[gtranslate]
world

बिगड़ते संबंधों के बीच फ्रांस ने अपने नागरिकों को पाकिस्तान छोड़ने की दी सलाह

पाकिस्तान के अलग-अलग राज्यों में काफी हिंसक प्रदर्शन हो रहे है। हिंसक प्रदर्शनों को देखते हुए फ्रांस ने अपने नागरिकों को पाकिस्तान छोड़ने के लिए कहा है। इसके साथ ही उन्होंने पाकिस्तान में स्थित फ्रांसीसी कंपनियों को अपना कार्य अस्थायी रुप से बंद करने की सलाह दी है। पाकिस्तान में फ्रांस के खिलाफ पिछले कई महीनों से प्रदर्शन हो रहे है।

यह प्रदर्शन देश की राजनीतिक पार्टी तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) के बैनर तले हो रहे है। अभी तक इन प्रदर्शनों में 7 लोगों की मौत हो गई और 300 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हो गए है।

टीएलपी के मुखिया और पाकिस्तान के धार्मिक नेता साद हुसैन रिजवी और उनके समर्थकों को सोमवार 12 अप्रैल को लाहौर पुलिस ने आंतकवाद विरोधी कानून के तहत मुकदमा दर्ज किया था। जिसके बाद टीएलपी के समर्थकों ने पाकिस्तान के कई राज्यों में प्रदर्शन किए। साद हुसैन रिजवी और पार्टी के कार्यकर्ताओं के खिलाफ लाहौर पुलिस ने पाकिस्तान दंड संहिता की अलग-अलग धाराओं, आंतकवाद विरोधी कानून और लोक व्यवस्था अध्यादेश के तहत मामला दर्ज किया हैं।

दर्ज एफआईआर में कहा गया है कि इन लोगों ने देश के नागरिकों को हिंसा करने और सड़कों को जाम करने के लिए भड़काया है। साथ ही इन लोगों ने लाउडस्पीकरों से आदेश और सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के आरोप लगाए हैं।

पार्टी कार्यकर्ताओं पर आरोप है कि उन्होंने जान लेने के इरादे से पुलिस पर पत्थरबाजी की, इस पत्थरबाजी में एक पुलिसकर्मी की मौत भी हो गई थी। साद की गिरफ्तारी के बाद इस्लामाबाद और रावलपिंडी में इंटरनेट सेवा को बंद कर दिया गया था।

क्यों प्रदर्शन कर रहे थे तहरीक-ए-लब्बैक के कार्यकर्ता?

दरअसल टीएलपी के कार्यकर्ता और साद हुसैन रिजवी फ्रांस के राजदूत को देश से निकालने की मांग कर रहे थे, साथ ही वह पाकिस्तान को फ्रांस के साथ रिश्तों को खत्म करने की बात कह रहे थे्। पंरतु दूसरी तरफ इमरान सरकार ने कहा कि वह इस मुद्दे को संसद में लेकर जाएंगे, जो भी संसद तय करेगी वैसा ही होगा। साद हुसैन रिजवी मौलाना खादिम हुसैन रिजवी के बैटे है।

मौलाना खादिम और पाकिस्तान की केंद्रीय सरकार के बीच 16 नंवबर 2020 को समझौता हुआ था। मौलाना के साथ यह समझौता इसलिए किया गया था कि वह इस्लामाबाद की तरफ मार्च न करें। लेकिन समझौते का पालन नहीं हुआ, और टीएलपी ने सरकार को फ्रांस के राजदूत को वापिस भेजने के लिए 20 अप्रैल का समय दिया हैं।

यह भी पढ़े:पाकिस्तान की सियासत में बड़ा उलटफेर , खतरे में इमरान 

 

खादिम रिजवी का निधन पिछले साल हो गया था, जिसके बाद पार्टी के सीनियर कार्यकर्ताओं ने साद हुसैन रिजवी का पार्टी का प्रमुख बनाया। साद को लाहौर पुलिस ने उस समय गिरफ्तार किया जब वह एक दाह संस्कार में शामिल होने के लिए जा रहे थे।

क्यों टीएलपी नेता फ्रांस के राजदूत का विरोध कर रहे है?

फ्रांस और कुछ मुस्लिम देशों के बीच उस समय खट्टास आ गई थी,जब फ्रांस ने कई मस्जिदों और कट्टरपंथी संगठनो को बैन कर दिया था। जिसके बाद फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रो के खिलाफ प्रदर्शन होने लगे थे। पाकिस्तान में भी फ्रांस के राष्ट्रपति के खिलाफ प्रदर्शन हुए थे।

फ्रांस सरकार ने कट्टरपंथी इस्लामिक संगठनों और मस्जिदों पर बैन तब लगाना शुरु किया जब वहां इस्लामिक कट्टरपंथी ने कई हिंसक घटनाओं को अजांम दिया। पेटी सैम्युएल जो एक इतिहास के अध्यापक थे, उसका सिर कलम इसलिए कर दिया गया था कि उन्होंने अपनी क्लास में फ्रीडम ऑफ स्पीच के दौरान पैंगम्बर मुहम्मद का कार्टून दिखा दिया था।

18 वर्षीय चेचेन के एक मुस्लिम युवक ने अध्यापक का गला काट दिया था। फ्रांस की व्यंग्यात्मक पत्रिका शार्ली हैब्दो् में पैगम्बर मोहम्मद का कार्टुन बनाया था। तब कट्टरपंथियों ने शार्ली हैब्दो के ऑफिस के बाहर हमला किया था। पाकिस्तान की एक महिला मंत्री ने फ्रांस के राष्ट्रपति पर निशाना साधते हुए कहा था कि जिस तरह नाजियों ने यहूदियों के साथ व्यवहार किया था, वैसा ही फ्रांस में मुसलमानों के साथ हो रहा हैं।u

You may also like

MERA DDDD DDD DD