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जर्मन कंपनी का दावा, उनके बनाए कोरोना वैक्सीन को खरीदना चाहता था अमेरिका

व्हाइट हाउस का दावा- सूरज की रोशनी, गर्म तापमान और ह्यूमिडिटी से नष्ट होता है कोरोना

कोरोना वायरस की शुरुआत चीन के वुहान शहर से हुई और चीन के इसी शहर में सबसे ज्यादा इससे प्रभावित मरीज पाए गए हैं। वुहान से फैला ये वायरस अब पूरी दुनिया को अपने कब्जे में ले चुका है।  हालांकि, खबरें आ रही हैं कि चीन ने काफी हद तक इस वायरस पर काबू पा लिया है। लेकिन वहीं एशिया और यूरोप पर इसका सबसे ज्यादा प्रभाव देखने को मिल रहा है। पूरे विश्व में अब तक इस वायरस के कारण 6500 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं जबकि एक लाख 70 हजार लोग इसके संक्रमित हैं। कहा जा रहा है कि अभी तक इस वायरस को खत्म करने वाली वैक्सीन का इजाद नहीं हुई है।

द गार्जियन में छपी एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कोरोना काकहर अभी एख साल और रहने वाला है। दावा ये भी किया जा रहा है कि इस वायरय का सबसे घातक परिणाम ब्रिटेन में होने वाला है। अखबार के रिपोर्ट के मुताबिक, अगले 12 महीने तक ब्रिटेन कोरोना वायरस से जूझेगा और करीब 80 लाख लोग इसके संक्रमण से प्रभावित होंगे। गार्जियन का दावा है कि उनके पास पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड (PHE) की एक रिपोर्ट है जो उन्हें NHS (National Health System) के एक अधिकारी से मिली है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले 12 महीनों में ब्रिटेन को कोरोना से होने वाली तबाही के लिए तैयार रहना होगा।

वहीं दूसरी तरफ कहा जा रहा है कि कोरोना को रोकने के लिए जर्मन की एक मेडिकल फर्म कंपनी वैक्सिन तैयार करने के करीब है। मेडिकल फर्म ने दावा है कि ट्रंप प्रशासन उन्हें खरीदना चाहती है। क्योर वेक नाम की फार्म के मुताबिक, न सिर्फ ट्रंप इस मुलाकात में शामिल रहे बल्कि उन्होंने उनके रिसर्च को अमेरिका शिफ्ट करने के लिए अच्छी-खासी रकम देने का भी ऑफर किया है।

फर्म का दावा है कि ये मीटिंग 2 मार्च को व्हाइट हाउस में हुई थी। क्योर वेक की चीफ एक्जीक्यूटिव डेनियल मेनिशेला ने बताया कि इस मीटिंग में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उप-राष्ट्रपति माइक पेंस मौजूद थे जिन्हें व्हाइट हाउस कोरोना वायरस टास्क फोर्स की जिम्मेदारी दी है। डिनियल ने बताया कि हमने उन्हें कहा कि हम कुछ ही दिनों में कोरोना की वैक्सीन को इजाद कर लेंगे।

जर्मन अखबार डाई वेल्ट के मुताबिक, ट्रंप ने वैक्सीन तक पहुंच के एक्सक्लूसिव राइट्स के लिए क्योर वेक को 1 बिलियन अमेरिकी डॉलर यानी करीब 7500 करोड़ रुपये देने का ऑफर दिया था। ट्रंप चाहते थे कि कोरोना की वैक्सीन सिर्फ और सिर्फ अमेरिका में ही बननी चाहिए। अमेरिकी मूल के डिनियल ने उस समय जर्मन लोगों को झटका दिया जब उन्होंने अचानक ही कंपनी छोड़ने की घोषणा कर दी। हालांकि, कंपनी छोड़ने की वजह अभी तक सामने नहीं आई है। डिनियल पिछले दो साल से कंपनी के हेड है।

रविवार को कंपनी ने जर्मनी में अपने वैक्सीन कार्य का वर्णन करते हुए एक बयान जारी किया। कंपनी ने कहा कि क्योर वेक वर्तमान मीडिया अटकलों पर टिप्पणी करने से इनकार करता है और कंपनी या इसकी तकनीक की बिक्री के दावों को स्पष्ट रूप से खारिज करता है। व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने अभी तक किसी भी टिप्पणी के अनुरोधों का तुरंत जवाब नही दिया। दो वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों ने जर्मन के अखबारों पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ जर्मन समाचार पहली बार कहानी की रिपोर्टिंग ओवरब्लो की गई थी। विशेष रुप से अमेरिका द्वारा कोरोना वायरस की वैक्सीन खरीदने के मामले में खबरों को ज्यादा बढ़ा-चढ़ा कर पेश कर रहा है।

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