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दलाई लामा के चयन पर चीन को फ्री हैंड देने के मूड में नहीं है अमेरिका

​दलाई लामा के स्वास्थ्य मुद्दों को देखते हुए पिछले कुछ सालों से उनके उत्तराधिकारी के चयन का मुद्दा गरमाया हुआ है। अब इसी बीच दलाई लामा के स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच अमेरिका अब चीन के लिए कुछ सीमाएं तय करने पर विचार कर रहा है। अमेरिका चाहता है की चीन तिब्बतियों के दलाई लामा की चयन प्रकिया को बाधित न कर सके। एक वरिष्ठ अधिकारी से मिली चेतावनी और कांग्रेस में विचाराधीन एक विधेयक के जरिए अमेरिका चीन को पहले ही यह बात स्पष्ट कर देने पर विचार कर रहा है कि अगर वह उत्तराधिकारी चुनने की प्रक्रिया में हस्तक्षेप करेगा तो उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपमान झेलना पड़ेगा।
हाल ही में अमेरिका कांग्रेस ने एक बिल पेश किया है जो तिब्बती बौद्ध उत्तराधिकार प्रथाओं के साथ हस्तक्षेप करने वाले किसी भी चीनी अधिकारी पर प्रतिबंधों के लिए कहता है। पूर्व एशिया के विदेश मंत्रालय के शीर्ष अधिकारी डेविड स्टीलवेल ने कांग्रेस के समक्ष कहा कि अमेरिका तिब्बतियों की ‘अर्थपूर्ण स्वायत्तता’ के लिए दबाव बनाता रहेगा। उन्होंने आगे कहा कि पार्टी दलाई लामा की पुनर्जन्म प्रक्रिया में अपनी भूमिका का दावा करती है, यहां तक कि राष्ट्रपति शी ने भी पार्टी के सदस्यों से ‘मार्क्सवादी नास्तिकों को एकजुट करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि हम मानते हैं कि सभी समुदायों की तरह तिब्बतियों को भी स्वतंत्र रूप से अपने विश्वास का अभ्यास करने और अपने नेताओं का चयन करने का अधिकार है।
गौरतलब है कि 14 वें दलाई लामा को 84 साल की उम्र में छाती के इन्फेक्शन के कारण अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था। हालांकि, उन्हें किसी और गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं नहीं थी। बहरहाल, तिब्बती कार्यकर्ता और बीजिंग दोनों इस बात से अवगत हैं कि उनकी मृत्यु हिमालयी क्षेत्र में स्वायत्तता के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है। एक नोबल पुरस्कार विजेता, नैतिक शिक्षाओं और उनके ह्यूमर ने ही उन्हें दुनिया का सबसे लोकप्रिय धार्मिक नेता बना दिया है। 14वें दलाई लामा वर्ष 1959 में  भारत आ गए थे। भारत ने उन्हेंं राजनीतिक शरण दी थी और तब से वे हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में रह रहे हैं।

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