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बोरिस जॉनसन को झटका, सांसदों ने ब्रेग्जिट में देरी के लिए वोट किया

ब्रिटिश सांसदों ने ब्रेग्जिट समझौते के निर्णय को टालने के लिए वोट करते हुए ब्रिटिश पीएम बोरिस जॉनसन को तगड़ा झटका दिया है। इससे उनकी सरकार के इस महीने के आखिर तक यूरोपीय संघ से ब्रिटेन को बाहर लाने की योजना पर पानी फिरता हुआ नजर आ रहा है।

ब्रिटिश संसद के एक विशेष अधिवेशन में ब्रिटिश सांसदों ने 306 वोटों के मुकाबले 322 वोटों से ब्रेग्जिट समझौते के निर्णय को टालने का फैसला किया। सांसदों ने कहा कि वे समझौते के ब्योरे का अध्यन करने के लिए और समय चाहते हैं। ब्रिटेन को 31 अक्टूबर तक डील या नो डील ब्रेग्जिट के लिए यूरोपीय संघ को बताना है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को गत शनिवार को तब तगड़ा झटका लगा जब सांसदों ने ब्रेग्जिट में देरी के लिए वोट किया। 31 अक्तूबर को ब्रेग्जिट नहीं कराने के पक्ष में 322 जबकि विरोध में 306 मत ही मिल सके। 37 साल में पहली बार सप्ताहांत को संसद पहुंचे सांसदों के ब्रेग्जिट समझौते के निर्णय को टालने के फैसले से जॉनसन सरकार के इस महीने के आखिर तक यूरोपीय यूनियन (ईयू) से ब्रिटेन को बाहर लाने की योजना पर पानी फिरता नजर आ रहा है।

ब्रिटेन को 31 अक्तूबर तक डील या नो डील ब्रेग्जिट के लिए ईयू को बताना है। इस दौरान सांसदों ने एक संशोधन का समर्थन किया, जिसके तहत ब्रेग्जिट के लिए अगले साल जनवरी तक का समय मांगने का अनुरोध है। इससे पहले प्रधानमंत्री जॉनसन ने ईयू से ब्रिटेन के अलग होने में और देरी के विरुद्ध सांसदों को चेताया और कहा कि, ब्रेग्जिट में और देरी का मतलब नहीं है।

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संसद में चर्चा के दौरान 10 लाख से अधिक की संख्या में ब्रेग्जिट विरोधी संसद के बाहर व अन्य स्थानों पर एकत्रित हो गए और प्रधानमंत्री जॉनसन के पुतलों की झांकियां निकाली।  इससे पहले ब्रिटेन के सांसद प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के ब्रेग्जिट सौदे पर ऐतिहासिक मतदान करने के लिए शनिवार को एकत्र हुए। मतदान के बाद आए फैसले के तहत ब्रिटेन इस महीने यूरोपीय संघ से बाहर हो जाएगा या देश एक बार फिर नई अनिश्चितता में घिर जाएगा।

हाउस ऑफ कॉमन्स ने 1982 के बाद से पहली बार शनिवारीय बैठक की। इसके बाद जॉनसन द्वारा गुरुवार को यूरोपीय संघ के नेताओं के साथ ब्रेक्जिट के संबंध में हुए समझौते की शर्तों पर चर्चा होगी। विपक्षी दलों और उत्तरी आयरलैंड के जॉनसन के अपने सहयोगियों ने इस सौदे को खारिज किया है, लेकिन प्रधानमंत्री और उनकी टीम ने सांसदों का समर्थन हासिल करने के लिए पिछले 48 घंटों में अथक प्रयास किए हैं। इस पेचीदा प्रक्रिया के चलते ब्रिटेन 2016 से राजनीतिक संकट में घिरा हुआ है।

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