताह से कम उम्र का हो।

इन देशों में है विवाहेतर संबंध गैरकानूनी

सऊदी अरब, सोमालिया, मिस्र, फिलीपींस और ईरान में विवाहेतर संबंध बनाना गैरकानूनी है। ईरान में जहां इस मामले में फांसी तक की सजा का प्रावधान है वहीं मिस्र में महिलाओं को दो वर्ष की सजा मिल सकती है। जबकि इस मामले में दोषी साबित होने पर पुरुष को महज छह महीने तक की ही सजा हो सकती है। सऊदी अरब में दोषी को पत्थर से मारने की सजा है। अगर पत्थर से मारने के दौरान दोषी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो उसे अपराधी की श्रेणी में नहीं माना जाएगा। इसके अलावा ताइवान में विवाहेतर संबंध बनाने पर एक वर्ष की सजा मिल सकती है। अगर दोषी पुरुष सार्वजनिक माफी मांग लेता है तो उसे छोड़ दिया जाता है जबकि महिला को कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ती है। अमेरिका के 21 राज्यों में विवाहेतर संबंध अपराध माना गया है जबकि कुछ राज्यों में इसे अपराध की श्रेणी में नहीं रखा गया है। अमेरिका के कुछ राज्यों में विवाहेतर संबंध गंभीर अपराध है। यहां फांसी तक की सजा का प्रावधान है।

इन देशों में विवाहेतर संबंध नही है अपराध
चीन, जापान, तुर्की, दक्षिण कोरिया, यूरोप, लैटिन अमरीकी देश और ऑस्ट्रेलिया में विवाहेतर संबंध को अपराध नहीं माना गया है। इसके अलावा एशिया के कई अन्य देशों में भी व्यभिचार यानी शादी के बाद गैर महिला-पुरुष का शारीरिक संबंध बनाना अपराध नहीं है।

क्यों पड़ी इस कानून की जरूरत

1. इंडोनेशिया को आमतौर पर लिबरल सोसायटी माना जाता है। अब नए क्रिमिनल कोड को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इसकी वजह यह है कि इस दक्षिण-पूर्व एशियाई में कुछ लोग नए कोड को ईरान की तरह मॉरेलिटी पुलिसिंग की तरफ एक कदम मान रहे हैं। दूसरी तरफ, सरकार का कहना है कि वह क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम को बिल्कुल नया कलेवर देना चाहती है ताकि तमाम चीजें बदलते वक्त के हिसाब से और अपडेट हों।

2. सरकार का कहना है फिलहाल, जो क्रिमिनल कोड या आपराधिक कानून व्यवस्था है वह गुलामी के दौर की है। इसमें बदलाव की सख्त जरूरत है। हमें बदलते हुए वक्त के साथ अपने कानून को भी बदलना होगा।

3. खास बात यह है कि पिछले साल सरकार ने जब इस बिल के बारे में पहली बार जानकारी दी थी तभी से इसके खिलाफ विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए थे।

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