[gtranslate]
world

दहशत में अफगानी महिला न्यायाधीश

अफगानिस्तान में सत्ता हथियाने के साथ ही तालिबान ने महिलाओं पर अत्याचार शुरू कर डाले हैं। हालांकि इस बार उसे पूरे देश भर में विरोध -प्रदर्शनों का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन महिलाओं द्वारा किए जा रहे प्रतिरोध से तालिबान पीछे हटते नजर नहीं आ रहा। उन्होंने लड़कियों और महिलाओं के अधिकारों में भारी कटौती करते हुए एक बार फिर से अपनी क्रूरता शुरू कर डाली है।

गौरतलब है कि अफगानिस्तान में तालिबान सरकार के काबिज होते ही सबसे ज्यादा दयनीय स्थिति महिलाओं की हो गई है। महिलाओं में तालिबान की क्रूरता का डर इतना बढ़ गया है कि 220 से अधिक महिला जज तालिबानियों की सजा के डर से छिपी हुई है।

दरअसल, ये वहीं महिला जज हैं, जिन्होंने अपने करियर के दौरान सैकड़ो पुरुषों के खिलाफ हिंसा, रेप , हत्या आदि के मामले में सजा सुनाई थी। लेकिन अब वही कैदी जेल से रिहा होने के बाद इन महिला जजों को जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। इन लोगों द्वारा महिला जजों को अनजान नंबरों से फोन पर टेक्स्ट, मैसेज ,आदि भेज रहे हैं।

अफगानिस्तान में अब तक 270 महिलाएं जजों के रूप में काम कर चुकी हैं। इनमें से कई देश की प्रसिद्ध और ताकतवर महिलाएं रही हैं। बड़ी हस्तियों में शामिल इन महिलाओं की भी स्थिति अब खराब हो चुकी है।

यह भी पढ़ें : तालिबान का क्रूर चेहरा

एक रिपोर्ट में अफगानी जज मासूमा ने बताया कि कई महीने पहले जब तालिबान ने देश पर कब्ज़ा नहीं किया था। तब उन्होंने एक केस में तालिबान के एक सदस्य द्वारा अपनी पत्नी की हत्या के आरोप में 20 साल की सजा सुनाई थी। उसके बाद से ही तालिबान का वह सदस्य जज को लगातार धमकियां दे रहा था। अपराधी ने धमकी दी थी कि उन्हें ढूंढ लेगा और उन्हें भी अपनी पत्नी की तरह ही मौत की घाट उतार देगा। लेकिन उन्हें नहीं पता था कि एक दिन देश पर तालिबान का कब्ज़ा होगा और अब भी धमकियां शुरू हो गई हैं।

बताया जा रहा है कि अफगानिस्तान में तालिबान के डर से 220 महिला जज छुपी हुई हैं। सभी महिला जजों को तालिबान के सदस्य जान से मारने धमकी दे रहे हैं। ये सब वही लोग है जिनको पहले किसी न किसी आरोप में सजा दी गई थी। सभी महिलाएं जज धमकी मिलने के बाद इतना डर गई है कि उन्होंने अपने फोन नंबर तक बदल दिए हैं।

गौरतलब है कि अफगानिस्तान महिलाओं के अधिकार के मामले में सबसे खराब रहा है। ह्यूमन राइट्स वॉच के अनुसार, यहां पर 87% महिलाएं और लड़कियां अपने जीवन में दुर्व्यवहार का सामना जरूर करती हैं।

देश की जानी-मानी हस्तियों में शुमार इन सभी छह पूर्व जजों ने यह भी बताया कि इन्होंने अपने करियर के दौरान भी प्रताड़ना का सामना किया है। घर में सुरक्षित मौजूद आसमा ने कहा, “मैं अपने देश की सेवा करना चाहती थी। इसी वजह से मैं जज बनी थी। ” पारिवारिक मामलों के न्यायालय में मैंने उन अधिकतर मामलों को देखा जिनमें महिलाएं तालिबान के सदस्यों से तलाक चाहती थीं।

सभी छह महिला जजों ने कहा है कि वे अभी भी देश से बाहर निकालने के रास्ते तलाश रही हैं। उनके आगे कई मुश्किलें हैं कि न ही उनके पास पैसा है और न ही परिवार के क़रीबी सदस्यों के पास पासपोर्ट है। ब्रिटेन में रह रहीं पूर्व अफगान जज मार्ज़िया बाबाकारखैल ने सभी पूर्व महिला जजों को सुरक्षित देश से निकालने की मांग की है।

इस मामले पर तालिबान ने क्या कहा ?

इस मामले पर तालिबानी प्रवक्ता बिलाल करीमी ने कहा कि महिला जजों को बाकी महिलाओं की तरह बिना डरे रहना चाहिए। हमारी स्पेशल मिलिट्री यूनिट इस मामले की जांच करेगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी।

साथ ही उन्होंने तालिबान के पुराने वादे को भी दोहराया। जिसमें तालिबान ने कहा था कि पिछली सरकार की तरह सभी कर्मचारियों को माफ़ी दे दी गई है। लेकिन फिर भी कोई देश छोड़कर जाना चाहता है तो हमारा निवेदन कि ऐसा न करे वह सभी अपने देश में रहें ।

भविष्य में महिला जज होंगी !

अफगानिस्तान का नया क्रूर नेतृत्व महिला अधिकारों को कितनी तवज्जो देगा। इसके बारे में अभी कुछ भी कहा नहीं जा सकता। लेकिन अभी तक देखने पर यह ज्ञात होता है कि हालात गंभीर हैं। अभी तक मंत्रिमंडल की घोषणा में किसी भी महिला को जगह नहीं दी गई है और न ही महिला मामलों को लेकर किसी की नियुक्ति हुई है। वहीं स्कूलों को लेकर शिक्षा मंत्रालय ने आदेश जारी किया है कि पुरुष शिक्षक और बच्चे स्कूल में लौंटें जबकि महिला स्टाफ और छात्राओं को नहीं बुलाया गया है।

तालिबान की ओर से प्रवक्ता करीमी ने कहा कि वो इस बात पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे कि भविष्य में महिला जजों की कोई भूमिका होगी या नहीं। उन्होंने कहा, “महिलाओं के काम करने की स्थिति और अवसरों के बारे में चर्चा जारी है।

अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा हुए एक महीने से भी ज्यादा समय हो गया है। अमेरिकी फौज की वापसी बाद सत्ता पर काबिज तालिबान ने एक बार फिर से कठोर इस्लामी कानूनों को लागू कर दिया है। अफगानिस्तान में की जा रही बर्बरता खासकर महिलाओं के अधिकारों को लेकर तालिबानी फरमानों से पूरी दुनिया चिंतित हैै। संयुक्त राष्ट्र से लेकर दुनियाभर की सरकारें अफगानिस्तान में शांति कायम किए जाने की बात कर रही हैं। इस बीच तालिबान ने एक कदम आगे बढ़कर महिला मंत्रालय को ही खत्म कर दिया है। इस मंत्रालय की जगह ‘मिनिस्ट्री ऑफ प्रमोशन एंड प्रिवेंशन ऑफ वाइस’ को सक्रिय कर दिया है। अफगानिस्तान में जब से तालिबान की सरकार बनी है, तब से महिलाओं को लेकर जो फैसले हुए हैं उसने महिला वर्ग को दहशत में डाल दिया है।

You may also like

MERA DDDD DDD DD