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बीते तीन साल में 85 देशों में अमेरिकी सैनिकों की कार्रवाई : रिपोर्ट

दुनिया में कहीं पत्ता भी हिले तो इसकी खबर अमेरिकी सेना को हो जाती है। दुनिया के हर हिस्से पर अमेरिकी सेना अपनी पैनी नजर गड़ाए रखती है। इसलिए जब भी किसी देश में युद्ध की स्थिति पैदा होती है वहां अमेरिका की सेना पहुंच जाती है। ऐसा माना जाता है कि ब्रह्मांड के सबसे ताकतवर देश अमेरिका के दो लाख से ज्यादा सैनिक दुनिया भर के 180 देशों में फैले हुए हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति बिडेन द्वारा अफगानिस्तान से अपनी सेना को वापस बुलाने के बाद बिडेन ने घोषणा की कि दूसरे देशों से भी सैनिक अभियानों को खत्म किया जाएगा। लेकिन अनुसंधानकर्ता स्टीफाइन सावेल के जुटाए आंकड़ों के आधार पर  यूएसए टुडे अख़बार में छपी  अमेरिकी अखबार यूएसए टुडे ने अपनी एक ताजा रिपोर्ट में खुलासा किया कि ‘आतंक के खिलाफ’ अमेरिका द्वारा दुनिया में कुल कितने अभियान चलाए जा रहे हैं इसकी जानकारी खुद अमेरिका के नागरिकों तक को नहीं है। इस बारे में अभी तक खुद अमेरिका के लोगों को पूरी जानकारी नहीं है।

स्टीफाइन सावेल ने इस बात का भी विशेष रूप से उल्लेख किया है कि दुनिया के हर हिस्से में अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। जिसके चलते अमेरिका के लिए आतंक के खिलाफ हर क्षेत्र में सैनिक कार्रवाई करना सरल रहता है। कॉस्ट्स ऑफ वॉर प्रोजेक्ट के आंकड़ों के मुताबिक इन युद्धों में आम लोगों और हजारों अमेरिकी सैनिकों की मौतें हुई है। तीन करोड़ 70 लाख से ज्यादा लोग इस कारण विस्थापन को मजबूर हुए। लगभग दो दशक से युद्ध चल रखा है। इस युद्ध में करीबन 6.4 ट्रिलियन डॉलर की रकम खर्च हो चुकी है।

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अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका की इन सैनिक कार्रवाइयों के दायरे में पिछले तीन वर्षों में दुनिया के कम से कम 85 देश आए हैं।  ‘आतंक के खिलाफ युद्ध’ की शुरुआत अमेरिका ने अपनी धरती पर दुनिया का सबसे बड़ा आतंकी होने के बाद की। 9/11 के हमले के बाद अमेरिकी सैन्य मिशन चला और इसके 20 महीने बाद ही तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने एलान किया था कि अमेरिका का ये मिशन पूरा हो गया है। लेकिन सच्चाई यह है कि उस घोषणा के 18 साल बाद अभी भी पश्चिम एशिया और दुनिया के दूसरे इलाकों में अमेरिका की सैनिक कार्रवाइयां चल रही हैं। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिका ने वर्ष 2018 से 2020 के बीच 85 देशों में ‘आतंकवाद विरोधी कार्रवाइयां’ की है।
आतंकवाद पर युद्ध विरोधी विश्लेषकों का तर्क है कि अब अमेरिका के लिए सबसे बड़ा खतरा विदेशी आतंकवादी नहीं, बल्कि घरेलू चरमपंथी हैं। पिछले साल अक्टूबर में अमेरिकी गृह मंत्रालय की एक रिपोर्ट में भी इस बात को रेखांकित  किया गया था। इसके अलावा कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर और जलवायु परिवर्तन अमेरिका के लोगों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। कॉस्ट ऑफ वॉर रिपोर्ट में कहा गया है कि इन खतरों को नजरअंदाज करते हुए अमेरिका अभी भी हर साल सेना पर 7.5 बिलियन डॉलर से अधिक खर्च कर रहा है।
यूएसए टुडे के अनुसार कई अमेरिकी सैनिक विशेषज्ञों के एक पक्ष का कहना है कि आतंक के खिलाफ युद्ध की जो कीमत चुकाई गई, उससे हुए लाभ  उसकी तुलना में कहीं अधिक देखे गए हैं। वहीं दूसरे पक्ष के विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका को इन युद्धों से नुकसान हुआ है। उनका कहना है कि अब युद्ध के चरित्र में बदलाव आ चुका है। अब हैकिंग जैसे साइबर हमलों से देश का बचाव चुनौती बन गया है और अमेरिका अब भी इससे रक्षा के लिए पूरी तरह से तैयार नहीं है।

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