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चीन पर कसता अमेरिकी शिकंजा, सात चीनी कंपनियों पर बैन,ताइवान संग शुरु की रिश्तों की नई इबारत

चीन और अमेरिका के रिश्तों में खट्टास इतनी ज्यादा बढ़ गई कि अब दोनों देश एक दूसरे के व्यापरिक कार्यों में भी बाधा डालने लगे। अमेरिका ने चीन पर कार्रवाई करते हुए चीन की सात सुपरकम्प्यूटर कंपनियों पर को बैन कर दिया है और आऱोप लगाया है कि यह समूह चीन की सेना के लिए सुपरकम्प्यूटर बनाते है। गुरुवार 8 अप्रैल को अमेरिका के जो बाइडन प्रशासन ने चीन की तीन कंपनियों और नेशनल सुपरकम्प्यूटर की चार शाखाओं को ब्लैकलिस्ट कर दिया है। इससे अमेरिकी कंपनियां चीनी समूहों को तकनीक निर्यात नहीं कर सकेंगे।

अमेरिका ने अपने बयान में कहा है कि वे कंपनियां है जो चीन के लिए सुपरकम्प्यूटर बनाती है। इस सुपरकम्प्यूटर की मदद से विनाशकारी हथियार विकसित किए जा रहे है। बाइडन प्रशासन ने जिन समूहों पर प्रतिबंध लगाया है वह चीन के चिप आत्मनिर्भर योजना में मुख्य भूमिका निभाते हैं। अमेरिकी वाणिज्य सचिव जीना रायमोंडो ने कहा कि बाइडन प्रशासन ‘हर संभव सीमा तक कोशिश करके चीन को सैन्य आधुनिकिकरण के लिए अमेरिकी तकनीक के इस्तेमाल से रोकेगा।

यह पहली बार नहीं है जब अमेरिका ने चीन की कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया है, इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने दर्जनों चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया था। क्योंकि इन कंपनियों से अमेरिकी तकनीक को चीन के सेना को पहुंचाने का शक था। इसमें चीन के फोन बनाने वाली बड़ी कंपनी ख्वावे का नाम भी शामिल था। इस ब्लैकलिस्ट के तहत अमेरिका में आधारित कंपनियों पर चीनी कंपनियों को सेवाएं और उत्पाद देने से रोका गया है। लेकिन वो कंपनियां जिनका उत्पादन अमेरिका से बाहर होता है वो कंपनिया चीन के साथ लेनदेन जारी रखेंगी। ऐसी ही एक कंपनी है टीएसएमसी जो ताइवान की कंपनी है और दुनिया के सबसे बड़े सेमीकंडक्टर का उत्पादन करने वाली कंपनियों में शुमार है।

सुपरकम्प्यूटर आम कम्प्यूटर से ज्यादा तेज प्रोसेसर के होते है। इन कम्प्यूटर का इस्तेमाल जलवायु के रुझान, मौसम के पूर्वानुमान, परमाणु परीक्षणो और रिसर्च जैसे कामों के लिए किया जाता है। उच्च स्तरीय हथियार बनाने में भी इन कम्प्यूटर का प्रयोग किया जाता है। इन कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने के साथ-साथ चीन को बड़ा सदेंश देते हुए बाइडन प्रशासन ने ताइवान राजनयिकों को आगे बढ़ाने का निर्णय भी ले डाला है। ताइवान को अभी तक एक देश के रुप में यूएनओ की मान्यता नहीं मिली है। लेकिन अब अमेरिका इस पर विचार कर रहा है। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है लेकिन ताइवान खुद को एक स्वतंत्र राष्ट्र कहता है। विदेश विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि बिडेन प्रशासन द्वारा जारी किए गए दिशानिर्देशों के तहत, अमेरिकी अधिकारियों को वॉशिंगटन में सरकारी भवनों में ताइवान के प्रतिनिधियों को आमंत्रित करने या कार्य-स्तरीय बैठकों में भाग लेने की अनुमति दी जाएगी। अभी तक चीन की सीधी नाराजगी नराजगी मोल लेने से अमेरिका सामने आया है। अब लेकिन ताइवान संग उसके अपने संबंधों को मजबूत करने का ऐलान कर डाला है।

ताइवान के ‘एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन ज़ोन में चीन के युद्धक विमानों के प्रवेश करने की घटना के बाद अमेरिका ने ताइवान को अपने समर्थन की पुष्टि की थी। ताइवान के क्षेत्र में प्रवेश करने संबंधी चीन की यह कार्यवाही चीन द्वारा वर्तमान में ताइवान की लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार पर दबाव बनाने एक उपाय था। उल्लेखनीय है कि यदि चीन ताइवान पर हमला करता है तो ताइवान संबंध अधिनियम 1979 के हिस्से के रूप में अमेरिका ताइवान की सहायता के लिये प्रतिबद्ध है।

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