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आंग सान सू की सजा में फिर हुआ बदलाव

म्यांमार की लोकप्रिय नेता आंग सान सू की को वहां की अदालत ने चार साल की कैद में डाल दिया है। इस वजह से वे पूरे संसार में चर्चा का विषय बन गई हैं। ये पहली बार नहीं है जब किसी घटना की वजह से वह सुर्खियों में हैं। उनका चर्चा में आना उनके इतिहास से जुड़ा है। म्यांमार में दशकों तक सैन्य शासन के खिलाफ लोकतंत्र के लिए उन्होंने लंबा संघर्ष किया है। उनकी वैश्विक छवि में कभी उतार आए तो कभी चढ़ाव आए। ऐसे में उनकी गिरफ्तारी का सुर्खियों में आना तय था।

म्यांमार की निर्वासित नेता आंग सान सू की को म्यांमार की एक अदालत ने चार साल और जेल की सजा सुनाई है। उन्हें कोरोना नियमों का उल्लंघन करने और अवैध रूप से वॉकी-टॉकी आयात करने का दोषी पाया गया था।

सू की को इससे पहले छह दिसंबर को कोरोना नियमों का उल्लंघन करने और लोगों को भड़काने के दो अन्य आरोपों में चार साल कैद की सजा सुनाई गई थी। बाद में सजा को घटाकर दो साल कर दिया गया, और उन्हें नाय पी ताव शहर में हिरासत में रहने की अनुमति दी गई। इस बीच अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने मुकदमा की कड़ी आलोचना की है, सू की की तत्काल रिहाई की मांग की है।

नोबेल पुरस्कार विजेता 76 वर्षीय सू की दर्जनों मुकदमों का सामना कर रही हैं। जिसमें उन्हें 100 साल से ज्यादा जेल की सजा सुनाई गई है। इस बीच उन्होंने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार किया है। पिछले साल 1 फरवरी को सू की की लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को सेना ने उखाड़ फेंका था। सू की की सरकार और पार्टी के नेताओं पर तब से मुकदमा चल रहा है। सू की को तख्तापलट के दिन गिरफ्तार किया गया था, और कुछ दिनों बाद पुलिस के दस्तावेजों में कहा गया कि उसके घर की तलाशी के दौरान छह अवैध रूप से आयातित वॉकी-टॉकी पाए गए। उन्हें चार साल जेल की सजा सुनाई गई थी।

यह भी पढ़ें : म्यांमार की सर्वोच्च नेता आंग सान सू की को चार साल की जेल

म्यांमार में 2023 में चुनाव होने हैं। लेकिन आंग सान सू की की सजा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह अगले चुनाव में नहीं चल पाएंगी, क्योंकि एक नियम है कि अगर किसी व्यक्ति को दोषी ठहराया जाता है, कैद किया जाता है, तो वह देश के सर्वोच्च पद पर नहीं बैठ सकता है।

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