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मंदिर निर्माण के नाम पर शोषण का आरोप; धोखे से अमेरिका ले जाए गए मजदूरों ने ली कोर्ट की शरण

अमेरिका की न्यू जर्सी में दुनिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर बन रहा है। फिलहाल यह मंदिर निर्माणाधीन है। मामला दरअसल मजदूरों को समय से वेतन न मिलने और समय से अधिक काम कराने पर रुका हुआ है। क्योंकि यह मन्दिर भारत में नहीं बल्कि यहां से लगभग दस हजार किलोमीटर दूर सात समंदर पार अमेरिका में बन रहा है, इसलिए यूएस ने लगभग सौ से अधिक मजदूरों को भारत से एक कॉन्ट्रैक्ट के तहत बुला कर उन्हें निर्माण कार्य करने के लिए रखा है। न्यू जर्सी के राबिंसविल में लगभग एक हजार करोड़ रुपये की लागत से बन रहा अक्षरधाम मंदिर क्षेत्रफल के हिसाब से (162 एकड़) विश्व का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर है।

भारतीय मजदूरों ने मानक से कम वेतन मिलने का गम्भीर आरोप

भारत के सैकड़ों हाशिये पर पड़े मजदूरों को न्यू जर्सी में एक विशाल हिंदू मंदिर के निर्माण के लिए भर्ती किया गया था, जहाँ उन्हें संयुक्त राज्य अमेरिका के श्रम और इमीग्रेशन कानूनों का उल्लंघन करते हुए कम वेतन के साथ-साथ निश्चित समय से अधिक समय तक काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

मंदिर में 200 से अधिक भारतीय निर्माण श्रमिकों की ओर से नेवार्क में अमेरिकी जिला न्यायालय में मंगलवार को दायर की गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि “इस देश में श्रमिकों पर लागू सबसे बुनियादी कानूनों का यह सीधा-सीधा उल्लंघन है”।

 

अमेरिका में नियमानुसार मजदूरों को प्रतिदिन न्यूनतम $12 देने का है प्रावधान

अमेरिका के जिला न्यायालय में दायर मुकदमे में पांच भारतीय श्रमिकों ने मुख्यतः से अपनी बात रखी है। उन्होंने बोचासनवासी श्री अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्थान, या बीएपीएस पर भी मजदूरों के साथ भेदभाव करने के आरोप लगाये हैं और भारत में उन्हें भर्ती करने से संबंधित अन्य संस्थाओं को भी उनके इस स्थिति के लिए ज़िम्मेदार ठहराया है।

उन्होंने दायर मुकदमे में स्पष्ट लिखा है कि उन्हें अमेरिका में सिर्फ एक ही मन्दिर निर्माण करने के लिए लाया गया था लेकिन अभी तक उनसे 87 से अधिक मंदिरों में काम करने के लिए मजबूर किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि यहाँ के नियम के अनुसार हमें प्रति माह न्यूनतम $ 450 मिलने चाहिए पर हमें एक महीने के लिए मात्र $50 ही दिए जा रहे हैं यानि कि $ 1.20 एक घंटे के लिए। नकद बस इतना ही। अन्य जो भी मिल रहा वह हमारे भारत के खाते में जमा किया जा रहा है।

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न्यू जर्सी का नियम के अनुसार मजदूरों के लिए न्यूनतम वेतन $ 12 प्रति घंटा है और अमेरिकी कानून के हिसाब से मजदूरों से एक हफ्ते में 40 घंटे से अधिक काम कराने पर विशेष नियम लागू होता है। नियम की बात करें तो इससे अधिक काम कराने पर अधिकांश प्रति घंटा कामगारों के वेतन वृद्धि को निर्धारित किया जाता है।

मुकदमा कहता है कि श्रमिकों को लगातार निगरानी में रखा गया था और उन्हें बाहरी लोगों से बात करने पर वेतन में कटौती, गिरफ्तारी और भारत लौटने की धमकी दी गई थी।

दायर मुकदमें के बाद कोर्ट ने एफबीआई एजेंट को मन्दिर परिसर के भीतर जाकर मामले की तहकीकात करने का आदेश दिया था। जिसके उपरांत एफबीआई के अधिकारियों ने इस मामले में अपना निरीक्षण कार्य शुरू कर दिया है।

 

आपको बता दें कि वर्तमान में सबसे बड़ा मंदिर तमिलनाडु के श्रीरंगम में 156 एकड़ में बना श्री रंगनाथ स्वामी मंदिर है। वैसे अक्षरधाम मंदिर अमेरिका के कई शहरों में बने हैं। एटलांटा, ह्यूस्टन, शिकागो, लॉस एंजिलिस सहित कनाडा के टोरंटो में भी यह मंदिर हैं लेकिन इसकी मूल संस्था बीएपीएस (बोकसंवासी श्रीअक्षर पुरूषोत्तम स्वामी नारायण संस्था) द्वारा गांधी नगर गुजरात और दिल्ली के यमुना तट पर बने मंदिर विशाल हैं। गांधी नगर का मंदिर 23 एकड़ जबकि दिल्ली का 60 एकड़ में बना है। लेकिन राबिंसविल का मंदिर न केवल इनसे बड़ा बल्कि विश्व के किसी भी दूसरे मंदिर से ज्यादा बड़ा है।

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